
Report By: Kiran Prakash Singh
मोदी कैबिनेट ने सात हाई डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर को चार लाइन में विकसित करने की मंजूरी दी। 5 राज्यों के 14 जिलों में कनेक्टिविटी बढ़ेगी।
Digital Live News | 9 सितंबर 2026 | digitallivenews.com
————————————————————————————————————————————————————————————-
मोदी कैबिनेट का रेलवे पर बड़ा फैसला, 7 हाई डेंसिटी कॉरिडोर होंगे फोर-लाइन
सात हाई डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर को मिली मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार, 9 सितंबर 2026 को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में रेलवे से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार ने देश के सात हाई डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर को चार लाइन और चार ट्रैक के हिसाब से विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ाना और बढ़ते यातायात को संभालना है।
दिल्ली-मुंबई से चेन्नई-कोलकाता तक नेटवर्क का विस्तार
अश्विनी वैष्णव के अनुसार हाई डेंसिटी नेटवर्क में कोलकाता-दिल्ली, चेन्नई-कोलकाता, दिल्ली-मुंबई और मुंबई-चेन्नई जैसे महत्वपूर्ण रूट शामिल हैं। इसके अलावा बिलासपुर-कटनी सेक्शन को भी चार लाइन वाले नेटवर्क के रूप में विकसित करने की योजना है। मुंबई-हावड़ा हाई डेंसिटी नेटवर्क में खड़गपुर से झारसुगुड़ा तक 367 किलोमीटर लंबी चौथी रेल लाइन को मंजूरी दी गई है, जिस पर करीब 6,528 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
वहीं, अरक्कोनम से रेनिगुंटा के बीच तीसरी और चौथी लाइन विकसित करने की योजना है। इसकी लंबाई करीब 77 किलोमीटर होगी और इस परियोजना पर लगभग 1,936 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
40 फीसदी रेल ट्रैफिक सात कॉरिडोर पर
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश में करीब 11,000 किलोमीटर का हाई डेंसिटी रेल नेटवर्क चिन्हित किया गया है। इनमें सात प्रमुख कॉरिडोर ऐसे हैं, जिन पर रेलवे का लगभग 40 फीसदी ट्रैफिक चलता है। सरकार का फोकस इन रूटों की क्षमता बढ़ाने पर है ताकि यात्री और माल ढुलाई दोनों के लिए बेहतर सुविधा उपलब्ध हो सके।
उन्होंने बताया कि करीब 2,000 किलोमीटर का काम पहले ही पूरा हो चुका है और वहां चार लाइनें उपलब्ध हैं। लगभग 5,000 किलोमीटर के हिस्से पर काम चल रहा है या उसे मंजूरी मिल चुकी है, जबकि करीब 4,000 किलोमीटर के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार की जा रही है।
गोल्डन क्वाड्रिलैटरल के साथ नए डायगोनल रूट
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई, चेन्नई-कोलकाता और कोलकाता-दिल्ली का नेटवर्क रेलवे के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। इसे गोल्डन क्वाड्रिलैटरल के रूप में देखा जाता है। इसके अलावा दिल्ली-चेन्नई और मुंबई-कोलकाता जैसे डायगोनल रूट तथा दिल्ली-गुवाहाटी कॉरिडोर भी हाई डेंसिटी नेटवर्क का हिस्सा हैं।
सरकार के मुताबिक इन रूटों पर भविष्य में भारी ट्रैफिक की संभावना को देखते हुए पहले से क्षमता बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। इससे ट्रेनों की आवाजाही को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
5 राज्यों के 14 जिलों को मिलेगा फायदा
केंद्र सरकार के अनुसार इन परियोजनाओं के जरिए पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों में रेलवे नेटवर्क करीब 656 किलोमीटर तक बढ़ाया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे लगभग 4,790 गांवों के 56 लाख लोगों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा।
विशेष रूप से छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों को भी इन परियोजनाओं से फायदा मिलने की उम्मीद है। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इन क्षेत्रों में लंबे समय से नेटवर्क विस्तार की जरूरत महसूस की जा रही थी। क्षेत्र आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
बिलासपुर से पेंड्रा और आगे कटनी की दिशा में रेलवे लाइन की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। कुछ हिस्सों में पहले से तीन लाइनें हैं, जबकि कुछ जगहों पर दोहरी लाइन मौजूद है। ऐसे में बिलासपुर-कटनी पूरे सेक्शन को चार लाइन वाला बनाने की योजना है।
सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से केवल रेल कनेक्टिविटी ही मजबूत नहीं होगी, बल्कि निर्माण और संबंधित गतिविधियों के जरिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। अब इन परियोजनाओं के आगे बढ़ने के साथ देश के प्रमुख रेल मार्गों की क्षमता में महत्वपूर्ण बदलाव आने की उम्मीद है।
digitallivenews.com