
Report By: Kiran Prakash Singh
यूपी विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में ‘राम ने यादव को मारा’ और पिता के नाम में ‘बी.कॉम’ जैसी प्रविष्टियों पर विवाद हुआ। CEO कार्यालय ने सॉफ्टवेयर की त्रुटि और मानवीय लापरवाही की आशंका जताई।
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यूपी की वोटर लिस्ट में अजीब नामों पर विवाद, विपक्ष ने उठाए सवाल
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उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में कथित तौर पर अजीब नाम और गलत विवरण दर्ज होने के मामले ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सूची में कहीं मतदाता का नाम ‘राम ने यादव को मारा’, तो कहीं पिता के नाम वाले कॉलम में ‘बी.कॉम’ दर्ज होने की बात सामने आई। विपक्षी नेताओं ने इन प्रविष्टियों को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने इसे अंग्रेजी से हिंदी में नामों के लिप्यंतरण के दौरान हुई संभावित सॉफ्टवेयर त्रुटि और मानवीय लापरवाही से जुड़ा मामला बताया है। कार्यालय के मुताबिक, ऐसी 158 प्रविष्टियां सामने आई हैं और संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
1. सॉफ्टवेयर की गलती से कैसे बना अजीब नाम?
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में पहली बार ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा दी गई थी। इस प्रक्रिया में अंग्रेजी में दर्ज नामों को हिंदी में बदलने के लिए सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया।
कार्यालय ने बताया कि कुल 14,81,310 प्रविष्टियों में से 158 प्रविष्टियां ऐसी मिलीं, जिनमें मतदाताओं या उनके संबंधियों के नाम असामान्य दिखाई दिए।
उदाहरण के तौर पर, यदि ‘रामहित यादव’ को अंग्रेजी में Ramhit Yadav लिखने के बजाय Ram hit Yadav टाइप कर दिया जाए, तो सॉफ्टवेयर इसे नाम के रूप में लिप्यंतरित करने के बजाय वाक्य के अर्थ में बदल सकता है। इससे हिंदी में ‘राम ने यादव को मारा’ जैसा परिणाम सामने आ सकता है।
CEO कार्यालय के अनुसार, प्रविष्टियों को संपादित करके सुधारने की व्यवस्था थी, लेकिन कुछ मामलों में गलतियां बनी रह गईं। पिता के नाम वाले कॉलम में ‘B.Com’ दर्ज होने को भी मानवीय भूल या लापरवाही से जुड़ा बताया गया है।
2. साकेत गोखले ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
तृणमूल कांग्रेस के सांसद साकेत गोखले ने मतदाता सूची में सामने आई कथित गड़बड़ियों को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने सॉफ्टवेयर की गलती वाले स्पष्टीकरण पर आपत्ति जताते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।
गोखले ने मतदाता सूची तैयार करने में इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर का सोर्स कोड सार्वजनिक करने की मांग भी की। उनका आरोप है कि चुनावी प्रक्रियाओं में इस्तेमाल होने वाली तकनीक की पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
हालांकि, मतदाता सूची में गलत प्रविष्टियां मिलना अपने आप में चुनावी धांधली का प्रमाण नहीं है। इस मामले में तकनीकी जांच और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
3. श्रीनिवास बी.वी. ने कसा तंज
कांग्रेस से जुड़े श्रीनिवास बी.वी. ने भी कथित गलत अनुवाद पर व्यंग्य किया। उन्होंने ‘रामहित यादव’ के उदाहरण का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि अंग्रेजी में नाम टाइप करने की गलती से उसका अर्थ बदलकर पूरा वाक्य कैसे बन गया।
उन्होंने इस मामले पर तंज कसते हुए पूछा, ‘सॉफ्टवेयर है कि हिट की दुकान?’
उनकी प्रतिक्रिया के जरिए मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर की गुणवत्ता और मानवीय निगरानी को लेकर सवाल उठाए गए।
4. संजय सिंह और मनोज काका ने भी जताई नाराजगी
आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने मतदाता सूची में पिता के नाम वाले कॉलम में ‘बी.कॉम’ दर्ज होने और ‘राम ने यादव को मारा’ जैसी कथित प्रविष्टियों पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि इस तरह की गलतियां मतदाता सूची में कैसे दर्ज हो गईं।
वहीं, AAP से जुड़े मनोज काका ने एक अन्य कथित प्रविष्टि का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि ‘अफजल अहमद’ नाम के मतदाता के पिता के नाम वाले कॉलम में ‘मोहम्मद इकबाल भीख मांगते हैं’ दर्ज था।
मनोज काका ने पूछा कि मतदाता सूची में इस तरह की गलतियों के लिए कौन जिम्मेदार है और अधिकारियों की जवाबदेही कैसे तय होगी। ये नेताओं की ओर से उठाए गए सवाल और दावे हैं; संबंधित प्रविष्टियों की पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड से की जानी जरूरी है।
5. CEO कार्यालय ने अधिकारियों से मांगा स्पष्टीकरण
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने कहा कि मतदाता सूची की सभी प्रविष्टियों को त्रुटिरहित रखना संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की जिम्मेदारी है। कार्यालय के मुताबिक, मंडलायुक्त संबंधित मतदाता सूची के निर्वाचन रजिस्ट्रेशन अधिकारी (ERO) हैं, जबकि जिले के जिलाधिकारी सहायक निर्वाचन रजिस्ट्रेशन अधिकारी (AERO) की भूमिका निभाते हैं।
कार्यालय ने इन अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है और जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि गलत प्रविष्टियों के कारण किसी मतदाता को परेशानी न हो।
इस मामले में अब तीन पहलू महत्वपूर्ण हैं—गलत प्रविष्टियां कैसे दर्ज हुईं, उन्हें ठीक करने के लिए क्या कदम उठाए गए और भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए क्या व्यवस्था होगी। चुनाव आयोग की ओर से बताई गई तकनीकी त्रुटियों और विपक्ष के सवालों के बीच सुधार प्रक्रिया और अधिकारियों की जवाबदेही पर नजर रहेगी।
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