
Report By: Kiran Prakash Singh
ऐप्स में फंसे बच्चे बन रहे अपराध का शिकार, केरल केस ने खोली डिजिटल लत की डरावनी हकीकत
नई दिल्ली। (DigitalLiveNews)
डिजिटल युग में जहां टेक्नोलॉजी हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी है, वहीं बच्चों और किशोरों पर इसका गहरा और खतरनाक प्रभाव भी पड़ रहा है। हाल ही में केरल के एक 16 वर्षीय लड़के से जुड़ा मामला सामने आया है जिसने समाज और प्रशासन दोनों को झकझोर कर रख दिया है। यह लड़का दो साल से एक डेटिंग ऐप पर सक्रिय था, और धीरे-धीरे पॉर्नोग्राफी, नशे और यौन शोषण जैसे अपराधों की चपेट में आ गया।
डेटिंग ऐप का झांसा, शोषण का जाल
केरल पुलिस के मुताबिक, 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया है जिनमें सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं। आरोपियों ने फर्जी प्रोफाइल बनाकर लड़के से दोस्ती की और उसे ब्लैकमेल कर यौन शोषण किया। लड़का खुद भी फर्जी पहचान से ऐप पर मौजूद था। यह घटना ऑनलाइन दुनिया की खतरनाक हकीकत को सामने लाती है जहां नाबालिग बच्चे आसानी से ऐप्स के जाल में फंस जाते हैं।
पुलिस ने ‘डी-डैड’ प्रोजेक्ट से बचाई जान
इस किशोर की जान बचाने में ‘डी-डैड’ (D-ADD) नाम की पुलिस पहल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह भारत का पहला डिजिटल डी-एडिक्शन कार्यक्रम है, जिसकी शुरुआत 2023 में की गई थी। इसका उद्देश्य बच्चों को ऑनलाइन गेमिंग, सोशल मीडिया और पॉर्नोग्राफी की लत से मुक्ति दिलाना है।
वर्तमान में यह योजना तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, कोच्चि, त्रिशूर, कोझिकोड और कन्नूर में कार्यरत है। योजना को जल्द ही राज्य के अन्य जिलों में भी विस्तार दिया जाएगा।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2023 से जुलाई 2025 तक 1,992 बच्चों को डिजिटल लत से बाहर निकाला गया, जिनमें से 571 को ऑनलाइन गेम्स की लत थी।
आत्महत्याएं और अपराध बढ़े
केरल विधानसभा सत्र में पेश आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2021 से 9 सितंबर 2025 तक 41 बच्चों ने मोबाइल दुरुपयोग के कारण आत्महत्या की, और इसी अवधि में 30 बच्चों पर डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े यौन अपराध या नशे से संबंधित मामले दर्ज किए गए।
विशेषज्ञों की चेतावनी
साइबर लॉ एक्सपर्ट जियास जमाल ने चेतावनी दी कि डेटिंग ऐप्स पर नाबालिगों की मौजूदगी एक बड़ी चुनौती है। ये ऐप्स 18+ के लिए बनाए गए हैं, लेकिन कमजोर वेरिफिकेशन के कारण बच्चे आसानी से प्रवेश कर लेते हैं। उन्होंने विदेशी सर्वर से संचालित ऐप्स पर नियंत्रण और विज्ञापन प्रतिबंध की मांग की।
सरकार की पहल
महिला एवं बाल विकास विभाग ने 1,227 स्कूलों में ‘Our Responsibility to Children’ नामक कार्यक्रम शुरू किया है। इसके अलावा, 1,012 स्कूलों में साइको-सोशल काउंसलर तैनात किए गए हैं ताकि बच्चों को मानसिक और डिजिटल स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जा सके।
📌 मुख्य बिंदु:
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16 वर्षीय लड़का दो साल से डेटिंग ऐप पर सक्रिय
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14 आरोपी गिरफ्तार, यौन शोषण और ब्लैकमेल का आरोप
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डी-डैड योजना से बचाई गई जान
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अब तक 1,992 बच्चों को डिजिटल लत से निकाला गया
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जनवरी 2021 से 41 बच्चों की आत्महत्या
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सरकार की स्कूल-केंद्रित जागरूकता पहलें शुरू