Persistent-Nagarro Deal: $2.9B AI मर्जर से बड़ा बदलाव

Report By: Kiran Prakash Singh

Persistent Systems और Nagarro के $2.9 अरब AI मर्जर से वैश्विक टेक सेक्टर में बड़ा बदलाव होगा। यह डील यूरोप और भारत में कंपनी की पकड़ मजबूत करेगी।

Published Date: 29 जून 2026

Persistent-Nagarro डील: $2.9 अरब के AI मर्जर से बदलेगा वैश्विक टेक परिदृश्य

भारतीय आईटी सेक्टर की प्रमुख कंपनी Persistent Systems और जर्मनी की डिजिटल इंजीनियरिंग फर्म Nagarro SE के बीच होने वाली संभावित डील वैश्विक टेक बाजार में बड़ा बदलाव ला सकती है। इस प्रस्तावित मर्जर को अब तक के सबसे बड़े विदेशी टेक अधिग्रहण सौदों में से एक माना जा रहा है। दोनों कंपनियों के एक साथ आने से करीब 2.9 अरब डॉलर मूल्य की एक मजबूत एआई-आधारित डिजिटल इंजीनियरिंग कंपनी बनने की उम्मीद है।

यह डील न केवल भारत और यूरोप के आईटी बाजारों को प्रभावित करेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर क्लाउड, एआई और डिजिटल इंजीनियरिंग सेवाओं में प्रतिस्पर्धा को भी नया आकार दे सकती है।

81 यूरो प्रति शेयर पर होगा अधिग्रहण प्रस्ताव

Persistent Systems ने अपनी सब्सिडियरी Galaxy Germany Holding के माध्यम से Nagarro SE के सभी बकाया शेयर खरीदने के लिए स्वैच्छिक पब्लिक टेकओवर ऑफर देने की घोषणा की है। प्रस्तावित कीमत 81 यूरो प्रति शेयर रखी गई है, जो 25 जून 2026 के क्लोजिंग प्राइस की तुलना में लगभग 140% प्रीमियम है।

यह डील फिलहाल समीक्षा और मंजूरी की प्रक्रिया में है और इसके Q4 CY2026 या Q1 CY2027 तक पूरा होने की संभावना जताई जा रही है।

बड़े शेयरहोल्डर की सहमति से बढ़ी डील की संभावना

इस प्रस्ताव को Nagarro के सबसे बड़े शेयरधारक Lantano Beteiligungen GmbH का समर्थन मिल चुका है, जिसने अपनी 21% हिस्सेदारी बेचने पर सहमति जताई है।

इसके अलावा Nagarro के मैनेजमेंट और सुपरवाइजरी बोर्ड ने भी इस डील का समर्थन किया है। बोर्ड ने संकेत दिया है कि वह शेयरधारकों को इस प्रस्ताव को स्वीकार करने की सलाह दे सकता है, हालांकि अंतिम निर्णय फाइनल ऑफर डॉक्यूमेंट पर निर्भर करेगा।

मर्जर से बनेगी 46,000 कर्मचारियों वाली ग्लोबल कंपनी

यदि यह डील पूरी होती है तो दोनों कंपनियों के विलय से एक विशाल वैश्विक आईटी कंपनी बनेगी, जिसमें 40 से अधिक देशों में लगभग 46,000 कर्मचारी होंगे। इनमें से लगभग 37,000 कर्मचारी भारत में कार्यरत होंगे, जबकि शेष कर्मचारी यूरोप और उत्तरी अमेरिका में होंगे।

इस संयुक्त कंपनी का वार्षिक राजस्व लगभग 2.9 अरब डॉलर यानी 24,000 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। इसके साथ ही कंपनी के पास 350 से अधिक बड़े ग्लोबल क्लाइंट्स का नेटवर्क होगा।

यूरोप में भारतीय कंपनी की मजबूत पकड़

इस डील का सबसे बड़ा रणनीतिक प्रभाव यूरोपीय बाजार पर देखने को मिलेगा। मर्जर के बाद Persistent Systems का यूरोप से आने वाला रेवेन्यू लगभग 9% से बढ़कर 22% तक पहुंचने की संभावना है।

इससे कंपनी विशेष रूप से जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों में अपनी पकड़ मजबूत करेगी। दोनों कंपनियां मिलकर एआई-आधारित डिजिटल इंजीनियरिंग, क्लाउड सर्विसेज, ERP और कस्टमर एक्सपीरियंस जैसे क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर अपनी सेवाओं का विस्तार करेंगी।

AI और डिजिटल इंजीनियरिंग में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मर्जर वैश्विक आईटी इंडस्ट्री में एआई आधारित सेवाओं की प्रतिस्पर्धा को और तेज करेगा। दोनों कंपनियों की संयुक्त क्षमता उन्हें बड़े डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट्स में मजबूत स्थिति प्रदान कर सकती है।

यदि यह डील सफल रहती है तो यह भारतीय आईटी सेक्टर के लिए वैश्विक विस्तार का एक बड़ा उदाहरण बन सकती है, जो आने वाले वर्षों में अन्य कंपनियों के लिए भी एक नई दिशा तय करेगी।

Source: digitallivenews.com

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