
Report By: Kiran Prakash Singh
मुजफ्फरनगर के नुमाइश ग्राउंड में दशहरे पर रावण, कुंभकरण और मेघनाद के साथ 15 फीट ऊंचे ‘कॉकरोच’ के पुतले का भी दहन होगा। आयोजकों के मुताबिक, इसके जरिए देश में अस्थिरता फैलाने वाली ताकतों को संदेश दिया जाएगा।
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मुजफ्फरनगर में रावण के साथ जलेगा 15 फीट का ‘कॉकरोच’, जानें क्या है वजह
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में इस बार दशहरा समारोह एक खास वजह से चर्चा में है। शहर के नुमाइश ग्राउंड में रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों के साथ 15 फीट ऊंचे ‘कॉकरोच’ के पुतले का भी दहन किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि इस पुतले के जरिए देश में अस्थिरता फैलाने वाली ताकतों को संदेश देने की कोशिश की जाएगी।
दशहरे की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। इस बार पुतलों की ऊंचाई और उनके दहन के विशेष इंतजाम भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहने वाले हैं।
1. दशहरे पर जलेगा चौथा पुतला
नुमाइश ग्राउंड में हर साल की तरह इस बार भी रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाएगा। लेकिन इस बार आयोजन में 15 फीट ऊंचा ‘कॉकरोच’ का पुतला भी शामिल किया गया है।
आयोजकों के मुताबिक, इस पुतले के जरिए समाज और देश में अशांति फैलाने वाली ताकतों के खिलाफ प्रतीकात्मक संदेश दिया जाएगा। उनका कहना है कि देश में अस्थिरता के बजाय शांति, स्थिरता और सद्भाव बनाए रखना जरूरी है।
2. रावण 60, कुंभकरण 55 और मेघनाद 50 फीट ऊंचे
इस बार दशहरा समारोह में तीन प्रमुख पुतलों की ऊंचाई भी खास रहने वाली है।
- रावण: 60 फीट
- कुंभकरण: 55 फीट
- मेघनाद: 50 फीट
- कॉकरोच: 15 फीट
आयोजकों ने सभी पुतलों को अंतिम रूप दे दिया है। इनके निर्माण में कई वर्षों से काम कर रहे शफीक और उनकी पांच सदस्यीय टीम ने योगदान दिया है।
3. पुतलों की आंखों और मुंह से निकलेगी आग
इस बार पुतलों के दहन को खास बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। जानकारी के मुताबिक, रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों की आंखों और मुंह से आग निकलेगी। दहन के दौरान ऊपर से अनार भी छोड़े जाएंगे।
पुतलों को रिमोट के जरिए जलाने की व्यवस्था की गई है। इन विशेष प्रभावों के कारण दशहरा समारोह देखने आने वाले लोगों के लिए आयोजन आकर्षण का केंद्र बन सकता है।
4. हर साल बदलता है चौथे पुतले का नाम
श्रीराम सेवा दल के महासचिव अशोक कुमार के मुताबिक, आयोजन में हर साल चौथे पुतले का नाम बदलकर समाज को कोई संदेश देने की कोशिश की जाती है।
उन्होंने बताया कि पहले इस पुतले को भ्रष्टाचार और आतंकवाद जैसे नाम दिए जा चुके हैं। इस बार इसे ‘कॉकरोच’ नाम दिया गया है। आयोजकों के अनुसार, यह पुतला देश में अस्थिरता फैलाने वाली ताकतों के खिलाफ प्रतीकात्मक संदेश का हिस्सा है।
5. धार्मिक परंपरा के साथ सामाजिक संदेश
दशहरा बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। देशभर में इस अवसर पर रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
मुजफ्फरनगर में इस बार चौथे पुतले को शामिल करने के पीछे आयोजकों का उद्देश्य धार्मिक आयोजन के साथ एक सामाजिक संदेश देना है। नुमाइश ग्राउंड में तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं और अब लोगों की नजर दशहरे के दिन होने वाले पुतला दहन पर है।
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