मोहन भागवत का नागपुर से राष्ट्र निर्माण पर संदेश

Report By: Kiran Prakash Singh

मोहन भागवत का संदेश: राष्ट्र निर्माण में हर नागरिक की जिम्मेदारी, शिवाजी महाराज हैं प्रेरणा स्रोत

नागपुर (Digital Live News)।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में देशवासियों को गहरा और स्पष्ट संदेश दिया: “राष्ट्र निर्माण केवल सरकार का काम नहीं, बल्कि हम सभी नागरिकों का कर्तव्य है।” उन्होंने कहा कि जब देश समृद्ध और संगठित होता है, तब उसका सम्मान, सुरक्षा और वैश्विक प्रभाव भी बढ़ता है।


🇮🇳 राष्ट्र के लिए काम करना, स्वयं के हित की रक्षा करना है

मोहन भागवत ने कहा:

“अपने देश का निर्माण करना और उसे बेहतर बनाना हमारा कर्तव्य है। ऐसा करके हम अपने ही हितों की रक्षा करते हैं।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की समृद्धि और प्रगति का सीधा लाभ उसके नागरिकों को ही मिलता है। एक सशक्त, आत्मनिर्भर और संगठित राष्ट्र न केवल अपने नागरिकों को सुरक्षा देता है, बल्कि उन्हें दुनिया भर में सम्मान और अवसरों से भी जोड़ता है।


🏛️ RSS का उदय: नागपुर की विशेष भूमिका

भागवत ने संघ की स्थापना का जिक्र करते हुए बताया कि डॉ. केशव बळीराम हेडगेवार ने 1925 में नागपुर को संघ की जन्मभूमि के रूप में इसलिए चुना, क्योंकि यहाँ पहले से ही त्याग, नि:स्वार्थ सेवा और सामाजिक चेतना का मजबूत वातावरण मौजूद था।

“भले ही हिंदुत्व पर गर्व करने वाले लोग देशभर में हैं, लेकिन आरएसएस जैसा संगठन केवल नागपुर की मिट्टी में ही जन्म ले सकता था।”

नागपुर की विशेषता इस बात में है कि यह शहर संघ की विचारधारा और उद्देश्य के अनुकूल वातावरण प्रदान करता था — एक ऐसा वातावरण जहां लोग निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज के लिए काम करने को तैयार थे।


🛡️ छत्रपति शिवाजी महाराज: आदर्श और प्रेरणा का प्रतीक

अपने भाषण में मोहन भागवत ने छत्रपति शिवाजी महाराज को राष्ट्र निर्माण का शाश्वत प्रेरणास्त्रोत बताया। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज ने ‘स्वराज्य’ की स्थापना व्यक्तिगत सत्ता या लाभ के लिए नहीं, बल्कि “ईश्वर, धर्म और राष्ट्र” के लिए की थी।

“जब शिवाजी ने स्वराज्य की स्थापना शुरू की, तो उन्होंने अपने साथियों को व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि एक बड़े राष्ट्रीय उद्देश्य के लिए एकत्र किया।”

भागवत के अनुसार, जब तक शिवाजी महाराज के आदर्श समाज को प्रेरित करते रहे, तब तक भारत में प्रगति, अखंडता और सामाजिक संगठन का युग बना रहा।


🔥 1857 की क्रांति से लेकर स्वतंत्रता संग्राम तक प्रभाव

भागवत ने कहा कि शिवाजी महाराज की एकता और संगठन शक्ति ने न केवल महाराष्ट्र, बल्कि पूरे भारत में राजाओं, सेनानियों और क्रांतिकारियों को प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि 1857 की पहली स्वतंत्रता क्रांति भी शिवाजी के आदर्शों से प्रेरित थी।

लेकिन, उन्होंने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि ब्रिटिश शासन ने योजनाबद्ध ढंग से उन प्रतीकों और आदर्शों को मिटाने की कोशिश की, जो भारतीयों को एकजुट करते थे। उनका उद्देश्य था भारतीय समाज की संघबद्ध चेतना और प्रतिरोध शक्ति को कमजोर करना।


📚 अपने इतिहास से सीखें, भविष्य को सजाएं

मोहन भागवत ने युवाओं और नागरिकों से अपने इतिहास से सीखने की अपील करते हुए कहा:

“हमें उन महापुरुषों से प्रेरणा लेनी चाहिए जिन्होंने समाज की भलाई के लिए नि:स्वार्थ सेवा की। हमारे इतिहास में ऐसी असीम संभावनाएं और ऊर्जा है जो भारत को विश्व गुरु बना सकती हैं।”

उन्होंने कहा कि आज भी यदि हम त्याग, सेवा और संगठन के मूल सिद्धांतों को अपनाएं, तो भारत को शांति और समृद्धि का केंद्र बनाया जा सकता है।


📌 निष्कर्ष: राष्ट्र निर्माण केवल नारा नहीं, जिम्मेदारी है

मोहन भागवत का यह संबोधन सिर्फ एक विचारधारा का प्रचार नहीं, बल्कि हर नागरिक को यह याद दिलाना था कि देश की दशा और दिशा हमारे हाथों में है।
छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे महापुरुषों के आदर्श, संघ की सामाजिक एकता की भावना, और नागपुर जैसी ऐतिहासिक जगह की प्रेरणा — ये सब मिलकर एक ऐसा आधार बनाते हैं, जिस पर हम आधुनिक भारत को और सशक्त बना सकते हैं।


📝 रिपोर्टर: Digital Live News National Desk
📍 स्थान: नागपुर, महाराष्ट्र
📅 प्रकाशन तिथि: 11 अक्टूबर 2025

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