सुप्रीम कोर्ट से TMC को झटका, EC के अधिकार बरकरार

Report By: Kiran Prakash Singh

पश्चिम बंगाल चुनाव मतगणना में केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती पर सुप्रीम कोर्ट ने TMC की याचिका खारिज की, चुनाव आयोग के अधिकार को सही ठहराया।


सुप्रीम कोर्ट से ममता बनर्जी को झटका, चुनाव आयोग के अधिकार पर मुहर

याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा- आदेश की जरूरत नहीं

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना को लेकर दायर तृणमूल कांग्रेस (TMC) की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि इस मामले में “आगे किसी आदेश की आवश्यकता नहीं” है। यह याचिका केंद्रीय कर्मचारियों की काउंटिंग ड्यूटी में तैनाती को चुनौती देने के लिए दायर की गई थी।

चुनाव आयोग को मिला पूर्ण अधिकार

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग को मतगणना कर्मियों के चयन का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने 13 अप्रैल के परिपत्र को सही ठहराते हुए कहा कि इसमें कोई कानूनी खामी नहीं है। न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि आयोग चाहे तो केवल केंद्रीय कर्मचारियों से भी ड्यूटी करवा सकता है।

कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर

यह मामला पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय में भी उठ चुका था, जहां 30 अप्रैल को TMC की याचिका खारिज कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि केंद्र सरकार और सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों की तैनाती में कुछ भी अवैध नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी फैसले को बरकरार रखा और हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

TMC ने जताई थी गड़बड़ी की आशंका

TMC की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट में दलील दी कि उन्हें 13 अप्रैल के परिपत्र की जानकारी देर से मिली और इससे मतगणना प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मांग केवल यह है कि परिपत्र को “यथावत लागू किया जाए”। हालांकि कोर्ट ने इस तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि परिपत्र से सहमति है तो फिर याचिका दायर करने का औचित्य क्या है।

निर्वाचन आयोग का पक्ष हुआ मजबूत

निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने कहा कि निर्वाचन अधिकारी को कर्मचारियों की तैनाती का पूरा अधिकार होता है और इसमें केंद्र व राज्य दोनों के कर्मचारी शामिल हो सकते हैं। आयोग ने TMC द्वारा जताई गई गड़बड़ी की आशंका को निराधार बताया और आश्वासन दिया कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से होगी।


इस फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि चुनाव प्रक्रिया में निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता सर्वोपरि है। अदालत के इस रुख को चुनावी पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिहाज से अहम माना जा रहा है। वहीं, TMC के लिए यह फैसला एक बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल बेहद गर्म है।

Also Read

ईरान पर फिर बरसेगा अमेरिका? ट्रंप के संकेत तेज

रांची में छात्रों का आंदोलन स्थगित, सरकार को 60 दिन का अल्टीमेटम

राम मंदिर CEO इंटरव्यू पर अवधेश प्रसाद बोले- सवाल गलत हैं

मस्ती 4 का धमाकेदार ट्रैक ‘रसिया बलमा’ रिलीज

“सोना ₹97,961 और चांदी ₹1,12,399: सर्राफा बाजार में मेटल्स का जोरदार उछाल”

You Might Also Like

रोहित शर्मा वेस्टइंडीज ODI सीरीज खेलेंगे? फैसला बाकी

IPL 2027 ऑक्शन भारत में, जानें कब और कहां होगी नीलामी

रश्मि देसाई का 8 साल बाद कमबैक, दर्जनों ऑफर्स क्यों ठुकराए

मन्नत की नेमप्लेट 25 लाख की, बिजली बिल भी लाखों में

UPI चार्ज पर संजय निषाद ने सरकार से पूछे सवाल

मधुबनी बॉर्डर पर ‘चाची 420’ गिरफ्तार, पति पहले ही जेल में

बिहार DGP विनय कुमार छुट्टी पर, प्रीता वर्मा को मिली कमान

राहुल गांधी पर भूत सवार, UPI चार्ज पर गिरिराज का हमला

Select Your City