राम रहीम की पैरोल पर उठे सवाल, न्याय व्यवस्था पर बहस तेज**

Report By: Kiran Prakash Singh

राम रहीम को मिली बार-बार की पैरोल और फरलो को लेकर न्याय व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाओं के बीच कानूनी प्रक्रिया पर चर्चा तेज है।

Published Date: 29 जून 2026

राम रहीम की पैरोल को लेकर उठे सवाल, न्याय व्यवस्था पर सोशल मीडिया में छिड़ी बहस

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को समय-समय पर मिली पैरोल और फरलो को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि गंभीर अपराधों में दोषी ठहराए गए कैदियों को बार-बार अस्थायी रिहाई कैसे मिल जाती है, जबकि आम कैदियों को जमानत या राहत पाने के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसी बीच एक सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि राम रहीम लंबे समय से जेल से बाहर हैं। हालांकि, ऐसे दावों की पुष्टि केवल आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही की जा सकती है।

राम रहीम को किन मामलों में सजा मिली है?

गुरमीत राम रहीम सिंह को वर्ष 2017 में दो साध्वियों से बलात्कार के मामले में दोषी ठहराया गया था। अदालत ने उन्हें 20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। इसके अलावा, उन्हें पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या और अन्य मामलों में भी अलग-अलग सजा मिल चुकी है। वर्तमान में वह हरियाणा की सुनारिया जेल से जुड़े कैदी हैं और समय-समय पर उन्हें कानून के तहत पैरोल या फरलो दी गई है।

पैरोल और फरलो क्या होती है?

भारतीय कानून में पैरोल और फरलो दो अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाएं हैं। पैरोल आमतौर पर विशेष परिस्थितियों, जैसे पारिवारिक या मानवीय कारणों से सीमित अवधि के लिए दी जाती है। वहीं फरलो एक निश्चित अवधि की अस्थायी रिहाई होती है, जो पात्रता की शर्तें पूरी होने पर दी जा सकती है। दोनों ही मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित राज्य के जेल नियमों और सक्षम प्राधिकारी द्वारा लिया जाता है।

सोशल मीडिया पर उठ रहे हैं सवाल

राम रहीम को कई बार पैरोल और फरलो मिलने के बाद सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा हो रही है। कई लोग न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं और यह तर्क दे रहे हैं कि आम लोगों और प्रभावशाली व्यक्तियों के मामलों में अलग-अलग व्यवहार दिखाई देता है। वहीं कुछ कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी कैदी को पैरोल या फरलो संबंधित नियमों और पात्रता के आधार पर ही दी जाती है, इसलिए प्रत्येक मामले का मूल्यांकन उसके कानूनी तथ्यों के अनुसार किया जाना चाहिए।

अमेरिका का इस मामले से क्या संबंध है?

कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में इस मामले को अमेरिका की सरकार से जोड़कर टिप्पणी की गई है। हालांकि, उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के अनुसार राम रहीम की सजा, पैरोल और फरलो से जुड़े सभी निर्णय भारतीय न्यायालयों, राज्य सरकार और जेल प्रशासन की कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं। इस प्रक्रिया में अमेरिकी सरकार की कोई प्रत्यक्ष भूमिका या अधिकार क्षेत्र नहीं है। इसलिए इस तरह के दावे तथ्यात्मक रूप से समर्थित नहीं हैं।

न्याय व्यवस्था पर बहस जारी

राम रहीम को मिली अस्थायी रिहाई को लेकर बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है। एक ओर लोग न्यायिक प्रक्रिया में समानता की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कानून के जानकार यह स्पष्ट करते हैं कि पैरोल और फरलो का निर्णय निर्धारित कानूनी प्रावधानों के अनुसार होता है। ऐसे मामलों में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक दस्तावेजों, न्यायालय के आदेशों और संबंधित प्रशासनिक रिकॉर्ड को आधार बनाना आवश्यक है।

Source: digitallivenews.com

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