AAP में बड़ी टूट: 7 सांसदों के जाने से केजरीवाल पर संकट गहराया

Report By: Kiran Prakash Singh

25 अप्रैल 2026: AAP से 7 सांसद BJP में शामिल। पार्टी में संकट गहराया, केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ीं और राजनीति में हलचल तेज।


digitallivenews.com |AAP संकट में, 7 सांसद BJP में

📅 Published Date: 25 अप्रैल 2026 (शनिवार)

आम आदमी पार्टी (AAP) इस समय अपने सबसे बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रही है। 25 अप्रैल 2026 के आसपास सामने आए घटनाक्रम ने पार्टी की स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है। राज्यसभा के 10 में से 7 सांसदों का इस्तीफा देकर BJP में शामिल होना केवल एक राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि एक गहरे संकट का संकेत है।

इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में रहे राघव चड्ढा, जिन्होंने पार्टी छोड़ते हुए कहा कि वे “सही आदमी, गलत पार्टी” में थे। उनके साथ कई बड़े नेता भी BJP में शामिल हो गए। यह घटनाक्रम अचानक नहीं हुआ, बल्कि लंबे समय से चल रही आंतरिक असंतोष और नेतृत्व विवाद का परिणाम माना जा रहा है।

आंतरिक कलह ने बढ़ाई मुश्किलें

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के अंदर कई महीनों से असहमति बढ़ रही थी। राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाया जाना इस तनाव का पहला बड़ा संकेत था। इसके बाद जांच एजेंसियों की कार्रवाई और संगठनात्मक फैसलों को लेकर मतभेद और गहराते गए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल दल-बदल नहीं, बल्कि AAP के भीतर नेतृत्व संकट और विश्वास की कमी का परिणाम है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का एक साथ जाना इस बात की ओर इशारा करता है कि संगठनात्मक ढांचा कमजोर हो रहा है।

AAP का आरोप: ‘ऑपरेशन लोटस’

AAP ने इस पूरे घटनाक्रम को BJP की रणनीति बताया है। पार्टी का आरोप है कि केंद्रीय एजेंसियों के दबाव और राजनीतिक प्रलोभनों के जरिए सांसदों को तोड़ा गया।

हालांकि BJP ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे संवैधानिक प्रक्रिया बताया है। दो-तिहाई बहुमत के चलते दल-बदल कानून के तहत इन सांसदों की सदस्यता सुरक्षित मानी जा रही है।

तीन बड़े मोर्चों पर खतरा

इस घटनाक्रम का असर AAP पर कई स्तरों पर पड़ा है:

  • राज्यसभा: पार्टी की ताकत घट गई
  • पंजाब: सबसे मजबूत गढ़ पर खतरा
  • दिल्ली: संगठन में टूट की आशंका

विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट आने वाले चुनावों, खासकर पंजाब विधानसभा चुनाव 2027, पर बड़ा असर डाल सकता है।

केजरीवाल की बढ़ती चुनौतियां

AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल पहले से ही कानूनी और राजनीतिक दबाव का सामना कर रहे हैं। अब अपने ही करीबी नेताओं के पार्टी छोड़ने से उनकी स्थिति और मुश्किल हो गई है।

उनकी नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की शैली और पार्टी पर पकड़ को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विपक्ष भी इस मौके को भुनाने की कोशिश कर रहा है।

निष्कर्ष

यह घटनाक्रम केवल सात सांसदों के जाने की कहानी नहीं है, बल्कि यह AAP के लिए एक अस्तित्व का संकट बन गया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी इस चुनौती से कैसे उबरती है।

वहीं BJP के लिए यह एक बड़ी रणनीतिक सफलता मानी जा रही है, जिसने विपक्ष के एक बड़े चेहरे को कमजोर कर दिया है। अब असली परीक्षा आने वाले चुनावों में होगी, जहां जनता का फैसला तय करेगा कि इस सियासी खेल में कौन आगे रहेगा।

Also Read

जम्मू-कश्मीर में बारिश का कहर, लैंडस्लाइड से कई वाहन दबे

शादी टली, फैंस चिंतित: स्मृति मंधाना ने किया पहला सोशल मीडिया पोस्ट

आगरा में डिजिटल युग में पर्यटन पत्रकारिता समिट: डेटा, रिसर्च और ब्रांडिंग पर मंथन

कोकोआ सप्लीमेंट से दिल की सुरक्षा और लंबी उम्र संभव: स्टडी

बर्थडे पर चिरंजीवी का फैंस को तोहफा, ‘काका’ की रिलीज डेट तय

You Might Also Like

शुभमन गिल ने परिवार संग मनाया 27वां जन्मदिन, वीडियो वायरल

दलीप ट्रॉफी फाइनल ड्रॉ हुआ तो कौन बनेगा चैंपियन? जानें नियम

‘हनुमान अंश’ के शो हटे तो गेटी गैलेक्सी थिएटर हुआ बंद

मिर्जापुर द मूवी का बॉक्स ऑफिस पर कहर, 5वें दिन 111 करोड़ पार

सपा छात्रसभा के ड्रेस कोड में लाल से नीला रंग, क्या है रणनीति?

विधानसभा हंगामे के बीच CM विजय ने जीता सबका दिल, खूब हुई तारीफ

अभिषेक बनर्जी पर बार-बार FIR से हाई कोर्ट नाराज, लगाई फटकार

ऑपरेशन सिंदूर पर रिटायर्ड एयर मार्शल का बड़ा खुलासा

Select Your City