
Report By: Kiran Prakash Singh
विनोद कांबली: प्रतिभा का अनजाना सितारा जिसने अनुशासन की कमी से किया करियर बर्बाद
विनोद कांबली की क्रिकेट यात्रा प्रतिभा से भरी थी, लेकिन अनुशासनहीनता और गलत आदतों ने उनका करियर समय से पहले खत्म कर दिया।
नई दिल्ली।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कई ऐसे खिलाड़ी आए हैं, जिनकी शुरुआत शानदार रही और जिन्हें भविष्य का सुपरस्टार माना गया। लेकिन अनुशासनहीनता, गलत संगत और लापरवाही ने उनके करियर को समय से पहले समाप्त कर दिया। ऐसे ही नामों में सबसे प्रमुख है विनोद कांबली, जो सचिन तेंदुलकर के बचपन के साथी और कभी भारत के सबसे प्रतिभाशाली बल्लेबाजों में शुमार थे।
स्कूल और जूनियर क्रिकेट में धमाल
विनोद कांबली ने स्कूल और जूनियर क्रिकेट में जो प्रदर्शन किया, वह आज भी इतिहास में दर्ज है।
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कांबली और सचिन तेंदुलकर ने हैरिस शील्ड टूर्नामेंट में 664 रनों की ऐतिहासिक साझेदारी की।
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इस मैच में सचिन ने नाबाद 326 रन, जबकि कांबली ने 349 रन नॉट आउट बनाए।
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बाएं हाथ के बल्लेबाज कांबली में गजब की तकनीक और आत्मविश्वास था।
अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत धमाकेदार
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भारत के लिए खेले अपने पहले 6 टेस्ट मैचों में 4 शतक।
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21 साल और 32 दिन की उम्र में इंग्लैंड के खिलाफ 224 रनों की डबल सेंचुरी, सबसे कम उम्र में यह रिकॉर्ड।
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केवल 14 टेस्ट पारियों में 1000 रन पूरे, भारत के लिए सबसे तेज।
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अपने पहले 4 टेस्ट मैचों में लगातार दो-दोहरे शतक लगाने वाले दुनिया के इकलौते बल्लेबाज।
करियर का अंत और सबक
हालांकि, विनोद कांबली का करियर लंबा नहीं चला।
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शराब की लत
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अनुशासनहीनता
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फिटनेस पर ध्यान न देना
इन कारणों ने उनकी चमकती हुई क्रिकेट यात्रा को अंधेरे में धकेल दिया।
उनकी कहानी आज भी क्रिकेट जगत में यह संदेश देती है कि सिर्फ प्रतिभा ही काफी नहीं होती, उसे संभालने के लिए अनुशासन और समर्पण भी उतना ही जरूरी है।