
Report By: Kiran Prakash Singh
लश्कर-ए-तैयबा की महिलाओं और लड़कियों को फिदायीन बनाने की गुप्त साजिश पर खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट
नई दिल्ली, (Digital Live News):
पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) द्वारा महिलाओं और लड़कियों को कट्टरपंथी विचारधारा में ढालकर फिदायीन (आत्मघाती) गतिविधियों के लिए तैयार किए जाने की जानकारी भारतीय खुफिया एजेंसियों को मिली है। यह जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स और लीक हुई वीडियो फुटेज के माध्यम से सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, एलईटी ने पारंपरिक लड़ाकू प्रशिक्षण से आगे बढ़कर सामाजिक, शैक्षिक और राजनीतिक मोर्चों पर भी अपने नेटवर्क को सक्रिय किया है।
खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, यह अभियान 26 निर्दोष नागरिकों की जान ले चुके पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद और अधिक सक्रिय हुआ। लीक हुई वीडियो क्लिपों में एलईटी के फाउंडर हाफिज अब्दुर रऊफ और अन्य ट्रेनरों को महिलाओं के लिए लाइव ऑनलाइन सत्र चलाते हुए दिखाया गया है, जिसमें भर्ती, ब्रेनवॉशिंग और जिहाद की व्याख्या शामिल है। रऊफ का नाम पिछले वर्षों में जिहादी नेटवर्क के सक्रिय नेताओं में आता रहा है, और उसके नेतृत्व में चल रहे प्रशिक्षण शिविरों की जानकारी खुफिया एजेंसियों को मिली है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एलईटी अब केवल पारंपरिक लड़ाकू प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है। संगठन ने कथित तौर पर पीएमएमएल (एलईटी का राजनीतिक मोर्चा), मुस्लिम यूथ लीग और महिला/लड़कियों की लीग जैसे नागरिक-आधारित मंच तैयार किए हैं। इन मंचों के माध्यम से महिलाओं को ‘सशक्तिकरण’ का बहाना देकर कट्टरपंथी विचारधारा में डाला जा रहा है। खुफिया एजेंसियों को मिली फुटेज में स्थानीय सैन्य और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी का संकेत भी है, जिसे गंभीरता से देखा जा रहा है।
एक वीडियो क्लिप में एलईटी के सदस्य इम्तियाज अहमद मक्की महिलाओं को संबोधित करते हुए कहते हैं कि भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनका “सबसे बड़ा दुश्मन” हैं। मक्की के अनुसार, अब जिहाद पीएमएमएल के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा। खुफिया सूत्रों का कहना है कि इस गतिविधि का उद्देश्य केवल लड़ाकू लक्ष्यों के लिए महिलाओं को तैयार करना नहीं है, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक स्तर पर भी कट्टरवाद फैलाना है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के शैक्षिक और सामाजिक रूप में छिपे नेटवर्क की सटीक पहचान और विघटन के लिए बहु-राष्ट्रीय खुफिया साझेदारी और लोकल निगरानी आवश्यक है। अधिकारियों ने कहा कि फुटेज और सूचनाओं के आधार पर आगे की कानूनी और खुफिया कार्रवाई जारी है। मीडिया रिपोर्ट्स इस खतरनाक प्रवृत्ति की ओर वैश्विक ध्यान खींच रही हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं और लड़कियों के माध्यम से कट्टरपंथी विचारधारा को घरों, स्कूलों और समुदायों तक पहुंचाना एक नई रणनीति है, जिसे रोकने के लिए न केवल खुफिया बल बल्कि सामाजिक जागरूकता अभियान भी जरूरी होंगे।
इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो गया है कि आतंकवादी संगठन अब केवल हथियारों से नहीं, बल्कि सोशल मीडिया, ऑनलाइन ट्रेनिंग और नागरिक मंचों के माध्यम से भी अपनी कट्टर गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे में खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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नई दिल्ली: खुफिया सूत्रों और लीक हुई फुटेज के अनुसार, पाकिस्तान में सक्रिय लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) महिलाओं और लड़कियों को कट्टरपंथी विचारधारा में ढालकर फिदायीन गतिविधियों के लिए तैयार कर रहा है। रिपोर्ट में एलईटी के फाउंडर हाफिज अब्दुर रऊफ और अन्य ट्रेनरों के लाइव ऑनलाइन सत्रों का जिक्र है, जिसमें भर्ती, ब्रेनवॉशिंग और जिहाद की व्याख्या शामिल है। संगठन ने पीएमएमएल, मुस्लिम यूथ लीग और महिला/लड़कियों की लीग जैसे मंच तैयार किए हैं, जिनके जरिए सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर कट्टरवाद फैलाया जा रहा है। खुफिया एजेंसियों ने स्थानीय सैन्य और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी का भी संकेत पाया है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस नेटवर्क को पहचानने और विघटित करने के लिए बहु-राष्ट्रीय खुफिया साझेदारी और लोकल निगरानी जरूरी है। एजेंसियां फुटेज और सूचनाओं के आधार पर कानूनी और खुफिया कार्रवाई कर रही हैं।