
Report By: Kiran Prakash Singh
सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे पर दिल्ली HC ने सरकार, DU और MCD को फटकार लगाई। कोर्ट ने PG-हॉस्टल का सेफ्टी ऑडिट और भविष्य के हादसे रोकने के उपाय पूछे।
Digital Live News | 7 सितंबर 2026 | digitallivenews.com
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सत्य निकेतन हादसे पर दिल्ली HC की सख्ती, PG-हॉस्टल सुरक्षा पर उठे सवाल
दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने के मामले को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार, 7 सितंबर 2026 को सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार और नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने पूछा कि इस तरह की घटनाओं को भविष्य में रोकने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है। कोर्ट ने PG और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता जताई।
अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) और MCD की भूमिका पर भी सवाल उठाए। कोर्ट का कहना था कि हादसे के लिए केवल इमारत के मालिक को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है। छात्रों के लिए हॉस्टल की कमी और PG में रहने की मजबूरी से जुड़े व्यापक मुद्दे पर भी प्रशासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
हर दूसरे साल हादसे क्यों? HC ने सरकार से पूछा
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से सवाल किया कि जब गेस्ट हाउस को नियमों के तहत रेगुलेट किया जा सकता है तो PG को रेगुलेट क्यों नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि अगर PG के लिए पर्याप्त नियम नहीं हैं तो सरकार को आवश्यक नियम बनाने चाहिए।
कोर्ट ने यह भी पूछा कि हादसे के बाद भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या व्यवस्था की जा रही है। अदालत ने टिप्पणी की कि हर दूसरे साल ऐसी घटनाएं हो रही हैं और लोग इसका खामियाजा भुगत रहे हैं।
DU और MCD की जिम्मेदारी पर भी सवाल
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि सत्य निकेतन की घटना केवल एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा नहीं है, बल्कि इसने दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य कॉलेजों के छात्रों के लिए हॉस्टल की कमी की गंभीर समस्या को सामने ला दिया है।
अदालत ने कहा कि अगर बाहर से आने वाले छात्रों को पर्याप्त हॉस्टल सुविधा नहीं मिलती है तो उन्हें मजबूरी में निजी PG में रहना पड़ता है। ऐसे में प्रशासन को इस समस्या के समाधान के लिए अधिक गंभीर और प्रभावी दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।
कोर्ट ने DU से यह भी पूछा कि बाहर से आने वाले छात्रों के लिए विश्वविद्यालय और सरकार की ओर से कितने हॉस्टल उपलब्ध हैं।
सभी PG और हॉस्टल का होगा सेफ्टी ऑडिट
हाईकोर्ट ने MCD को दिल्ली के सभी PG और हॉस्टल का एक सप्ताह के भीतर सेफ्टी ऑडिट करने का निर्देश दिया है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों से यह पता लगाने को कहा कि हादसे वाली इमारत के पास सभी जरूरी मंजूरियां थीं या नहीं।
MCD को दिल्ली में मौजूद PG और हॉस्टल की इमारतों के संबंध में रिपोर्ट देने को कहा गया है। रिपोर्ट में यह भी बताना होगा कि इमारतें कानूनी तरीके से बनी हैं या नहीं और उनमें कितने छात्र रह रहे हैं।
अदालत ने सभी संबंधित विभागों को 10 दिन के भीतर हलफनामा दाखिल करने के निर्देश भी दिए हैं।
अवैध निर्माण पर HC की कड़ी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने PG संचालकों द्वारा कथित तौर पर किए जा रहे अवैध निर्माण को लेकर भी गंभीर टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि अगर अधिकारियों को अपनी कानूनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से पता हो और उनका पालन कराया जाए तो ऐसे हादसों को रोका जा सकता है।
कोर्ट ने कहा कि कई जगहों पर जिस इमारत को दो मंजिल की अनुमति मिलती है, उसे कथित तौर पर छह मंजिल तक बना दिया जाता है, जबकि उसकी नींव वही रहती है। अदालत ने इसे छात्रों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना।
बचाव अभियान को लेकर भी जताई चिंता
हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह की घटनाओं में कई छात्रों की जान जोखिम में पड़ जाती है। सुनवाई के दौरान अदालत ने राहत और बचाव अभियान को पूरी गंभीरता से चलाने की जरूरत पर जोर दिया और उम्मीद जताई कि अभियान को दोगुनी ताकत से आगे बढ़ाया जाएगा।
दिल्ली पुलिस और MCD की ओर से अदालत को भरोसा दिलाया गया कि राहत एवं बचाव अभियान में हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर 2026 को होगी। अब इस सुनवाई में सरकार और संबंधित विभागों की ओर से दाखिल किए जाने वाले हलफनामों तथा PG और हॉस्टल के सेफ्टी ऑडिट की रिपोर्ट पर भी नजर रहेगी।
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