
Report By: Kiran Prakash Singh
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने वाला अमेरिकी बिल हाउस में आगे बढ़ गया है। भारत समेत कई देशों पर इसका असर पड़ सकता है।
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भारत पर 100% टैरिफ का खतरा, अमेरिकी हाउस में रूस प्रतिबंध बिल आगे बढ़ा
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों के बीच रूसी तेल खरीद को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने ऐसे रूस प्रतिबंध विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए प्रक्रियात्मक मंजूरी दे दी है, जिसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले कुछ देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि अभी भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं हुआ है।
214-211 वोट से हाउस में आगे बढ़ा बिल
रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों वाले Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में मंगलवार को महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक चरण पार किया। प्रस्ताव 214-211 के अंतर से आगे बढ़ा।
रिपोर्टों के मुताबिक, दो डेमोक्रेट सांसदों ने अपनी पार्टी के रुख से अलग जाकर रिपब्लिकन सांसदों के साथ इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। अब बिल पर आगे बहस और अंतिम मतदान की प्रक्रिया होनी है।
इसलिए मौजूदा स्थिति को बिल के आगे बढ़ने के तौर पर देखना चाहिए, न कि भारत पर तत्काल 100 प्रतिशत टैरिफ लागू होने के रूप में।
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर नजर
इस विधेयक का उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। प्रस्ताव में रूस की ऊर्जा खरीद से जुड़े देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की राष्ट्रपति की शक्ति बढ़ाने का प्रावधान बताया गया है।
रिपोर्टों के अनुसार, संभावित टैरिफ का दायरा रूस के बड़े तेल और गैस खरीदारों तक पहुंच सकता है। भारत और चीन इस संदर्भ में प्रमुख देशों के रूप में चर्चा में हैं।
भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता रहा है। ऐसे में यदि भविष्य में इस प्रावधान का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया जाता है, तो इसका असर दोनों देशों के व्यापार पर पड़ सकता है।
सीनेट पहले ही दे चुका है मंजूरी
इस विधेयक को अमेरिकी सीनेट में अगस्त में 86-11 वोट से मंजूरी मिल चुकी है। अब प्रतिनिधि सभा में इसकी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
विधेयक में रूस के खिलाफ व्यापक प्रतिबंधों के साथ उसकी ऊर्जा से जुड़े कारोबार पर दबाव बढ़ाने की कोशिश की गई है। इसके अलावा रूस के तेल परिवहन में इस्तेमाल होने वाले कथित शैडो फ्लीट और कुछ रूसी संस्थाओं पर भी प्रतिबंधों का प्रावधान चर्चा में है।
हालांकि, हाउस में अंतिम मंजूरी मिलने के बाद भी कानून बनने की प्रक्रिया में आगे के संवैधानिक चरण पूरे होने होंगे।
भारत और ट्रंप के बीच पहले भी हो चुका है टैरिफ विवाद
रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर पहले भी दबाव बनाते रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में तनाव की स्थिति बनी है।
भारत की ओर से रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर अपनी जरूरतों और राष्ट्रीय हित को महत्व देने की बात सामने आती रही है। सितंबर 2026 में भी भारत और रूस के बीच ऊर्जा तथा व्यापारिक संबंध जारी हैं।
ऐसे में अमेरिकी संसद में नया विधेयक आने से दोनों देशों के बीच व्यापारिक बातचीत पर इसका असर पड़ने की संभावना पर नजर बनी हुई है।
किन देशों पर पड़ सकता है असर?
विधेयक के तहत रूस के बड़े ऊर्जा खरीदार देशों पर संभावित टैरिफ की चर्चा है। रिपोर्टों में भारत और चीन के अलावा कुछ अन्य देशों का भी उल्लेख किया गया है। अमेरिकी सीनेट से जुड़े विवरणों में रूस के तेल और गैस के बड़े आयातकों पर संभावित कार्रवाई की बात सामने आई है।
भारत के लिए सबसे अहम सवाल यह है कि यदि कानून अंतिम रूप से पारित होता है, तो अमेरिकी प्रशासन इसका इस्तेमाल किस तरह करता है और क्या भारत को किसी तरह की छूट या अलग व्यवस्था मिलती है।
फिलहाल अमेरिकी हाउस में बिल के आगे बढ़ने के बाद अंतिम वोट और उसके बाद की प्रक्रिया पर सभी की नजर है। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लग चुका है। मौजूदा स्थिति में भारत समेत रूस के प्रमुख ऊर्जा खरीदारों के लिए संभावित व्यापारिक जोखिम बढ़ा है, लेकिन अंतिम नीति आगे की विधायी और प्रशासनिक कार्रवाई पर निर्भर करेगी।
तारीख: 16 सितंबर 2026
digitallivenews.com