
Report By: Kiran Prakash Singh
पश्चिम बंगाल में सचिवालय को नाबन्ना से राइटर्स बिल्डिंग शिफ्ट करने की चर्चा तेज, इसे प्रशासनिक और राजनीतिक बदलाव माना जा रहा।
नाबन्ना बनाम राइटर्स बिल्डिंग, बंगाल में नई सियासी बहस
13 साल बाद फिर चर्चा में आया नाबन्ना
West Bengal की राजनीति और प्रशासन का अहम केंद्र रहा Nabanna एक बार फिर चर्चा में है। हावड़ा के शिबपुर इलाके में स्थित यह 14 मंजिला इमारत पिछले एक दशक से राज्य सरकार के सचिवालय के रूप में काम कर रही है। लेकिन अब सचिवालय को दोबारा Writers’ Building में शिफ्ट किए जाने की चर्चाओं ने इसे राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
2013 में ममता बनर्जी ने किया था उद्घाटन
नाबन्ना का उद्घाटन 5 अक्टूबर 2013 को तत्कालीन मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने किया था। उस समय इसे अस्थायी सचिवालय के तौर पर विकसित किया गया था, क्योंकि ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग में मरम्मत और पुनर्निर्माण का काम चल रहा था। हालांकि धीरे-धीरे नाबन्ना ही राज्य सरकार का स्थायी प्रशासनिक केंद्र बन गया और यहीं से सरकार के बड़े फैसले लिए जाने लगे।
गारमेंट पार्क से बना सचिवालय
325, शरत चटर्जी रोड स्थित यह इमारत मूल रूप से हुगली रिवर ब्रिज कमिश्नर्स यानी HRBC द्वारा गारमेंट और टेक्नोलॉजी पार्क के रूप में विकसित की गई थी। बाद में लोक निर्माण विभाग ने बेहद कम समय में इसे सचिवालय में बदल दिया। स्थानीय स्तर पर इसे ‘HRBC बिल्डिंग’ के नाम से भी जाना जाता है।
भवन की 14वीं मंजिल पर मुख्यमंत्री कार्यालय बनाया गया, जबकि 13वीं मंजिल पर मुख्य सचिव और गृह सचिव के दफ्तर स्थापित किए गए। गृह विभाग की प्रमुख गतिविधियां चौथी और पांचवीं मंजिल से संचालित होती रहीं। प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए यहां पार्किंग कॉम्प्लेक्स और अन्य सुविधाएं भी विकसित की गईं।
राजनीतिक फैसलों का केंद्र बना नाबन्ना
पिछले कई वर्षों में नाबन्ना केवल एक प्रशासनिक भवन नहीं रहा, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति का भी बड़ा प्रतीक बन गया। चुनावी रणनीतियों, कानून-व्यवस्था की समीक्षा, आपदा प्रबंधन और बड़े सरकारी फैसलों की बैठकों का केंद्र यही इमारत रही। कोविड-19 महामारी के दौरान भी राज्य प्रशासन की लगभग सभी प्रमुख गतिविधियां यहीं से संचालित हुई थीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नाबन्ना ने ममता बनर्जी सरकार की प्रशासनिक शैली और राजनीतिक पहचान को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। इसलिए अब सचिवालय को वापस राइटर्स बिल्डिंग ले जाने की चर्चा को केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं माना जा रहा।
राइटर्स बिल्डिंग की ऐतिहासिक विरासत
Writers’ Building ब्रिटिश काल से ही बंगाल की सत्ता और प्रशासन का प्रतीक रही है। लंबे समय तक यही पश्चिम बंगाल सरकार का मुख्य सचिवालय रहा। इसकी ऐतिहासिक और राजनीतिक पहचान बंगाल की विरासत से जुड़ी मानी जाती है।
अब यदि सचिवालय फिर से राइटर्स बिल्डिंग में शिफ्ट होता है, तो इसे सत्ता के पुराने प्रतीकों की वापसी और प्रशासनिक विरासत को पुनर्स्थापित करने के रूप में देखा जा सकता है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक यह फैसला आने वाले समय में बंगाल की राजनीति में बड़ा प्रतीकात्मक संदेश दे सकता है।
प्रशासनिक बदलाव या राजनीतिक संदेश?
नाबन्ना और राइटर्स बिल्डिंग को लेकर जारी बहस अब केवल भवन परिवर्तन तक सीमित नहीं रह गई है। यह बंगाल की राजनीतिक विरासत, प्रशासनिक पहचान और सत्ता के प्रतीकों की लड़ाई के रूप में भी देखी जा रही है। आने वाले समय में यह फैसला राज्य की राजनीति में नई बहस और नए समीकरण खड़े कर सकता है।