साइबर ठगी पर यूपी पुलिस का डिजिटल वार, रकम फ्रीज में आगे

Report By: Kiran Prakash Singh

उत्तर प्रदेश में साइबर ठगी की रकम फ्रीज कराने की दर सितंबर में 34% रही। रियल टाइम ट्रैकिंग और बैंक समन्वय से रकम रोकने पर जोर दिया जा रहा है।

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साइबर ठगी पर यूपी पुलिस का डिजिटल वार, रकम फ्रीज में आगे

Digital Live News | 3 अक्टूबर 2026 | digitallivenews.com

उत्तर प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराध के बीच पुलिस ने ठगी की रकम को जल्द रोकने और पीड़ितों तक वापस पहुंचाने के लिए तकनीक आधारित व्यवस्था पर जोर बढ़ाया है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर में साइबर फ्रॉड की रकम फ्रीज कराने की उत्तर प्रदेश की दर 34 फीसदी रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 31 फीसदी बताया गया।

यूपी पुलिस की साइबर क्राइम व्यवस्था में शिकायत मिलने के बाद संदिग्ध रकम को होल्ड या फ्रीज कराने और आगे के ट्रांसफर को रोकने के लिए बैंकिंग सिस्टम के साथ समन्वय किया जाता है। पुलिस के आधिकारिक दिशा-निर्देशों में भी साइबर अपराध से जुड़ी होल्ड/फ्रीज धनराशि की वापसी के लिए NCRP-CFCFRMS के तहत कार्रवाई का प्रावधान है।

1. साइबर ठगी की रकम रोकने पर जोर

साइबर फ्रॉड में सबसे महत्वपूर्ण चुनौती ठगी के बाद रकम को तेजी से अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर होने से रोकना है। शिकायत मिलते ही संबंधित बैंक और जांच एजेंसियों के बीच जानकारी साझा कर रकम को होल्ड या फ्रीज कराने की कोशिश की जाती है।

यूपी पुलिस के आधिकारिक दिशा-निर्देशों में साइबर अपराध की जांच के दौरान बैंक खातों को फ्रीज कराने के लिए प्रावधान पहले से मौजूद हैं। हालिया निर्देशों में पीड़ितों की होल्ड या फ्रीज रकम की वापसी के लिए अलग मॉड्यूल और शिकायत निवारण व्यवस्था का भी उल्लेख है।

2. रियल टाइम ट्रैकिंग से कार्रवाई तेज करने की कोशिश

साइबर अपराधियों की कोशिश रहती है कि ठगी की रकम को कुछ ही समय में कई खातों में ट्रांसफर कर दिया जाए। ऐसे मामलों में रियल टाइम डेटा शेयरिंग और बैंकिंग सिस्टम के साथ समन्वय रकम को आगे जाने से रोकने में मदद कर सकता है।

साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर के जरिए शिकायतों पर कार्रवाई और संदिग्ध लेनदेन को ट्रैक करने की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई में लगने वाले समय को कम करना है।

यूपी पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड में साइबर अपराध के मामलों में संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज कराने और पीड़ितों को धनराशि वापस कराने के कई उदाहरण भी दर्ज हैं।

3. 84 हजार साइबर अवेयरनेस ड्राइव का दावा

साइबर ठगी रोकने के लिए सिर्फ पुलिस कार्रवाई ही नहीं, बल्कि जागरूकता अभियान पर भी जोर दिया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक प्रदेश में अब तक करीब 84 हजार साइबर अवेयरनेस ड्राइव आयोजित किए गए हैं।

इन अभियानों में लोगों को फिशिंग, फर्जी वेबसाइट, संदिग्ध लिंक, डेटा चोरी और ऑनलाइन ठगी के दूसरे तरीकों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। सार्वजनिक स्थानों और विभिन्न संस्थानों के जरिए लोगों को डिजिटल लेनदेन में सावधानी बरतने की जानकारी दी जा रही है।

यूपी पुलिस की साइबर क्राइम इकाई भी ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करने की सलाह देती है।

4. पुलिसकर्मियों की तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर जोर

साइबर अपराध के तरीके लगातार बदल रहे हैं। इसी वजह से पुलिसकर्मियों को भी नई तकनीक और साइबर जांच से जुड़ी ट्रेनिंग देने पर जोर दिया जा रहा है।

एआई आधारित फर्जी सामग्री, म्यूल अकाउंट और दूसरे डिजिटल फ्रॉड के तरीकों को समझना जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। यूपी पुलिस की ओर से साइबर अपराध की रोकथाम और जांच के लिए तकनीकी क्षमता बढ़ाने तथा लगातार प्रशिक्षण पर जोर दिया जा रहा है।

प्रदेश में साइबर अपराध से निपटने के लिए साइबर पुलिस स्टेशनों और साइबर सेल की व्यवस्था भी विकसित की गई है। यूपी पुलिस के अनुसार राज्य के सभी 18 पुलिस रेंज जिलों में साइबर पुलिस स्टेशनों की व्यवस्था की गई है।

5. ‘गोल्डन ऑवर’ में शिकायत करना अहम

साइबर ठगी होने के बाद जितनी जल्दी शिकायत की जाए, रकम को रोकने की संभावना उतनी ही बेहतर हो सकती है। यूपी पुलिस ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में 1930 पर शिकायत करने की अपील करती है। आधिकारिक साइबर क्राइम पेज पर भी 24 घंटे के भीतर 1930 पर कॉल करने की सलाह दी गई है।

साइबर अपराध की स्थिति में पीड़ितों को संदिग्ध लेनदेन की जानकारी तुरंत बैंक और संबंधित साइबर हेल्पलाइन तक पहुंचानी चाहिए। यूपी पुलिस की व्यवस्था में बैंक खातों को फ्रीज कराने और पीड़ितों की होल्ड रकम की वापसी के लिए प्रक्रिया निर्धारित की गई है।

साइबर ठगी का मुकाबला केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। जागरूकता, समय पर शिकायत और तकनीकी कार्रवाई तीनों मिलकर नुकसान को कम करने में भूमिका निभाते हैं। उत्तर प्रदेश में डिजिटल सिस्टम, बैंकिंग समन्वय और साइबर प्रशिक्षण के जरिए इस व्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश जारी है।

Digital Live News | 3 अक्टूबर 2026
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