योगी सरकार का माइक्रोबायोम प्लान तैयार, स्वास्थ्य से खेती तक फायदा

Report By: Kiran Prakash Singh

यूपी सरकार माइक्रोबायोम तकनीक से अस्पतालों में संक्रमण की निगरानी, नदियों की सफाई और कृषि सुधार पर काम करेगी। पहले चरण में पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी है।

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योगी सरकार का माइक्रोबायोम प्लान तैयार, स्वास्थ्य से खेती तक होगा फायदा

डिजिटल लाइव न्यूज | 22 अक्टूबर 2026 | digitallivenews.com

उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने, जल प्रदूषण कम करने और कृषि को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए माइक्रोबायोम तकनीक के इस्तेमाल की योजना तैयार की जा रही है। राज्य सरकार ने इस संबंध में ‘उत्तर प्रदेश स्टेट स्पेसिफिक नोट ऑन माइक्रोबायोम टेक्नोलॉजीज’ नाम से एक ड्राफ्ट तैयार किया है। इसमें अस्पतालों में संक्रमण की निगरानी से लेकर नदियों की सफाई और फसलों की गुणवत्ता सुधारने तक तकनीक के इस्तेमाल का प्रस्ताव है।

उत्तर प्रदेश प्रमोट फार्मा काउंसिल (UPPPC) की सीईओ कृतिका शर्मा के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुरूप विज्ञान और तकनीक के जरिए विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में यह ड्राफ्ट तैयार किया गया है। इसे मुख्यमंत्री के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की दिशा में काम शुरू होगा।

1. स्वास्थ्य से पर्यावरण तक माइक्रोबायोम तकनीक का इस्तेमाल

ड्राफ्ट में माइक्रोबायोम तकनीक को स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छ जल, स्वच्छता, खाद्य सुरक्षा और टिकाऊ कृषि से जोड़ने का प्रस्ताव है। इसके तहत अस्पतालों में संक्रमण की निगरानी, रोगाणुरोधी दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता की पहचान और अपशिष्ट प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में काम किया जा सकता है।

योजना के मुताबिक, शुरुआत प्रदेश के कुछ चुनिंदा संस्थानों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में होगी। इनके परिणामों का मूल्यांकन करने के बाद सफल प्रयोगों को अन्य संस्थानों और क्षेत्रों तक बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।

2. अस्पतालों में संक्रमण और AMR की निगरानी

माइक्रोबायोम तकनीक का एक प्रमुख प्रस्ताव अस्पतालों में संक्रमण की पहचान और निगरानी से जुड़ा है। विषय विशेषज्ञ डॉ. जीएन सिंह ने सरकारी और चयनित निजी अस्पतालों के नेटवर्क के जरिए संक्रमण और एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (AMR) पर नजर रखने का सुझाव दिया है।

AMR ऐसी स्थिति है, जिसमें बैक्टीरिया, फंगस और अन्य सूक्ष्मजीव उन दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित कर लेते हैं, जिनसे पहले उनका इलाज किया जा सकता था। इससे संक्रमण का उपचार मुश्किल हो सकता है।

प्रस्तावित व्यवस्था में पारंपरिक प्रयोगशाला जांच के साथ जरूरत के अनुसार लक्षित आनुवंशिक परीक्षण और डीएनए सीक्वेंसिंग का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे संक्रमण के संभावित स्रोतों और दवाओं के प्रति प्रतिरोध के कारणों को समझने में मदद मिलने की उम्मीद है।

3. गंगा, यमुना और गोमती की सफाई पर जोर

ड्राफ्ट में गंगा, यमुना और गोमती नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में उपचार आधारित पायलट परियोजनाओं को प्राथमिकता देने का सुझाव है। इसका उद्देश्य जल शोधन संयंत्रों में मौजूद सूक्ष्मजीव समुदायों की कार्यक्षमता का आकलन करना और जैविक उपचार की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाएं तलाशना है।

इसके तहत वायु संचार, पोषक तत्वों के संतुलन और जहरीले पदार्थों के प्रवेश जैसी स्थितियों का अध्ययन किया जा सकता है। जरूरत के अनुसार सुधार करके अपशिष्ट जल के शोधन को बेहतर बनाने का प्रयास होगा।

इस तकनीक के जरिए जल प्रदूषण नियंत्रण और अपशिष्ट प्रबंधन में मदद मिलने की संभावना है। हालांकि, नदियों की सफाई पर इसका वास्तविक प्रभाव पायलट परियोजनाओं के परिणाम और उनके व्यापक स्तर पर लागू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

4. कृषि और फसलों की गुणवत्ता सुधारने की तैयारी

माइक्रोबायोम तकनीक का इस्तेमाल कृषि क्षेत्र में भी करने का प्रस्ताव है। मिट्टी और पौधों के आसपास मौजूद सूक्ष्मजीव फसलों की वृद्धि, पोषक तत्वों की उपलब्धता और मिट्टी की उर्वरता में भूमिका निभा सकते हैं।

ड्राफ्ट में कृषि से जुड़ी परियोजनाओं के जरिए यह जांचने की बात है कि सूक्ष्मजीवों से संबंधित तकनीकों का इस्तेमाल फसलों की गुणवत्ता सुधारने और उन्हें नुकसान से बचाने में किस तरह मदद कर सकता है।

इन प्रयोगों के परिणामों का अलग-अलग मौसम और फसल चक्रों के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि कौन-से प्रयोग किन परिस्थितियों में उपयोगी हैं।

5. 24 महीने में चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगी योजना

कृतिका शर्मा के मुताबिक, इस योजना में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के साथ स्वास्थ्य, कृषि, उद्यान, नगर विकास, जल एवं स्वच्छता तथा प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विभागों का सहयोग लिया जाएगा। लखनऊ स्थित बायोटेक्नोलॉजी पार्क और उत्तर प्रदेश प्रमोट फार्मा काउंसिल की भी महत्वपूर्ण भूमिका प्रस्तावित है।

ड्राफ्ट में योजना को तीन चरणों में आगे बढ़ाने का खाका दिया गया है:

  • पहले तीन महीने: उपलब्ध प्रयोगशालाओं की क्षमता का आकलन, संबंधित विभागों से परामर्श और पायलट स्थलों का चयन।
  • चौथे से बारहवें महीने: अस्पतालों में संक्रमण की निगरानी, अपशिष्ट जल के परीक्षण और कृषि परियोजनाओं पर काम।
  • तेरहवें से चौबीसवें महीने: अलग-अलग मौसम और फसल चक्रों के आधार पर परिणामों का मूल्यांकन तथा सफल प्रयोगों के विस्तार की तैयारी।

क्या है माइक्रोबायोम?

माइक्रोबायोम सूक्ष्मजीवों के ऐसे समुदाय को कहा जाता है, जिसमें बैक्टीरिया और फंगस जैसे सूक्ष्मजीव तथा उनके आसपास का जैविक परिवेश शामिल होता है। ये मनुष्य, मिट्टी, पानी, फसलों और इमारतों जैसे वातावरण में मौजूद रहते हैं। कुछ सूक्ष्मजीव बीमारियों का कारण बन सकते हैं, जबकि कई पाचन, मिट्टी की उर्वरता और जैविक अपशिष्ट के विघटन जैसी उपयोगी प्रक्रियाओं में योगदान देते हैं।

फिलहाल उत्तर प्रदेश सरकार का माइक्रोबायोम तकनीक से जुड़ा प्रस्ताव ड्राफ्ट के चरण में है। मुख्यमंत्री की मंजूरी और पायलट परियोजनाओं के परिणाम इसके आगे के क्रियान्वयन की दिशा तय करेंगे। योजना का उद्देश्य तकनीक के जरिए स्वास्थ्य, जल प्रबंधन और कृषि क्षेत्र में सुधार की संभावनाओं को परखना है।

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