
Report By: Kiran Prakash Singh
पटना DigitalLiveNews:
बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट में संशोधन को लेकर राजनीतिक संग्राम तेज हो गया है। चुनाव आयोग के एसआईआर अभियान के जरिए लाखों वैध वोटरों के नाम काटे जाने के विपक्ष के आरोपों ने तूल पकड़ लिया है। मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने मतदाता अधिकारों की रक्षा के लिए ‘वोटर अधिकार यात्रा’ शुरू की है, जिसकी अगुआई कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव कर रहे हैं।
इस यात्रा में अब तक तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव जैसे कई बड़े नेता शामिल हो चुके हैं। हालांकि विपक्ष की कद्दावर नेता और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने यात्रा से दूरी बनाए रखी है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, अब खबर है कि ममता ने टीएमसी की ओर से सांसद यूसुफ पठान और वरिष्ठ नेता ललितेश त्रिपाठी को प्रतिनिधित्व के लिए भेजा है।
दिलचस्प यह है कि पश्चिम बंगाल में भी वोटर लिस्ट अपडेट की प्रक्रिया को लेकर संग्राम छिड़ा है। सीएम ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि वह बंगाल सरकार के अधिकारियों को धमका रहा है, जबकि आयोग का अधिकार सिर्फ चुनाव अवधि तक सीमित है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि कोई सर्वे करने आए तो जानकारी न दें और आधार कार्ड तैयार रखें। बंगाल में 2026 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं।
बिहार में विपक्ष की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ अब अंतिम चरण में है और इसे जनता से भरपूर समर्थन मिल रहा है। यह यात्रा अब इंडिया ब्लॉक के शक्ति प्रदर्शन में बदलती जा रही है। 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने के खिलाफ यह यात्रा न सिर्फ बिहार, बल्कि पूरे देश में मतदाता अधिकारों पर बहस छेड़ने में सफल रही है।