दिल्ली में दोगुना हुआ एयरबोर्न बैक्टीरिया का खतरा: अध्ययन

Report By: Kiran Prakash Singh

दिल्ली जैसे शहरों में दोगुनी रफ्तार से फैलते हैं एयरबोर्न बैक्टीरिया: बोस इंस्टीट्यूट का खुलासा

नई दिल्ली | Digital Live News | 9 सितंबर 2025:
देश की राजधानी दिल्ली और अन्य महानगरों में वायुजनित संक्रमण एक गंभीर स्वास्थ्य खतरे के रूप में उभर रहे हैं। बोस इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक ताजा अध्ययन में खुलासा हुआ है कि घनी आबादी वाले इलाकों में एयरबोर्न बैक्टीरिया की संख्या कम आबादी वाले क्षेत्रों की तुलना में लगभग दोगुनी पाई गई है।

इस शोध को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के तहत बोस इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने अंजाम दिया है। इसका उद्देश्य था – यह समझना कि कैसे वायु प्रदूषण और जनसंख्या घनत्व मिलकर मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव डालते हैं।


संक्रमण की मुख्य वजह: वायुजनित रोगजनक

अध्ययन में पाया गया कि हवा में मौजूद सूक्ष्म जीवाणु (बैक्टीरिया) मुख्यतः निम्नलिखित संक्रमणों के लिए जिम्मेदार होते हैं:

  • श्वसन तंत्र (Respiratory system)

  • पाचन तंत्र (Intestinal system)

  • त्वचा (Skin)

  • मुँह (Oral cavity)

विशेष रूप से PM 2.5 (सूक्ष्म धूलकण) की अधिकता वाले इलाकों में ये बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ये कण फेफड़ों में गहराई तक प्रवेश करते हैं और बैक्टीरिया को शरीर में प्रवेश करने का रास्ता देते हैं, जिससे संक्रमण की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।


सर्दियों में बढ़ जाता है खतरा

शोधकर्ताओं ने चेताया कि दिल्ली जैसे बड़े शहरों में सर्दियों के मौसम में यह खतरा और भी अधिक हो जाता है।

  • पश्चिमी विक्षोभ के कारण तापमान गिरता है

  • हवा स्थिर हो जाती है, जिससे सूक्ष्मजीव लंबे समय तक वातावरण में बने रहते हैं

  • प्रदूषण और मौसम मिलकर संक्रमण के प्रसार को बढ़ावा देते हैं


शहरी स्वास्थ्य नीति के लिए चेतावनी

विशेषज्ञों का मानना है कि यह अध्ययन शहरी स्वास्थ्य योजनाओं और नीति निर्माण के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

यदि हम प्रदूषण, मौसम, पर्यावरणीय कारकों और जनसंख्या घनत्व के संयुक्त प्रभावों को समझें, तो

  • बीमारियों के प्रसार का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है

  • शहरी डिज़ाइन और स्वास्थ्य रणनीतियों में सुधार कर नागरिकों को संक्रमण से बचाया जा सकता है


निष्कर्ष

बोस इंस्टीट्यूट का यह शोध यह स्पष्ट करता है कि केवल प्रदूषण ही नहीं, बल्कि जनसंख्या घनत्व और पर्यावरणीय परिस्थितियाँ भी वायुजनित संक्रमणों में प्रमुख भूमिका निभाती हैं। आने वाले समय में स्वस्थ शहरों के निर्माण के लिए यह शोध एक नींव का पत्थर साबित हो सकता है।

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