
Report By: Kiran Prakash Singh
UPI के 2,000 रुपये से ज्यादा के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर संभावित MDR को लेकर राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधा। अमित मालवीय ने कांग्रेस के दावे को फेक बताया।
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UPI फीस विवाद पर सियासत तेज, राहुल गांधी के आरोपों पर अमित मालवीय का पलटवार
UPI ट्रांजैक्शन पर संभावित शुल्क को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। 2,000 रुपये तक के UPI और RuPay ट्रांजैक्शन पर शुल्क नहीं लेने से जुड़े सरकार के निर्देश के बाद 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर संभावित MDR को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुपचाप UPI पर फीस लगाने का रास्ता खोल रही है। दूसरी ओर बीजेपी नेता अमित मालवीय ने कांग्रेस के दावे को फेक बताते हुए कहा है कि 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI भुगतान पर 0.5 फीसदी टैक्स या कंज्यूमर चार्ज लगाने का कोई सरकारी आदेश नहीं है।
राहुल गांधी ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि सरकार ने 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट UPI लेन-देन पर MDR लगाए जाने की संभावना का रास्ता खोल दिया है। उनका दावा है कि ऐसे ट्रांजैक्शन संख्या के लिहाज से भले ही कम हों, लेकिन UPI की कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में इनका हिस्सा काफी बड़ा है।
राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि अगर ग्राहक से सीधे फीस नहीं ली जाएगी, तो दुकानदार पर लगने वाला शुल्क आखिर कहां से आएगा। उन्होंने आशंका जताई कि व्यापारी इस लागत को सामान की कीमतों में शामिल कर सकते हैं, जिसका अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों पर पड़ सकता है।
उन्होंने इसे अमेरिका की पेमेंट कंपनियों के दबाव और सरकार की नीतियों से भी जोड़ा और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने झुक रहे हैं।
अमित मालवीय ने कांग्रेस के दावे को बताया फेक
बीजेपी नेता अमित मालवीय ने राहुल गांधी और कांग्रेस के दावों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि 2,000 रुपये से ऊपर UPI पर 0.5 फीसदी टैक्स लगाए जाने की बात पूरी तरह गलत है।
मालवीय के मुताबिक, 5,000 रुपये के भुगतान पर 25 रुपये और 10,000 रुपये के भुगतान पर 50 रुपये वसूले जाने का दावा किसी सरकारी शुल्क सूची पर आधारित नहीं है। उन्होंने इसे केवल काल्पनिक 0.5 फीसदी दर से की गई गणना बताया।
उनके मुताबिक, 14 सितंबर की अधिसूचना में 2,000 रुपये तक के UPI और RuPay ट्रांजैक्शन पर जीरो-चार्ज व्यवस्था को स्पष्ट किया गया है। उन्होंने कहा कि इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि 2,000 रुपये से ऊपर के हर UPI भुगतान पर 0.5 फीसदी शुल्क लागू हो गया है।
P2P UPI ट्रांजैक्शन पर नहीं है शुल्क
अमित मालवीय ने अपने बयान में यह भी कहा कि Person-to-Person यानी P2P UPI ट्रांजैक्शन किसी भी राशि पर मुफ्त हैं। यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को UPI के जरिए पैसे भेजने पर मौजूदा व्यवस्था के तहत कोई 0.5 फीसदी सरकारी टैक्स नहीं लगाया जा रहा है।
विवाद मुख्य रूप से मर्चेंट ट्रांजैक्शन और MDR को लेकर है। MDR यानी Merchant Discount Rate भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी से जुड़ा शुल्क है। ऐसे शुल्क का ढांचा ग्राहक से सीधे सरकारी टैक्स वसूलने से अलग होता है।
मालवीय ने कहा कि अगर भविष्य में MDR की कोई व्यवस्था लाई भी जाती है, तो सरकार के अनुसार उसका दायरा चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन तक सीमित हो सकता है।
कांग्रेस के 25 और 50 रुपये वाले दावे पर सवाल
अमित मालवीय ने कांग्रेस की ओर से बताए जा रहे 25 रुपये और 50 रुपये के आंकड़ों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि 5,000 रुपये के भुगतान पर 25 रुपये और 10,000 रुपये पर 50 रुपये का हिसाब केवल 0.5 फीसदी की काल्पनिक दर मानकर निकाला गया है।
उनका दावा है कि यह किसी सरकारी फीस शेड्यूल का हिस्सा नहीं है। उन्होंने UPI को मुफ्त बनाए रखने के लिए सरकार की ओर से दिए जा रहे इंसेंटिव का भी जिक्र किया।
मालवीय के अनुसार FY22 से FY24 तक सरकार ने अलग-अलग वर्षों में UPI और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के लिए इंसेंटिव दिए। उन्होंने 2025-26 के इंसेंटिव सपोर्ट और FY27 के बजट प्रावधान का भी उल्लेख किया।
UPI के MDR पर आगे क्या होगा?
पूरे विवाद का केंद्र फिलहाल 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर संभावित MDR है। राहुल गांधी का कहना है कि इसका अप्रत्यक्ष बोझ ग्राहकों पर पड़ सकता है, जबकि अमित मालवीय का कहना है कि आम UPI यूजर पर 0.5 फीसदी टैक्स लगाने का कोई सरकारी आदेश नहीं है।
इसलिए मौजूदा स्थिति में UPI पर 0.5 फीसदी सरकारी टैक्स लागू होने की बात सही नहीं है। व्यक्ति से व्यक्ति किए जाने वाले UPI भुगतान भी मुफ्त बने हुए हैं।
भविष्य में मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR की कोई व्यवस्था लागू होती है या नहीं और उसकी दर क्या होगी, यह संबंधित सरकारी निर्णय और अंतिम नियमों पर निर्भर करेगा। फिलहाल इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी जारी है और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष अपने-अपने दावे पेश कर रहे हैं।
तारीख: 15 सितंबर 2026
digitallivenews.com