
Report By: Kiran Prakash Singh
पश्चिम बंगाल में सरकारी कर्मचारियों पर नए प्रतिबंध लागू होने के बाद अभिषेक बनर्जी ने सरकार पर लोकतंत्र दबाने का आरोप लगाया।
बंगाल में सरकारी कर्मचारियों पर सख्ती, अभिषेक बनर्जी का हमला
सरकारी कर्मचारियों के लिए जारी हुए नए सख्त नियम
पश्चिम बंगाल में Suvendu Adhikari से जुड़ी राजनीतिक बहस के बीच राज्य सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
इन आदेशों के तहत सरकारी कर्मचारियों को मीडिया में बयान देने, टीवी डिबेट में हिस्सा लेने, सरकारी दस्तावेज सार्वजनिक करने और सरकार से जुड़ी गोपनीय जानकारी लीक करने पर रोक लगाई गई है।
इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है और तृणमूल कांग्रेस नेता Abhishek Banerjee ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।
राज्य प्रशासनिक विभाग ने जारी किया आदेश
यह आदेश पश्चिम बंगाल के कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से बुधवार रात जारी किया गया।
आदेश में साफ कहा गया कि ये प्रतिबंध पहले से लागू विभिन्न सेवा नियमों के तहत लगाए गए हैं।
इनमें अखिल भारतीय सेवा (AIS) आचरण नियम 1968, पश्चिम बंगाल सेवा नियम 1980 और पश्चिम बंगाल सरकारी सेवक आचरण नियम 1959 शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखना और संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
अभिषेक बनर्जी ने बताया ‘पूर्ण प्रतिबंध’
टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने गुरुवार 21 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर इस आदेश की कड़ी आलोचना की।
उन्होंने कहा कि यह आदेश सरकारी कर्मचारियों को चुप कराने की कोशिश है।
उनके मुताबिक कर्मचारियों को प्रेस से बात नहीं करने, लेख नहीं लिखने, मीडिया कार्यक्रमों में भाग नहीं लेने और केंद्र या राज्य सरकार की आलोचना से दूर रहने को कहा गया है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “दिल्ली के साथ संबंध तनावपूर्ण बनाने वाली कोई भी बात नहीं करनी है।”
अभिषेक ने आरोप लगाया कि सरकार ने शासन व्यवस्था में “चुप्पी” को प्रशासनिक अनिवार्यता बना दिया है।
‘लोकतंत्र का गला घोंटने’ का आरोप
अभिषेक बनर्जी ने इस फैसले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया।
उन्होंने कहा कि यह अनुशासन बनाए रखने का मामला नहीं, बल्कि लोगों की आवाज दबाने और मौलिक अधिकारों को सीमित करने की कोशिश है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह आदेश “दिल्ली में बैठे आकाओं” को खुश करने और पूरी आज्ञाकारिता सुनिश्चित करने के लिए लागू किया गया है।
टीएमसी नेता ने कहा कि जब कोई सरकार आलोचना सहन नहीं कर पाती, तब वह असहमति को कुचलने लगती है।
उनके अनुसार यह शक्ति नहीं बल्कि लोकतंत्र का गला घोंटने जैसा कदम है।
किन कर्मचारियों पर लागू होंगे नियम
सरकार द्वारा जारी यह आदेश राज्य सरकार से जुड़े कई विभागों और संस्थानों पर लागू होगा।
इनमें भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), पश्चिम बंगाल सिविल सेवा (WBCS), पश्चिम बंगाल पुलिस सेवा (WBPS) के अधिकारी शामिल हैं।
इसके अलावा राज्य सरकारी कर्मचारी, सुधार सेवा कर्मचारी, राज्य सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थान, राज्य संचालित बोर्ड, नगर पालिकाएं, नगर निगम और राज्य सरकार के अधीन स्वायत्त निकाय भी इसके दायरे में आएंगे।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी संबंधित कर्मचारियों को इन दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।
राजनीतिक विवाद और बढ़ने के आसार
इस आदेश के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में विवाद और गहरा गया है।
टीएमसी इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रही है, जबकि सरकार समर्थक इसे प्रशासनिक अनुशासन के लिए जरूरी कदम मान रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद बन सकता है।
फिलहाल सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर तीखी बहस जारी है।