
Report By: Kiran Prakash Singh
नई दिल्ली, 27 अगस्त 2025 (Digital Live News):
भारत के सबसे प्रभावशाली कॉर्पोरेट घरानों में से एक रिलायंस ग्रुप एक बार फिर सुर्खियों में है—इस बार रिलायंस फाउंडेशन के वंतारा जू को लेकर। सुप्रीम कोर्ट ने इस हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट की जांच के लिए उच्चस्तरीय एसआईटी (विशेष जांच टीम) गठित की है। टीम को 12 सितंबर तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी है, और 15 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होगी।
यह मामला सिर्फ प्रशासनिक अनियमितताओं का नहीं, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग, वित्तीय गड़बड़ियों और वन्यजीव संरक्षण कानून के उल्लंघन जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ा हुआ है। इसकी राजनीतिक संवेदनशीलता इसलिए और बढ़ गई है क्योंकि इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च 2024 में स्वयं किया था। यह प्रोजेक्ट मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी का ड्रीम प्रोजेक्ट बताया गया था।
अंबानी-मोदी की नजदीकियों पर नई रोशनी
2014 से अब तक कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुकेश अंबानी को सार्वजनिक मंचों पर एक साथ देखा गया है। इनके संबंधों को लेकर पहले भी चर्चा होती रही है। लेकिन वंतारा जू जांच ने इन नजदीकियों पर नए सिरे से सवाल खड़े कर दिए हैं।
अंतरराष्ट्रीय दबाव और रूस से तेल खरीद
भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदा था। रिलायंस ने इस तेल को प्रोसेस कर भारी मुनाफा कमाया। इस व्यापार पर अमेरिका और पश्चिमी देशों ने आपत्ति जताई थी। अब वंतारा जू विवाद ने रिलायंस को घरेलू ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दबाव में डाल दिया है।
क्या बदलेगा सत्ता और कॉर्पोरेट का समीकरण?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही यह जांच सिर्फ कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी है। यह संकेत हो सकता है कि सत्ता अब कॉर्पोरेट ताकतों पर शिकंजा कसना चाहती है, या फिर दोनों के बीच पुराना तालमेल दरक रहा है।