
Report By: Kiran Prakash Singh
SIR विवाद के बीच असदुद्दीन ओवैसी ने पुराने दस्तावेजों और नए मतदाताओं की मैपिंग पर सवाल उठाए। उन्होंने आयोग में फैसलों की प्रक्रिया स्पष्ट करने की मांग की।
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SIR पर ओवैसी का चुनाव आयोग से सवाल, पुराने रिकॉर्ड और फैसलों की प्रक्रिया पर उठाई बात
Digital Live News | 27 सितंबर 2026 | digitallivenews.com
चुनाव आयोग की ओर से चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। इसी बीच AIMIM प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया और इससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर सवाल उठाए हैं। ओवैसी ने कहा कि वह शुरुआत से ही SIR का विरोध करते रहे हैं और इस प्रक्रिया में गरीब तथा जरूरतमंद लोगों के सामने आने वाली परेशानियों को लेकर चिंता जताते रहे हैं।
पुराने दस्तावेजों को लेकर ओवैसी ने उठाया सवाल
ओवैसी ने खास तौर पर उन परिवारों का मुद्दा उठाया, जिनके नाम पिछली या अंतिम SIR मतदाता सूची में मौजूद नहीं हैं। उनका सवाल है कि ऐसे परिवारों के बच्चों को भविष्य में मतदाता के रूप में अपना नाम दर्ज कराने के दौरान पुराने रिकॉर्ड से अपनी पहचान या पारिवारिक संबंध की मैपिंग करने में किन मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने इस संदर्भ में उदाहरण देते हुए सवाल किया कि अगर किसी परिवार का नाम पुराने रिकॉर्ड में नहीं है और बाद में उसके 18 साल के बेटे या बेटी को वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाना है, तो वह पुराने रिकॉर्ड से अपनी मैपिंग कैसे करेगा।
ओवैसी ने इसी बात को ‘नाराज फूफा’ के उदाहरण से जोड़ते हुए चुनाव आयोग से प्रक्रिया को स्पष्ट करने की मांग की।
SIR को लेकर पहले से विरोध जताते रहे हैं ओवैसी
AIMIM सांसद ने कहा कि वह SIR प्रक्रिया का शुरुआत से विरोध करते रहे हैं। उनके मुताबिक, मतदाता सूची को अपडेट करना जरूरी हो सकता है, लेकिन ऐसी प्रक्रिया में आम नागरिकों, खासकर गरीब और दस्तावेजों की कमी से जूझ रहे लोगों की परेशानियों को भी ध्यान में रखना चाहिए।
ओवैसी ने कहा कि कई लोगों के पास पुराने दस्तावेज उपलब्ध नहीं हो सकते हैं। ऐसे में मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने या अपनी जानकारी सत्यापित कराने की प्रक्रिया उनके लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए फैसले के बाद अब चुनाव आयोग को अपनी आंतरिक निर्णय प्रक्रिया के बारे में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
चुनाव आयोग में फैसले कैसे लिए जाते हैं?
ओवैसी ने चुनाव आयोग के भीतर फैसले लिए जाने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने दो चुनाव आयुक्तों की ओर से कुछ मामलों में आपत्ति दर्ज किए जाने का उल्लेख करते हुए पूछा कि महत्वपूर्ण फैसले सर्वसम्मति से लिए गए या बहुमत के आधार पर।
चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ दो अन्य चुनाव आयुक्त होते हैं। कानून में आयोग के कामकाज के लिए जहां तक संभव हो, सर्वसम्मति से निर्णय लेने की व्यवस्था का उल्लेख है। यदि सदस्यों के बीच किसी विषय पर मतभेद हो, तो बहुमत की राय के आधार पर फैसला लिया जा सकता है।
ओवैसी का सवाल इसी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा है कि जिन मामलों में असहमति हुई, उनमें अंतिम निर्णय किस आधार पर लिया गया।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का भी जिक्र
SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग के भीतर कथित असहमति को लेकर सामने आई रिपोर्टों ने भी राजनीतिक बहस को बढ़ाया है। रिपोर्टों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्ति दर्ज किए जाने का दावा किया गया है।
इन आपत्तियों से जुड़े मुद्दों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और मतदाता डेटा तथा तकनीकी प्रणालियों से संबंधित विषयों का उल्लेख किया गया है।
हालांकि, इन रिपोर्टों और उनके राजनीतिक अर्थ को लेकर अलग-अलग दलों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। चुनाव प्रक्रिया से जुड़े किसी भी दावे को संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के संदर्भ में देखना महत्वपूर्ण है।
SIR पर जारी है राजनीतिक बहस
SIR को लेकर देश में राजनीतिक दलों के बीच बहस लगातार जारी है। विपक्षी दल जहां मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और दस्तावेजों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची को अपडेट करने और पात्र नागरिकों को पंजीकरण का अवसर देने की प्रक्रिया पर जोर दिया जाता रहा है।
ओवैसी के ताजा बयान ने इस बहस में नए मतदाताओं, पुराने रिकॉर्ड और आयोग की निर्णय प्रक्रिया से जुड़े सवालों को फिर सामने ला दिया है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनाव आयोग SIR की प्रक्रिया, दस्तावेजों की जरूरत और आयोग के भीतर निर्णय लिए जाने की व्यवस्था को लेकर उठाए गए इन सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देता है। फिलहाल SIR को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर चर्चा जारी है।
27 सितंबर 2026
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