
Report By: Kiran Prakash Singh
पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज सुधांशु धूलिया ने SIR पर कहा कि नागरिकता तय करना ECI का काम नहीं है। उन्होंने मतदाताओं पर लगाई गई अतिरिक्त शर्तों पर सवाल उठाए।
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SIR पर पूर्व जज सुधांशु धूलिया का बड़ा बयान, नागरिकता के मुद्दे पर उठे सवाल
Digital Live News | 28 सितंबर 2026 | digitallivenews.com
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी राजनीतिक और कानूनी बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुधांशु धूलिया का बयान सामने आया है। द इंडियन एक्सप्रेस के आइडिया एक्सचेंज में दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के कई पुराने फैसलों के मुताबिक नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का काम नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता का भारतीय नागरिक होना जरूरी है।
1. नागरिकता तय करने के अधिकार पर क्या बोले धूलिया
जस्टिस धूलिया ने कहा कि नागरिकता से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट पहले भी कानून की स्थिति स्पष्ट कर चुका है। उनके अनुसार, नागरिकता का निर्धारण चुनाव आयोग की जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने बातचीत में यह भी कहा कि मतदाता बनने के लिए व्यक्ति का भारतीय नागरिक होना आवश्यक है, लेकिन SIR की प्रक्रिया में लगाई गई अतिरिक्त शर्तों पर विचार होना चाहिए।
उन्होंने यह टिप्पणी उस संदर्भ में की, जब उनसे 2025 में बिहार SIR की सुनवाई के दौरान दिए गए उनके बयान के बारे में पूछा गया था। उस समय उन्होंने नागरिकता के सवाल को चुनाव आयोग के बजाय गृह मंत्रालय से संबंधित बताया था।
2. SIR में लगाई गई शर्तों पर भी सवाल
पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि मतदाता के लिए नागरिक होना जरूरी है, लेकिन प्रक्रिया में बहुत ज्यादा शर्तें नहीं जोड़ी जानी चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि दस्तावेज जुटाने की जिम्मेदारी हर व्यक्ति के लिए समान रूप से आसान नहीं होती।
इंटरव्यू में उन्होंने ग्रामीण और वंचित लोगों का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे लोगों के पास पुराने रिकॉर्ड या औपचारिक दस्तावेज उपलब्ध न भी हो सकते हैं। उनके मुताबिक, नागरिकता साबित करने का बोझ किस पर होना चाहिए, यह भी महत्वपूर्ण सवाल है।
3. 2025 में सुप्रीम कोर्ट की SIR सुनवाई का संदर्भ
बिहार में SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जुलाई 2025 में जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई की थी। अदालत ने SIR पर रोक नहीं लगाई थी, लेकिन चुनाव आयोग से आधार, वोटर आईडी और राशन कार्ड जैसे दस्तावेजों पर भी विचार करने को कहा था।
सुप्रीम कोर्ट ने उस समय SIR को पूरी तरह रोकने के बजाय प्रक्रिया से जुड़े कई सवालों पर विचार किया था। इसलिए मौजूदा बहस में जस्टिस धूलिया की हालिया टिप्पणियों और 2025 की न्यायिक कार्यवाही को अलग-अलग संदर्भों में देखना जरूरी है।
4. चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर अलग पक्ष भी मौजूद
नागरिकता के सवाल पर चुनाव आयोग का पक्ष भी सामने आया था। 2025 की बिहार SIR कार्यवाही के दौरान ECI ने अदालत में कहा था कि मतदाता सूची में केवल भारतीय नागरिकों का पंजीकरण सुनिश्चित करना उसकी कानूनी जिम्मेदारी का हिस्सा है। आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 326 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की संबंधित धाराओं का हवाला दिया था।
यानी इस मुद्दे पर एक तरफ जस्टिस धूलिया की ओर से नागरिकता निर्धारण और चुनाव आयोग की भूमिका के बीच अंतर की बात कही गई है, जबकि चुनाव आयोग ने मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया में नागरिकता की पात्रता की जांच को अपनी जिम्मेदारी का हिस्सा बताया है।
5. चुनाव आयोग के भीतर मतभेद पर भी टिप्पणी
जस्टिस धूलिया ने चुनाव आयोग के भीतर सामने आए मतभेदों पर भी प्रतिक्रिया दी। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में कई फैसलों और कदमों पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इस पर जस्टिस धूलिया ने कहा कि यदि चुनाव आयोग के फैसले केवल मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा लिए जा रहे थे, तो यह गंभीर विषय होगा।
वहीं कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने जस्टिस धूलिया के इंटरव्यू को साझा करते हुए चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर राजनीतिक हमला किया और उनके इस्तीफे की मांग दोहराई। यह कांग्रेस की राजनीतिक प्रतिक्रिया है; इसे जस्टिस धूलिया की टिप्पणी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
SIR को लेकर विवाद में अब नागरिकता, मतदाता पंजीकरण, दस्तावेजों की स्वीकार्यता और चुनाव आयोग की संवैधानिक भूमिका जैसे मुद्दे केंद्र में हैं। जस्टिस धूलिया की ताजा टिप्पणियों ने इस कानूनी और राजनीतिक बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।
दिनांक: 28 सितंबर 2026
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