
Report By: Kiran Prakash Singh
SIR विवाद के बीच कांग्रेस 25 सितंबर को राज्य चुनाव आयोग कार्यालयों तक मार्च करेगी। पार्टी ने CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने और स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है।
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SIR विवाद के बीच कांग्रेस का विरोध मार्च
24 सितंबर 2026 को कांग्रेस ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ देशव्यापी विरोध कार्यक्रम की घोषणा की। पार्टी ने अपनी प्रदेश इकाइयों को 25 सितंबर को संबंधित राज्य चुनाव आयोग कार्यालयों तक विरोध मार्च निकालने का निर्देश दिया है। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के मुताबिक, पार्टी की मांगों में चुनावी रोल में हुए बदलावों और ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में लिए गए फैसलों की स्वतंत्र और व्यापक समीक्षा भी शामिल है। ये कांग्रेस की राजनीतिक मांगें हैं और इन्हें आरोप या मांग के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
25 सितंबर को राज्य स्तर पर मार्च
कांग्रेस के घोषित कार्यक्रम के अनुसार, 25 सितंबर को प्रदेश कांग्रेस कमेटियां अपने-अपने राज्यों में राज्य चुनाव आयोग कार्यालयों तक मार्च निकालेंगी। पार्टी ने इस प्रदर्शन के जरिए SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को उठाने की बात कही है।
कांग्रेस ने CEC के पद से हटाने और गिरफ्तारी की मांग भी सार्वजनिक रूप से रखी है। पार्टी का कहना है कि चुनावी रोल में बदलावों और SIR से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र समीक्षा होनी चाहिए। इन बयानों को कांग्रेस के रुख के तौर पर रिपोर्ट किया गया है।
28 सितंबर को जिला स्तर पर अगला चरण
कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन का दूसरा चरण 28 सितंबर को रखने की घोषणा की है। पार्टी के अनुसार, उस दिन जिला कांग्रेस कमेटियां अपने-अपने जिला कलेक्ट्रेट कार्यालयों तक मार्च करेंगी। केसी वेणुगोपाल ने कहा है कि पार्टी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखेगी।
इस तरह कांग्रेस ने दो चरणों में विरोध कार्यक्रम की रूपरेखा रखी है—पहला चरण 25 सितंबर को राज्य स्तर पर और दूसरा 28 सितंबर को जिला स्तर पर।
SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर उठे सवाल
विवाद को बढ़ाने वाली प्रमुख रिपोर्ट द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की जांच रिपोर्ट रही। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR और चुनावी रोल से जुड़े विभिन्न फैसलों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट में कहा गया कि एक दिन में चार बार भी आपत्तियां दर्ज की गईं।
रिपोर्ट में Form 6, मतदाता डेटा तक अधिकारियों की पहुंच और चुनावी रोल से जुड़ी प्रक्रियाओं पर उठाए गए सवालों का उल्लेख किया गया है। इन आपत्तियों में कुछ फैसलों को दोनों चुनाव आयुक्तों ने अपनी जानकारी या मंजूरी के बिना लिए जाने का दावा किया था।
चुनाव आयोग का पक्ष भी सामने आया
इन रिपोर्टों के बाद चुनाव आयोग ने कहा कि अलग-अलग विचार निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग ने 14 आपत्तियों के रिकॉर्ड के अस्तित्व को खारिज नहीं किया, लेकिन कहा कि आयोग के फैसले सामूहिक प्रक्रिया के तहत लिए गए।
इससे विवाद के दो प्रमुख पक्ष सामने आते हैं। कांग्रेस इन आंतरिक आपत्तियों को आधार बनाकर CEC के खिलाफ कार्रवाई और स्वतंत्र समीक्षा की मांग कर रही है। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि आयोग के सदस्यों के बीच मतभेद होना निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है।
अब 25 सितंबर के कांग्रेस मार्च और 28 सितंबर के जिला स्तर के प्रस्तावित प्रदर्शनों पर नजर रहेगी। साथ ही SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर सामने आए सवालों पर आगे क्या कार्रवाई होती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
दिनांक: 24 सितंबर 2026
digitallivenews.com