डायबिटीज मरीजों में बढ़ रहा डीएमई खतरा, समय पर रेटिना जांच जरूरी

Report By: Kiran Prakash Singh

डायबिटीज मरीजों के लिए बड़ी चुनौती बन रही डीएमई, रेटिना की समय पर जांच जरूरी: विशेषज्ञों की चेतावनी

नई दिल्ली (digitallivenews)।
भारत में डायबिटीज के बढ़ते मामलों के साथ एक और गंभीर समस्या सामने आ रही है—डायबिटिक मैक्युलर एडिमा (DME)। यह एक ऐसी आंखों की बीमारी है, जो शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखाती लेकिन धीरे-धीरे रेटिना को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर समय पर रेटिना की जांच न कराई जाए, तो यह स्थायी अंधेपन का कारण बन सकती है।

क्या है डीएमई (DME)?

डायबिटिक मैक्युलर एडिमा तब होता है जब डायबिटीज के कारण आंख की रेटिना की छोटी रक्त वाहिकाएं कमजोर हो जाती हैं और उनसे तरल पदार्थ रिसने लगता है। यह तरल पदार्थ मैक्युला (जो आंखों को बारीक चीजें देखने में मदद करता है) में जमा हो जाता है, जिससे सूजन, धुंधली दृष्टि और अंततः अंधापन हो सकता है।

विशेषज्ञों की चेतावनी

विश्व रेटिना दिवस के मौके पर आयोजित एक राष्ट्रीय कॉन्क्लेव में देशभर के रेटिना विशेषज्ञों और एंडोक्रिनोलॉजिस्ट ने इस समस्या पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि:

“हर डायबिटीज मरीज की नियमित रेटिना स्क्रीनिंग जरूरी है। डीएमई का पता शुरुआती स्तर पर ही लगाना जरूरी है क्योंकि एक बार रेटिना को नुकसान पहुंचने के बाद उसे पूरी तरह ठीक करना बेहद मुश्किल है।”

भारत में डायबिटीज और डीएमई का खतरा

  • वर्तमान में 10 करोड़ भारतीय डायबिटीज से पीड़ित हैं

  • वर्ष 2045 तक यह संख्या 13.42 करोड़ तक पहुंच सकती है

  • साल 2025 तक हर 14 में से 1 भारतीय को डीएमई हो सकता है

  • यह बीमारी कामकाजी उम्र के लोगों में अंधेपन का प्रमुख कारण बन रही है

डीएमई से जुड़ी प्रमुख चुनौतियाँ

  • सीमित जागरूकता और जानकारी की कमी

  • उपचार का उच्च खर्च, विशेषकर बार-बार दिए जाने वाले इंजेक्शन

  • समय पर जांच न हो पाना, खासकर ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में

  • रेटिना के नुकसान की भरपाई नहीं हो पाना, अगर इलाज देर से शुरू हो

समाधान क्या है?

  • हर डायबिटिक मरीज को साल में कम से कम एक बार रेटिना की जांच करानी चाहिए

  • सरकार और स्वास्थ्य संस्थानों को जागरूकता अभियान चलाने चाहिए

  • कम लागत वाले और सुलभ इलाज के विकल्पों को बढ़ावा देना चाहिए

  • स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में डीएमई के इलाज को शामिल किया जाना चाहिए

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