“करूर भगदड़: सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच के दिए आदेश”

Report By: Kiran Prakash Singh

करूर भगदड़ मामला: सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच का दिया आदेश, पूर्व जज अजय रस्तोगी की निगरानी में चलेगी जांच

📍 नई दिल्ली (digitallivenews)
तमिलनाडु के करूर में 27 सितंबर को अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके की रैली में हुई भगदड़ के मामले ने अब गंभीर कानूनी मोड़ ले लिया है। इस घटना में 41 लोगों की मौत और 100 से अधिक लोग घायल हो गए थे। अब इस दर्दनाक हादसे की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस एन.वी. अंजारिया शामिल थे, ने इस मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने जांच की निगरानी के लिए पूर्व जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित करने का भी निर्देश दिया है।


🕵️‍♂️ कैसी होगी निगरानी व्यवस्था?

  • जांच की निगरानी करने वाली कमेटी में दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी भी शामिल होंगे, जो आईजीपी रैंक से नीचे के नहीं होंगे।

  • सीबीआई अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे कमेटी के समक्ष हर महीने जांच की रिपोर्ट पेश करें।

  • यह कमेटी जांच के हर पहलू पर नजर रखेगी और अदालत को नियमित अपडेट देगी।


⚖️ मद्रास हाईकोर्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मद्रास हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने विशेष रूप से यह बिंदु उठाया:

  • हाईकोर्ट ने एसआईटी जांच का आदेश दिया, जबकि मामला पहले से ही मदुरै बेंच में विचाराधीन था।

  • एकल न्यायाधीश ने मुख्य न्यायाधीश की अनुमति के बिना याचिका पर विचार किया और मदुरै बेंच के पहले के फैसले को नजरअंदाज कर दिया।

  • इससे मामला अलग-अलग कोर्ट में चलने लगा, जिससे कानूनी भ्रम और अव्यवस्था पैदा हुई।

कोर्ट ने कहा कि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि एसओपी (Standard Operating Procedure) से जुड़ी रिट याचिका को क्रिमिनल कैटेगरी में कैसे दर्ज किया गया, जबकि इसका दायरा अलग था। इस पर कोर्ट ने उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल से स्पष्टीकरण मांगा है।


🗣️ सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से भी पूछे तीखे सवाल

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु प्रशासन से सवाल किया कि:

  • जब AIADMK को करूर में रैली की अनुमति नहीं दी गई थी क्योंकि वहां जगह कम थी, तो फिर टीवीके को कैसे इजाज़त दी गई?

  • क्या यह फैसला समानता के सिद्धांत के खिलाफ नहीं है?

यह सवाल महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार के फैसले पारदर्शी और निष्पक्ष नहीं थे


🔍 क्या है करूर भगदड़ मामला?

  • 27 सितंबर 2025, को तमिलनाडु के करूर में अभिनेता थलापति विजय की पार्टी टीवीके ने एक राजनीतिक रैली आयोजित की थी।

  • इस रैली में भीड़ का जबरदस्त जमावड़ा हुआ और अव्यवस्था के कारण भगदड़ मच गई।

  • इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में 41 लोगों की मौत और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।

इस घटना ने राज्य प्रशासन और आयोजकों की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े किए।


📑 क्या था याचिका में?

  • इस हादसे की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई को जिम्मेदारी सौंपने की मांग की गई थी।

  • याचिकाकर्ताओं में एक पक्ष थे बीजेपी नेता उमा आनंदन और दूसरा अभिनेता विजय की पार्टी से जुड़े लोग।

  • इन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने 10 अक्टूबर को सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है।


📝 जस्टिस माहेश्वरी ने क्या कहा?

  • सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस जे.के. माहेश्वरी ने स्पष्ट किया कि “हमें हाईकोर्ट की फंक्शनिंग पर भी ध्यान देना पड़ा है।”

  • उन्होंने संकेत दिए कि यदि आवश्यक हुआ तो, मामला पूरी तरह सीबीआई को सौंप दिया जाएगा।

  • उन्होंने यह भी कहा कि कुछ आदेश ऐसे याचिकाओं पर दिए गए जो संबंधित पक्षों द्वारा दायर ही नहीं की गई थीं, जो प्रक्रियात्मक त्रुटि को दर्शाता है।


निष्कर्ष: पारदर्शिता और जवाबदेही की उम्मीद

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से साफ हो गया है कि अब इस संवेदनशील मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से होगी, और दोषियों को बच निकलने का मौका नहीं मिलेगा। साथ ही, यह आदेश न्यायिक पारदर्शिता, प्रशासनिक जवाबदेही और कानूनी प्रक्रिया की पवित्रता की दिशा में एक अहम कदम है।

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