ईरान ने कहा: अब पड़ोसी देशों पर हमला नहीं होगा; माफी 📍

Report By: Kiran Prakash Singh

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पज़ेश्कियन ने कहा है कि देश अब पड़ोसी देशों पर हमला नहीं करेगा जब तक कि उनसे हमला नहीं होता, और उन्होंने माफी भी मांगी amid Israel‑Iran युद्ध।

मिडिल ईस्ट / न्यू यॉर्क(digitallivenews):— इज़राइल‑ईरान युद्ध में क्षेत्रीय तनावों के बीच आज एक बड़ी घोषणा आई है, जिसमें ईरान के राष्ट्रपति मसूद पज़ेश्कियन ने कहा कि उनके देश अब पड़ोसी देशों को निशाना नहीं बनाएगा, जब तक कि वे उनसे पहले हमला नहीं करते हैं। साथ ही उन्होंने उन देशों से माफी भी मांगी जो हाल ही में हुए संघर्षों के कारण प्रभावित हुए हैं।

हाल के दिनों में युद्ध के तेज़ी से फैलने के कारण कई गुल्फ सहयोग परिषद (GCC) देशों — जैसे सऊदी अरब, क़तर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत और बहरीन — में मिसाइल और ड्रोन हमलों की घोषणा की गयी थी। इन हमलों ने उन देशों में नागरिक सुरक्षा और विमान सेवा कार्यों को भी प्रभावित किया था, और एयरलाइनों जैसे Emirates ने कुछ समय के लिए उड़ानें रद्द करनी पड़ीं।

आज पज़ेश्कियन ने अपने देश के अंतरिम नेतृत्व परिषद द्वारा मंज़ूर की गयी एक नई नीति का ऐलान किया जिसमें कहा गया कि ईरान के पड़ोसी देश अब केवल तभी निशाने पर होंगे जब उस देश से सीधे ईरान पर हमला किया जाएगा। उन्होंने कहा, “मैं व्यक्तिगत तौर पर उन पड़ोसी देशों से क्षमा चाहता हूँ जो ईरान के कार्यों से प्रभावित हुए।” इस घोषणा का उद्देश्य क्षेत्र में और अधिक फैलाव को रोकना और पड़ोसी देशों के साथ अनावश्यक टकराव से बचना है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ईरान पर चलाये जा रहे हमलों के जवाब में तेहरान ने मिसाइलों और ड्रोन हमलों की श्रृंखला शुरू की थी, जिनमें कुछ में GCC देशों में भी मिसाइलें और ड्रोन दागे गए। इन हमलों के कारण कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए चेतावनियाँ जारी की थीं और कुछ एयर स्पेस व एयरोपोर्ट संचालन प्रभावित हुए थे।

पज़ेश्कियन ने यह भी जोर देकर कहा कि ईरान “पड़ोसी देशों के प्रति किसी भी तरह की शत्रुता नहीं रखता” और उसका लक्ष्य क्षेत्र में शांति तथा स्थिरता सुनिश्चित करना है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर ईरान पर किसी देश की तरफ़ से हमला होता है, तो उसका रुख़ दृढ़ और जवाबी रहेगा।

विश्लेषकों के अनुसार, यह निर्णय दरअसल ईरान के युद्ध को एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में बदलने से रोकने के प्रयास के रूप में भी देखा जा रहा है। इससे पहले सीरिया, कुवैत, और अन्य क्षेत्र में मिसाइलों के आने की ख़बरें आई थीं, जिससे यह खतरा पैदा हुआ था कि मिडिल ईस्ट का युद्ध और फैल सकता है।

पज़ेश्कियन के बयान को राजनीतिक व सामरिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण बताया जा रहा है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि ईरान खुद को बाहरी मोर्चों पर सीमित रखने की कोशिश कर रहा है और अनावश्यक युद्ध विस्तार से बचना चाहता है। सैनिक और राजनयिक चैनलों पर यह माना जा रहा है कि ईरान इस घोषणा के ज़रिये पड़ोसी देशों को भरोसा देना चाहता है कि उनका साथ संघर्ष का लक्ष्य नहीं है जब तक उनसे सीधे हमला न हो।

इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ जारी युद्ध ने कई महीनों की तनावपूर्ण कूटनीतिक और सैन्य लड़ाई के बाद एक बड़े युद्ध का रूप ले लिया है। राजनयिक सूत्रों का कहना है कि अगर पड़ोसी देश शामिल हो जाते और क्षेत्रीय मोर्चा और खुलता, तो यह संघर्ष और अधिक गंभीर और व्यापक हो सकता था। इसी वजह से आज की घोषणा को एक संभावित डिप्लोमैटिक ब्रेक के रूप में भी देखा जा रहा है।

हालाँकि, इस घोषणा के तुरंत बाद भी कुछ रिपोर्टों में बताया गया कि मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि कूटनीतिक प्रयासों और सशस्त्र घटकों के बीच तालमेल में कठिनाई बनी हुई है। ऐसे में अगले कुछ दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या संघर्ष वास्तव में सीमित रहता है या फिर बढ़ता है।

यूएई, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों ने पहले मिसाइल और ड्रोन हमलों की सूचना दी थी और कुछ देशों ने ईरान के कूटनीतिक चैनलों के साथ बातचीत के पहलुओं पर अपनी प्रतिक्रिया भी साझा की थी। इस बीच, वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में भी अस्थिरता बढ़ गयी थी, और तेल तथा गैस की कीमतों पर दबाव देखा गया था।

कुल मिलाकर, आज पज़ेश्कियन का बयान एक संकेत है कि ईरान संघर्ष को सीमित करने की दिशा में क़दम उठा रहा है, मगर शर्तों के साथ, और यह क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय शक्ति‑संतुलन की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है।

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