दिल्ली आवारा कुत्ते समस्या: सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश

Report By: Kiran Prakash Singh

दिल्ली में आवारा कुत्तों की समस्या गंभीर, सुप्रीम कोर्ट ने उठाया सख्त कदम; विश्व के विभिन्न देशों के समाधान मॉडल पर नजर

नई दिल्ली,(digitallivenews) 20 अगस्त 2025

— भारत की राजधानी दिल्ली में आवारा कुत्तों की संख्या करीब 10 लाख तक पहुंच चुकी है, जो सड़कों पर लोगों के लिए सुरक्षा खतरा बन रही है। आवारा कुत्तों द्वारा हमलों और रेबीज जैसी जानलेवा बीमारियों के बढ़ते मामले चिंता का विषय हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किया है कि अगले आठ महीनों के अंदर दिल्ली के सभी आवारा कुत्तों को पकड़ कर उनका टीकाकरण, नसबंदी और देखभाल सुनिश्चित की जाए।


सुप्रीम कोर्ट का आदेश और इसके प्रभाव

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का उद्देश्य आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करना और जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालांकि इस फैसले पर राजनीतिक और सामाजिक समुदायों में विरोध भी देखने को मिल रहा है, लेकिन न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यह कदम सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए आवश्यक है।


दुनिया के विभिन्न देशों के समाधान मॉडल

भारत की इस समस्या से निपटने के लिए विश्व के कई देशों के सफल मॉडलों से सीख लेना उपयोगी होगा:

  • अमेरिका:
    यहां “एनिमल केयर सेंटर्स” आवारा कुत्तों को पकड़ कर शेल्टर होम्स में रखते हैं, उनका इलाज करते हैं और उन्हें गोद देने की व्यवस्था करते हैं। कुत्तों को कानूनी सुरक्षा भी प्राप्त है।

  • ब्रिटेन:
    स्थानीय प्रशासन आवारा कुत्तों को पकड़ कर टीकाकरण और नसबंदी करता है। 2023-24 में 36,000 से अधिक कुत्तों की देखभाल की गई।

  • सिंगापुर:
    यहां आधुनिक तकनीक का उपयोग होता है। कुत्तों में चिप लगाई जाती है जिससे उनकी लोकेशन ट्रैक की जा सके। नसबंदी, टीकाकरण के बाद उन्हें शेल्टर होम्स में रखा जाता है और आम लोगों को गोद लेने का मौका मिलता है।

  • तुर्की:
    2020 तक लगभग 40 लाख आवारा कुत्ते थे। सरकार ने संसद से कानून बनाकर व्यापक स्तर पर नसबंदी, टीकाकरण और शेल्टरिंग का अभियान चलाया।

  • जापान:
    स्थानीय प्रशासन कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और गोद लेने की व्यवस्था करता है। खतरनाक या गंभीर रूप से बीमार कुत्तों को मारने की अनुमति भी है।


निष्कर्ष

दुनिया के अलग-अलग देशों ने अपने संसाधनों और सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान निकाला है। भारत को भी इन मॉडलों से प्रेरणा लेकर एक प्रभावी, संवेदनशील और टिकाऊ योजना बनानी होगी ताकि जनता की सुरक्षा सुनिश्चित हो और जानवरों के प्रति करुणा भी बनी रहे।

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