
Report By: Kiran Prakash Singh
मैसूर (digitallivenews)।
कर्नाटक के मैसूर जिले में स्थित नंजनगूड का श्रीकांतेश्वर मंदिर, 11वीं शताब्दी में बना एक ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर है। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर अपनी भव्यता और विशिष्टताओं के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है।
इस मंदिर की सबसे अनोखी विशेषता है — भगवान गणेश के 32 स्वरूपों वाली प्रतिमाएं, जो मंदिर के परकोटे पर स्थित हैं। नृत्य करते, बाल और तरुण रूपों में विराजमान ये गणेश प्रतिमाएं गेहुएं रंग के पत्थरों से बनी हैं, और मुद्गल तथा गणेश पुराणों में वर्णित स्वरूपों पर आधारित हैं। मंदिर संघ के अध्यक्ष श्रीकांत के अनुसार, यह विशेषता इस मंदिर को पूरी दुनिया में अद्वितीय बनाती है।
द्रविड़ स्थापत्य की शानदार मिसाल
कपिला (या काबिनी) नदी के किनारे स्थित यह मंदिर द्रविड़ स्थापत्य शैली में बना है। इसका सात मंजिला मुख्यद्वार (महाद्वार) 120 फीट ऊंचा है, जो विशाल आंगन में खुलता है। मंदिर परिसर करीब 50,000 वर्ग फीट में फैला है और इसमें 147 भव्य स्तंभ हैं। यहां 108 शिवलिंग, अलग-अलग गर्भगृहों में शिव, पार्वती और गणेश की प्रतिमाएं हैं।
पौराणिक महत्व और नाम की उत्पत्ति
शिव पुराण में इस स्थान का उल्लेख “श्री गरलपुरी” के नाम से मिलता है। नंजनगूड का अर्थ है — “जहर पीने वाले भगवान शिव का घर”, जहां “नंजु” का मतलब होता है जहर और “गूड” का मतलब स्थान। यही कारण है कि इसे दक्षिण का काशी भी कहा जाता है।
डोड्डा जत्रा उत्सव: आस्था का पर्व
हर साल मार्च-अप्रैल में यहां भव्य डोड्डा जत्रा उत्सव आयोजित होता है, जिसमें भगवान शिव, गणेश और अन्य देवी-देवताओं की रथ यात्रा निकलती है, जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र होती है।
भगवान गणेश के 32 स्वरूप:
इनमें प्रमुख हैं:
बाल गणपति, भक्त गणपति, वीर गणपति, नृत्य गणपति, एकदंत, सृष्टि, ऋणमोचन, योग गणपति, दुर्गा गणपति, संकट हरण गणपति आदि।
यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि वास्तुकला और सांस्कृतिक विरासत की दृष्टि से भी एक अमूल्य धरोहर है। अगर आप इतिहास, धर्म और शिल्पकला में रुचि रखते हैं, तो नंजनगूड का यह मंदिर आपके लिए एक आध्यात्मिक यात्रा का अद्वितीय पड़ाव बन सकता है।