
Report By: Kiran Prakash Singh
दिल्ली-NCR में प्रदूषण घटाने के लिए 2028 से प्रमुख शहरों में CNG ऑटो का नया रजिस्ट्रेशन बंद होगा। 2029 से बाकी NCR में भी रोक लागू होगी।
दिनांक: 23 अगस्त 2026
वेबसाइट: digitallivenews.com
दिल्ली-NCR में CNG ऑटो पर रोक, 2028 से नया रजिस्ट्रेशन बंद
दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने CNG ऑटो के नए रजिस्ट्रेशन को चरणबद्ध तरीके से रोकने की योजना बनाई है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत आने वाले वर्षों में CNG ऑटो की जगह इलेक्ट्रिक ऑटो को बढ़ावा देने की तैयारी है। इस बदलाव का असर दिल्ली-NCR के ऑटो सेक्टर और नए ऑटो खरीदने की योजना बना रहे लोगों पर पड़ सकता है।
2028 से बड़े शहरों में नए CNG ऑटो पर रोक
प्रस्तावित योजना के मुताबिक जनवरी 2028 से नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत जैसे प्रमुख NCR शहरों में CNG ऑटो का नया रजिस्ट्रेशन बंद किया जाएगा।
इसका मतलब यह होगा कि इन शहरों में जनवरी 2028 के बाद नया CNG ऑटो खरीदकर उसका रजिस्ट्रेशन कराने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, मौजूदा CNG ऑटो को लेकर तत्काल सड़कों से हटाने का फैसला इस प्रस्ताव में शामिल नहीं है।
यानी जिन लोगों के पास पहले से CNG ऑटो हैं, उनके लिए यह व्यवस्था तत्काल वाहन बंद करने की स्थिति पैदा नहीं करती। मुख्य बदलाव नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन को लेकर होगा।
2029 से बाकी NCR में भी लागू होगी योजना
सरकार की प्रस्तावित योजना केवल प्रमुख शहरों तक सीमित नहीं रहेगी। इसके अगले चरण में जनवरी 2029 से NCR के बाकी हिस्सों में भी CNG ऑटो के नए रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाने की तैयारी है।
इस तरह चरणबद्ध तरीके से पूरे NCR में नए CNG ऑटो की संख्या को बढ़ने से रोकने का प्रयास किया जाएगा। सरकार का फोकस नए ऑटो के लिए ऐसे विकल्पों को बढ़ावा देना है, जिनसे वायु प्रदूषण को कम करने में मदद मिल सके।
इस बदलाव के बाद ऑटो खरीदने वाले लोगों के सामने इलेक्ट्रिक वाहन एक प्रमुख विकल्प के रूप में सामने आएंगे।
इलेक्ट्रिक ऑटो को मिलेगा बढ़ावा
प्रस्तावित नीति का सबसे बड़ा फोकस इलेक्ट्रिक ऑटो को बढ़ावा देना है। सरकार आगे नए ऑटो के रूप में इलेक्ट्रिक वाहनों के रजिस्ट्रेशन को प्राथमिकता देने की दिशा में बढ़ रही है।
इसका उद्देश्य पेट्रोल, डीजल और CNG जैसे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना है। इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ने से शहरों में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने की उम्मीद की जा रही है।
हालांकि, इलेक्ट्रिक ऑटो को बढ़ावा देने के साथ चार्जिंग स्टेशन, बैटरी की लागत और चालकों की सुविधा जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण होंगे।
प्रदूषण कम करना सरकार का मुख्य मकसद
दिल्ली और NCR लंबे समय से वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या का सामना करते रहे हैं। खासकर सर्दियों के दौरान प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
सरकार की सोच है कि नए प्रदूषणकारी वाहनों की संख्या बढ़ने से रोककर और इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करके लंबे समय में हवा की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल सकती है।
हालांकि CNG को पेट्रोल और डीजल की तुलना में अपेक्षाकृत कम प्रदूषण वाला ईंधन माना जाता है, लेकिन प्रस्तावित नीति का लक्ष्य परिवहन क्षेत्र को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर ले जाना है।
ऑटो चालकों और खरीदारों पर क्या होगा असर?
इस फैसले का सबसे बड़ा असर ऑटो चालकों और नए ऑटो खरीदने वालों पर देखने को मिल सकता है। जो लोग 2028 के बाद नया CNG ऑटो खरीदना चाहते हैं, उन्हें इलेक्ट्रिक ऑटो की ओर रुख करना पड़ सकता है।
वहीं मौजूदा CNG ऑटो के संचालन को लेकर तत्काल प्रतिबंध की बात नहीं कही गई है। इसलिए पुराने CNG ऑटो रखने वाले चालकों और नए वाहन खरीदने वालों की स्थिति अलग होगी।
आने वाले समय में सरकार की अंतिम नीति और उसके नियम स्पष्ट होने के बाद तस्वीर और साफ होगी। फिलहाल प्रस्तावित योजना दिल्ली-NCR के परिवहन क्षेत्र में CNG से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बड़े बदलाव का संकेत देती है।