
Report By: Kiran Prakash Singh
दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक से पवन खेड़ा ने मुलाकात कर जान जोखिम में न डालने की अपील की। केजरीवाल ने भी शिक्षा सुधार और पेपर लीक पर सरकार को घेरा।
Date: 17 जुलाई 2026
Website: digitallivenews.com
जंतर-मंतर पर पवन खेड़ा की सोनम वांगचुक से मुलाकात, अनशन खत्म करने की अपील
दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के बीच कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने शुक्रवार को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने वांगचुक और उनके साथ अनशन कर रहे अन्य प्रदर्शनकारियों से अपनी जान जोखिम में न डालने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन आंदोलन ऐसा होना चाहिए जिससे किसी की जान पर संकट न आए।
पवन खेड़ा ने क्या कहा?
पवन खेड़ा ने कहा कि वे कांग्रेस की ओर से एक संदेश लेकर जंतर-मंतर पहुंचे हैं। उन्होंने सोनम वांगचुक से आग्रह किया कि वे अपनी बिगड़ती सेहत को देखते हुए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त करें। खेड़ा ने कहा कि “हम आगे भी लड़ने के लिए जीवित रहें, यही सबसे जरूरी है। अपने लोगों को खोने से कोई आंदोलन मजबूत नहीं होता।”
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार लोकतांत्रिक विरोध को गंभीरता से नहीं ले रही है और आंदोलनकारियों की बात सुनने के बजाय चुप्पी साधे हुए है।
सरकार पर कांग्रेस का निशाना
पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि शांतिपूर्ण विरोध करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। जब लोग अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठते हैं तो सरकार का दायित्व है कि वह उनसे संवाद करे।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और डॉ. मनमोहन सिंह का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी सरकारों ने विरोध करने वालों से बातचीत का रास्ता अपनाया था। लेकिन मौजूदा सरकार ने संवाद के बजाय उदासीनता दिखाई है, जो लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है।
शिक्षा सुधार और पेपर लीक बना बड़ा मुद्दा
पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि देशभर में शिक्षा सुधार और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों पर लगातार आवाज उठाई जा रही है, लेकिन सरकार बातचीत से बच रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस, एनएसयूआई और युवा कांग्रेस लगातार इन मुद्दों को उठा रहे हैं, फिर भी सरकार ने कोई ठोस पहल नहीं की।
खेड़ा के मुताबिक यह सिर्फ अहंकार नहीं बल्कि संवेदनहीनता भी है।
अरविंद केजरीवाल ने भी दिया समर्थन
इससे पहले गुरुवार को आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भी जंतर-मंतर पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक अपने लिए नहीं बल्कि देश के लाखों युवाओं और छात्रों के भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
केजरीवाल ने कहा कि जब कोई छात्र प्रतियोगी परीक्षा देता है तो वह अपने सपनों के साथ परीक्षा केंद्र पहुंचता है। लेकिन लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने युवाओं के विश्वास को गहरी चोट पहुंचाई है।
पेपर लीक से युवाओं का भरोसा कमजोर
केजरीवाल ने कहा कि वह स्वयं आईआईटी से पढ़े हैं और उनके बच्चों ने भी प्रतियोगी परीक्षाएं दी हैं। उनके अनुसार पहले इस तरह के पेपर लीक की घटनाएं बहुत कम होती थीं, लेकिन अब लगातार हो रहे मामलों से युवाओं का मनोबल टूट रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा प्रणाली पारदर्शी नहीं होगी तो मेहनती छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा। इसलिए शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
निष्कर्ष
दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी सोनम वांगचुक का आंदोलन अब राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों ने आंदोलन को समर्थन देते हुए सरकार से संवाद की मांग की है। वहीं पवन खेड़ा ने आंदोलनकारियों से स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए अनशन समाप्त करने की अपील की है। दूसरी ओर शिक्षा सुधार, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और पेपर लीक जैसे मुद्दे भी इस आंदोलन के केंद्र में बने हुए हैं। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया और आंदोलन की दिशा पर सभी की नजरें रहेंगी।
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