“बिहार में ₹70,877 करोड़ की वित्तीय अनियमितताएं: कैग रिपोर्ट का खुलासा”

Report By: Kiran Prakash Singh

24 जुलाई को कैग ने 2023-24 के लिए बिहार के वित्तीय हालात पर अपनी रिपोर्ट पेश की, रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा किया गया है, जिनमें 31 मार्च, 2024 तक 70,877.61 करोड़ रुपये के 49,649 लंबित यूटीलाइज़ेशन सर्टिफिकेट शामिल हैं |

नई दिल्ली: नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने 24 जुलाई को 2023-24 के लिए बिहार के वित्तीय हालात पर अपनी रिपोर्ट पेश की. रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा किया गया है, जिनमें 31 मार्च, 2024 तक 70,877.61 करोड़ रुपये के 49,649 लंबित उपयोग प्रमाणपत्र (utilisation certificates-यूसी) शामिल हैं |

ज्ञात हो कि उक्त प्रमाणपत्र यह दर्शाता है, कि किसी सरकारी विभाग द्वारा किया गया कार्य पूरा हो चुका है और उपयोग के लिए उपयुक्त है |

रिपोर्ट में कहा गया है, कि 31 मार्च 2024 तक 184.52 करोड़ रुपये के अस्थायी एडवांस और 25.46 करोड़ रुपये का एडवांस एडजस्ट नहीं किया गया था |

रिपोर्ट में कहा गया है,‘भवन निर्माण, लोक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग, सिंचाई, सड़क निर्माण (राष्ट्रीय राजमार्ग), ग्रामीण कार्य, लघु सिंचाई, लोकल एरिया इंजीनियरिंग ऑर्गेनाइजेशन और सड़क निर्माण जैसे विभागों से इस बी एडजस्ट की हुई राशियों को समायोजित करके संबंधित खजाने में जमा किया जाना आवश्यक था |

इसने निम्नलिखित को शीर्ष पांच चूककर्ता विभागों के रूप में चिह्नित किया: पंचायती राज (28,154.10 करोड़ रुपये), शिक्षा (12,623.67 करोड़ रुपये), शहरी विकास (11,065.50 करोड़ रुपये), ग्रामीण विकास (7,800.48 करोड़ रुपये) और कृषि (2,107.63 करोड़ रुपये), कोष्ठक में दी गई राशियां वे हैं, जो वे राजकोष में जमा नहीं कर पाए थे |

कैग ने पाया कि एबस्ट्रैक्ट कंटिंजेंट बिल (एसी) बिलों के माध्यम से निकाली गई अग्रिम राशि के विरुद्ध विस्तृत आकस्मिक (डीसी) (Detailed Contingent) बिल प्रस्तुत करने की आवश्यकता के बावजूद 9,205.76 करोड़ रुपये के 22,130 एसी बिलों के विरुद्ध डीसी बिल प्रस्तुत नहीं किए गए |

कैग ने आगे कहा कि राज्य सरकार वित्तीय वर्ष के दौरान ब्याज-युक्त जमाओं पर ब्याज भुगतान के रूप में 144.29 करोड़ रुपये की अपनी देनदारी का भुगतान करने में विफल रही, इसने यह भी उल्लेख किया कि 53.48 करोड़ रुपये की बजट से इतर देनदारियों का खुलासा बजट दस्तावेजों या वार्षिक वित्तीय विवरणों में नहीं किया गया |

निर्धारित समयसीमा के भीतर उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) जमा करने की अनिवार्यता के बावजूद 31 मार्च, 2024 तक, बिहार के महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) को 70,877.61 करोड़ रुपये के 49,649 बकाया सर्टिफिकेट प्राप्त नहीं हुए, प्रमाण पत्रों के अभाव में इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि वितरित धनराशि का उपयोग इच्छित उद्देश्य के लिए किया गया है, इसके अलावा उपयोगिता प्रमाण पत्रों के लंबित रहने से गबन और धन के दुरुपयोग का जोखिम बना रहता है |

राज्य ने अपनी कुल बचत 65,512.05 करोड़ रुपये में से केवल 23,875.55 करोड़ रुपये (36.4%) ही दिए हैं, रिपोर्ट में कहा गया है, कि वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान राज्य की देनदारियों में पिछले वर्ष की तुलना में .12.34% की वृद्धि हुई |

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है, कि बिहार के आंतरिक ऋण ने राज्य की कुल बकाया देनदारियों में 59.26% का योगदान दिया है, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है, कि आंतरिक ऋण के अंतर्गत शुद्ध देनदारियों में पिछले वर्ष की तुलना में 13.51% (28,107.06 करोड़ रुपये) की वृद्धि हुई है,

31 मार्च, 2024 तक राज्य सरकार पर 3,32,740.90 करोड़ रुपये की बकाया देनदारियां (आंतरिक देनदारियां, केंद्र सरकार से ऋण और एडवांस राशि तथा पब्लिक एकाउंट लायबिलिटी) थीं.

2023-24 में सकल राजकोषीय घाटा (35,659.88 करोड़ रुपये) बजट अनुमान (25,567.83 करोड़ रुपये) की तुलना में 10,092.05 करोड़ रुपये बढ़ गया. इसी अवधि के दौरान प्राथमिक घाटा (18,054.08 करोड़ रुपये) बजट अनुमान (7,213.39 करोड़ रुपये) की तुलना में 10,840.69 करोड़ रुपये बढ़ गया. बढ़े हुए घाटे की फंडिंग उधार के माध्यम से की गई, परिणामस्वरूप, बकाया देनदारियां 2023-24 में 2,93,307.17 करोड़ रुपये से बढ़कर 3,32,740.90 करोड़ रुपये हो गईं |

रिपोर्ट में राज्य की कुल देनदारियों में आंतरिक देनदारियां (बाज़ार ऋण, आरबीआई से लिया गया एडवांस, राष्ट्रीय लघु बचत कोष को जारी विशेष प्रतिभूतियां और वित्तीय संस्थानों से ऋण आदि), केंद्र सरकार से ऋण और एडवांस, और सार्वजनिक खाता शामिल हैं |

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वर्ष 2023-24 के दौरान बिहार ने 35,659.88 करोड़ रुपये का राजकोषीय घाटा दर्ज किया, जिसका वित्तपोषण मुख्य रूप से बाज़ार से लिए गए कर्ज और केंद्र सरकार से ऋण के माध्यम से किया गया |

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान राज्य की 68% से अधिक उधारी पिछली देनदारियों के भुगतान पर खर्च की गई, और चालू वर्ष में इसमें पिछले वर्ष की तुलना में वृद्धि हुई है |

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘पिछली देनदारियों के भुगतान के लिए उधार लेने से पूंजीगत व्यय के लिए उधार ली गई धनराशि के उपयोग की गुंजाइश कम हो जाती है, केवल 22.40% उधार ली गई धनराशि का उपयोग उत्पादक परिसंपत्तियों के निर्माण के लिए किया गया है और 0.58% उधार ली गई धनराशि का उपयोग नहीं किया गया |

रिपोर्ट में पाया गया है, कि यद्यपि राज्य के नकद शेष के एक भाग के रूप में 940.76 करोड़ रुपये की उधार ली गई धनराशि उपलब्ध थी, फिर भी 53.48 करोड़ रुपये बजट से बाहर उधार के रूप में लिए गए, जो खराब वित्तीय प्रबंधन को दर्शाता है |

कैग रिपोर्ट में वित्त विभाग के लिए भी सिफारिशें साझा की गई हैं, जिसमें कहा गया है, कि विभाग बजट तैयार करने की प्रक्रिया की समीक्षा कर सकता है, ताकि बजट अनुमानों और वास्तविक आंकड़ों के बीच बने अंतर को पाटा जा सके |

रिपोर्ट में सरकार को बकाया राजस्व की वसूली शीघ्रता से सुनिश्चित करने के लिए एक तंत्र विकसित करने की भी सलाह दी गई है, ताकि राजकोषीय घाटे के कारण राज्य पर पड़ने वाले बोझ को कम किया जा सके, रिपोर्ट में सरकार से यह सुनिश्चित करने के लिए एक तंत्र स्थापित करने की सिफारिश की गई है, कि अधूरी परियोजनाओं से संबंधित पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाए |

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