नेपाल की तबाही पर बोले विदेश मंत्री, ‘दुनिया पाप की कीमत चुका रही’

Report By: Kiran Prakash Singh

नेपाल की विनाशकारी बाढ़ को विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने ‘हिमालयन सुनामी’ बताया। सरकार ने जलवायु संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मदद की मांग की है।

1 सितंबर 2026 | digitallivenews.com

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नेपाल की तबाही पर बोले विदेश मंत्री, ‘दुनिया पाप की कीमत चुका रही’

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और हिमालयी आपदा ने पूरे देश को गहरे संकट में डाल दिया है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल और तिब्बत में मृतकों की संख्या एक हजार से अधिक हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने इस आपदा को सामान्य बाढ़ से अलग बताते हुए इसे ‘हिमालयन सुनामी’ कहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने जलवायु परिवर्तन और हिमालयी पारिस्थितिकी की सुरक्षा का मुद्दा भी मजबूती से उठाया।

‘यह सामान्य बाढ़ नहीं, हिमालयन सुनामी थी’

विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि जिस आपदा का नेपाल ने सामना किया, वह सामान्य मौसमी बाढ़ जैसी नहीं थी। उनके मुताबिक कई प्रभावित क्षेत्रों में पानी की लहरों की ऊंचाई 20 से 30 मीटर तक पहुंची और गति करीब 180 किलोमीटर प्रति घंटे दर्ज की गई।

उन्होंने इसे ऐसी आपदा बताया जिसकी भयावहता नेपाल की मौजूदा पीढ़ियों की स्मृति से बाहर है। बाढ़ ने घरों, सड़कों, पुलों और बिजली परियोजनाओं समेत बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया।

जलवायु संकट को लेकर दुनिया को संदेश

शिशिर खनाल ने वैश्विक जलवायु परिवर्तन को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कार्रवाई की अपील की। नेपाल का कहना है कि उसका वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में योगदान बेहद कम है, लेकिन हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते तापमान और ग्लेशियरों में बदलाव का असर देश को गंभीर रूप से झेलना पड़ रहा है।

नेपाल सरकार ने हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मांग की है। विदेश मंत्री ने कहा है कि नेपाल इस आपदा से हुए नुकसान और क्षति का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा रहा है।

आर्थिक मदद की मांग

आपदा के बाद नेपाल ने राहत, पुनर्निर्माण और नुकसान से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहायता की जरूरत बताई है। सरकार का कहना है कि इतनी बड़ी आपदा के बाद प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए बड़े संसाधनों की आवश्यकता होगी।

नेपाल की सरकार जलवायु से जुड़ी आपदाओं के लिए वैश्विक वित्तीय व्यवस्था के माध्यम से सहायता की मांग कर रही है। इसका उद्देश्य प्रभावित लोगों को राहत देने के साथ-साथ भविष्य में ऐसी आपदाओं के जोखिम को कम करने के लिए बुनियादी ढांचे और आपदा-प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करना है।

अस्पतालों में अपनों की तलाश

बाढ़ के कई दिन बाद भी हजारों परिवारों की चिंता खत्म नहीं हुई है। बड़ी संख्या में लोग अपने लापता परिजनों की जानकारी तलाश रहे हैं। अस्पतालों और राहत केंद्रों में परिवार अपने रिश्तेदारों की तस्वीरें और उपलब्ध सूचनाएं लेकर पहुंच रहे हैं।

काठमांडू समेत प्रभावित क्षेत्रों में लापता लोगों की पहचान और शवों की पहचान एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। अधिकारियों ने पहचान प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए फोरेंसिक और डीएनए जांच जैसी तकनीकी सहायता की जरूरत भी बताई है।

बचाव अभियान जारी, हजारों अब भी लापता

नेपाल में राहत और बचाव दल लगातार दुर्गम इलाकों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। कई जगह सड़कें और पुल टूट जाने के कारण प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचना मुश्किल है। हाइड्रोपावर परियोजनाओं और सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।

ताजा रिपोर्टों में नेपाल में 987 मौतों और 4,000 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है, जबकि राहत दलों ने 11 हजार से ज्यादा लोगों को बचाया है। आंकड़े लगातार बदल रहे हैं और खोज अभियान जारी रहने के कारण अंतिम स्थिति बाद में स्पष्ट होगी।

नेपाल की इस त्रासदी ने हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते जलवायु जोखिम, ग्लेशियरों की अस्थिरता और आपदा से पहले चेतावनी एवं तैयारी की जरूरत को एक बार फिर सामने ला दिया है। अब नेपाल की नजर अंतरराष्ट्रीय सहायता के साथ-साथ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और क्षतिग्रस्त क्षेत्रों के पुनर्निर्माण पर है।

दिनांक: 1 सितंबर 2026
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