
Report By: Kiran Prakash Singh
ममता बनर्जी ने मोदी के हुगली दौरे पर सवाल उठाते हुए यमुना में डुबकी लगाने की चुनौती दी। गंगा vs यमुना पर सियासत गरमाई।
- हुगली में नाव यात्रा पर ममता का तंज, फोटोशूट बताया
- यमुना में डुबकी लगाने की चुनौती से गरमाई सियासत
- गंगा की सफाई बनाम यमुना प्रदूषण पर छिड़ी बहस
- झालमुड़ी से लेकर राजनीति तक—हर मुद्दे पर निशाना
- चुनावी माहौल में बयानबाज़ी से बढ़ा राजनीतिक तापमान
digitallivenews.com | हुगली बनाम यमुना: ममता का मोदी पर बड़ा हमला
📅 Published Date: 25 अप्रैल 2026
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी टकराव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हुगली नदी में नाव यात्रा को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे “फोटोशूट” और “चुनावी राजनीति” करार देते हुए एक सीधी चुनौती दे डाली—क्या प्रधानमंत्री दिल्ली की यमुना में डुबकी लगाएंगे?
दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान हुगली नदी में नाव यात्रा की थी। इस दौरान उन्होंने गंगा को बंगाल की आत्मा बताया और लोगों से संवाद भी किया।
लेकिन ममता बनर्जी ने इस पूरे कार्यक्रम को राजनीतिक स्टंट बताते हुए कहा कि यह सब सिर्फ प्रचार के लिए किया गया आयोजन था। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर गंगा इतनी साफ है कि उसमें नाव विहार किया जा सकता है, तो क्या प्रधानमंत्री यमुना में भी ऐसा कर सकते हैं?
गंगा बनाम यमुना पर सियासत
ममता बनर्जी ने साफ कहा कि बंगाल की गंगा साफ है, इसलिए प्रधानमंत्री वहां नाव चला सके। वहीं दिल्ली की यमुना को उन्होंने “प्रदूषित” बताते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार सच में पर्यावरण को लेकर गंभीर है, तो उसे यमुना की सफाई पर ध्यान देना चाहिए। यह बयान सीधे तौर पर केंद्र और दिल्ली प्रशासन दोनों पर सवाल खड़ा करता है।
चुनावी माहौल में बयानबाज़ी तेज
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गर्म है। ममता बनर्जी ने हावड़ा और अन्य क्षेत्रों में रैलियों के दौरान प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों को लगातार निशाने पर लिया।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ “इमेज बिल्डिंग” का प्रयास है और जनता को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है।
झालमुड़ी विवाद भी बना मुद्दा
ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री के झालमुड़ी खाने के कार्यक्रम पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि यह सब पहले से तय और “स्क्रिप्टेड” था।
उनका कहना था कि कैमरे पहले से लगाए गए थे और पूरा आयोजन एक सुनियोजित प्रचार रणनीति का हिस्सा था। यह बयान दिखाता है कि चुनावी राजनीति में अब हर छोटी घटना भी बड़ा मुद्दा बन रही है।
TMC का पलटवार और रणनीति
तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। पार्टी नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री का दौरा केवल चुनावी लाभ के लिए है और इसका जमीनी हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है।
इसके साथ ही TMC ने यह भी कहा कि बंगाल की नदियां और पर्यटन प्रधानमंत्री के दौरे के कारण चर्चा में आए हैं, जिससे राज्य को फायदा भी हुआ है।
राजनीतिक संदेश क्या है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरा विवाद केवल नदी या पर्यावरण का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक नैरेटिव की लड़ाई है।
- एक तरफ BJP विकास और सांस्कृतिक जुड़ाव की बात कर रही है
- दूसरी तरफ TMC इसे चुनावी स्टंट बताकर जनता के सामने अलग तस्वीर पेश कर रही है
निष्कर्ष
ममता बनर्जी का यह बयान साफ तौर पर दिखाता है कि आने वाले चुनावों में राजनीतिक टकराव और तीखा होगा।
हुगली की नाव यात्रा से शुरू हुआ यह विवाद अब गंगा बनाम यमुना की बहस में बदल चुका है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष इसे अपने-अपने तरीके से जनता तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे।