हजरतबल दरगाह में अशोक चिन्ह तोड़े जाने पर बवाल

Report By: Kiran Prakash Singh

हजरतबल दरगाह में अशोक चिन्ह तोड़े जाने पर बवाल, वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने कहा – ‘यह धार्मिक आस्था पर हमला, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई’

श्रीनगर, (digitallivenews)।
जम्मू-कश्मीर की हजरतबल दरगाह में हाल ही में हुए जीर्णोद्धार कार्य के दौरान लगाए गए संगमरमर पर उकेरे गए अशोक चिन्ह को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस्लामी परंपराओं का हवाला देते हुए, स्थानीय भीड़ ने चिन्ह को जबरन तोड़ दिया, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दर्जनों लोगों को दरगाह परिसर में पत्थरबाज़ी करते और अशोक चिन्ह को ईंटों से तोड़ते हुए देखा जा सकता है।

इस घटना ने राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक हलकों में भारी प्रतिक्रिया पैदा की है। जहां एक तरफ प्रदर्शनकारी इसे धार्मिक मर्यादा के खिलाफ बताया, वहीं दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष और राज्य मंत्री डॉ. दरख़्शां अंद्राबी ने इसे “आस्था पर सुनियोजित हमला” करार दिया।


क्या है पूरा मामला?

हजरतबल दरगाह, जो कश्मीर घाटी का एक महत्त्वपूर्ण धार्मिक स्थल है, वहां हाल ही में सौंदर्यीकरण और जीर्णोद्धार कार्य चल रहा था। इसी प्रक्रिया के तहत दरगाह की बाहरी दीवार पर संगमरमर के एक पत्थर पर भारत का राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ (अशोक चिन्ह) उकेरा गया था।

लेकिन इस प्रतीक को लेकर कुछ स्थानीय लोगों ने विरोध जताया, उनका तर्क था कि इस्लामी मान्यताओं में किसी भी प्रकार की मूर्ति या प्रतीकात्मक आकृति को धार्मिक स्थलों में स्थान देना गैर-इस्लामी है। मामला बढ़ता गया और देखते ही देखते प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया, जिसके बाद भीड़ ने प्रतीक चिन्ह को तोड़ दिया


वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष डॉ. दरख़्शां अंद्राबी का कड़ा बयान

विवाद पर डॉ. दरख़्शां अंद्राबी ने सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए कहा:

“जब मैंने प्रतीक चिन्ह को टूटा हुआ देखा, तो मुझे ऐसा लगा जैसे मुझ पर बादल फट गया हो। यह हमारी श्रद्धा, पहचान और एकता पर सीधा प्रहार है।”

उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना के पीछे कुछ राजनीतिक और कट्टरपंथी ताकतें हैं, जो दरगाह की पवित्रता को बिगाड़ना चाहती हैं और जनता में भ्रम फैलाकर अराजकता पैदा करना चाहती हैं।

अंद्राबी ने दोषियों को आतंकवादी करार देते हुए उनकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि:

“ऐसे लोगों के खिलाफ पीएसए (जन सुरक्षा अधिनियम) के तहत एफआईआर दर्ज की जाएगी। यह धार्मिक स्थल है, राजनीति का मंच नहीं।”


प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से की सीधी अपील

डॉ. अंद्राबी ने इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा और सांप्रदायिक सौहार्द्र से जोड़ते हुए, सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा:

“मैं प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से अपील करती हूं कि वे सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दें कि इन देश-विरोधी तत्वों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।”

उन्होंने यह भी कहा कि ट्वीट और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मामले को भड़काने वाले नेताओं पर भी कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।


धर्म, राजनीति और अफवाह का खतरनाक मिश्रण

घटना ने कश्मीर की संवेदनशील सामाजिक स्थिति को एक बार फिर उजागर कर दिया है, जहां धर्म और राजनीति का मिश्रण अक्सर सांप्रदायिक तनाव का कारण बनता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं केवल धार्मिक भावनाओं से नहीं, बल्कि राजनीतिक उद्देश्यों और बाहरी उकसावे से भी प्रेरित होती हैं।


सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, जांच शुरू

श्रीनगर पुलिस और वक्फ बोर्ड की संयुक्त टीम ने वीडियो फुटेज के आधार पर कई संदिग्धों की पहचान कर ली है। सुरक्षा बलों को हजरतबल क्षेत्र में तैनात कर दिया गया है ताकि कोई और अप्रिय घटना न हो।

स्थानीय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वे धार्मिक भावनाओं के नाम पर हों या राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए की गई हों।


निष्कर्ष: आस्था का अपमान या परंपरा की रक्षा?

अशोक चिन्ह को दरगाह परिसर में लगाने और फिर उसके टूटने की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं –

  • क्या धार्मिक स्थलों में राष्ट्रीय प्रतीकों का स्थान होना चाहिए?

  • क्या कुछ तत्व धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल कर राजनीतिक अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं?

  • और सबसे महत्वपूर्ण, क्या कश्मीर में शांति बहाली के प्रयासों को ऐसी घटनाएं फिर से पटरी से उतार देंगी?

इन सवालों के जवाब वक्त देगा, लेकिन फिलहाल इतना तय है कि इस घटना ने एक बार फिर कश्मीर में ‘आस्था और अस्थिरता’ के बीच टकराव की रेखा को उजागर कर दिया है।

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