स्वदेशी नेविगेशन ऐप मेप्लस को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की तारीफ

Report By: Kiran Prakash Singh

भारत का स्वदेशी नेविगेशन ऐप मेप्लस अब गूगल मैप्स को टक्कर दे रहा है, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने की तारीफ

नई दिल्ली (Digital Live News) — भारत में तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर एक और बड़ा कदम बढ़ाया गया है। देश का स्वदेशी नेविगेशन ऐप मेप्लस (Mappls) अब गूगल मैप्स को कड़ी टक्कर दे रहा है। इस ऐप की केंद्रीय रेल और संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने खुलेआम तारीफ की है और लोगों से इसे ट्राई करने की सलाह दी है।


मेप्लस की दिलचस्प शुरुआत: गूगल से पहले 1995 में भारत में हुआ था नेविगेशन डेटा का विकास

अधिकतर लोगों को यह नहीं पता कि मेप्लस की मूल कंपनी ‘मेपमाइइंडिया’ की स्थापना गूगल मैप्स से पूरे दस साल पहले, यानी 1995 में ही हो चुकी थी।

मेपमाइइंडिया के को-फाउंडर और चेयरमैन राकेश वर्मा और उनकी पत्नी ने अमेरिका में कई साल काम करने के बाद भारत लौटकर डिजिटल मैपिंग की दिशा में देश को आत्मनिर्भर बनाने का बीड़ा उठाया। राकेश जनरल मोटर्स में कार्यरत थे जबकि उनकी पत्नी आईबीएम में थीं।

राकेश बताते हैं कि 1995 में उन्हें यह एहसास हो गया था कि भविष्य की दुनिया में हर डेटा का आधार लोकेशन होगा। उसी सोच को लेकर मेपमाइइंडिया की नींव रखी गई।

वहीं, गूगल मैप्स की शुरुआत 2004 में ऑस्ट्रेलिया में हुई, जिसे गूगल ने 2005 में खरीदकर लॉन्च किया।


भारतीय डेटा, भारतीय सुरक्षा

राकेश वर्मा बताते हैं कि मेपमाइइंडिया का डेटा पूरी तरह भारत में ही स्टोर होता है और कंपनी यूजर डेटा को किसी विज्ञापन या व्यावसायिक उपयोग के लिए नहीं बेचती। यही चीज़ इसे अन्य वैश्विक कंपनियों से अलग बनाती है।

मेपमाइइंडिया केवल एक मोबाइल ऐप नहीं, बल्कि देश की ऑटोमोबाइल कंपनियों का भी टेक्नोलॉजी पार्टनर है। भारत में बिकने वाली लगभग 80 प्रतिशत कनेक्टेड कारों में मेपमाइइंडिया का नेविगेशन सिस्टम इनबिल्ट होता है


तकनीकी साझेदारी से लेकर सरकारी मान्यता तक का सफर

शुरुआती दौर में लावा, माइक्रोमैक्स जैसी मोबाइल कंपनियों ने मेपमाइइंडिया के मैप्स का उपयोग किया, लेकिन जैसे ही गूगल मैप्स स्मार्टफोन में डिफॉल्ट मैप बन गया, यह सहयोग खत्म हो गया।

इसके बाद मेपमाइइंडिया ने ऑटोमोबाइल सेक्टर की ओर रुख किया और आज देश के कई बड़े वाहन निर्माताओं के साथ साझेदारी में है।

2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद भारत की मैपिंग नीति में उदारीकरण हुआ। इसके परिणामस्वरूप 2021 में मेपमाइइंडिया का आईपीओ हुआ और यह एक लिस्टेड कंपनी बन गई।


गूगल की मार्केट मोनॉपली एक बड़ी चुनौती

राकेश वर्मा ने बताया कि गूगल की मार्केट मोनॉपली मेप्लस के विकास में सबसे बड़ी बाधा है। वे कहते हैं कि सरकार को पीएलआई स्कीम के तहत स्मार्टफोन कंपनियों को निर्देश देना चाहिए कि वे मेप्लस को एक वैकल्पिक ऐप के रूप में भी प्री-इंस्टॉल करें।

इसके अलावा, उन्होंने जोर देकर कहा कि उपयोगकर्ताओं को अपनी पसंद का मैप चुनने का विकल्प मिलना चाहिए। जैसे व्हाट्सएप या अन्य मैसेजिंग ऐप्स में लोकेशन शेयरिंग के लिए केवल गूगल मैप्स नहीं, बल्कि मेप्लस भी एक विकल्प के रूप में उपलब्ध हो।


डिजिटल इंडिया के लिए बड़ा कदम: ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचाने का अभियान

मेपमाइइंडिया अब अपने नेविगेशन सिस्टम को सिर्फ स्मार्टफोन तक सीमित नहीं रखकर फीचर फोन्स तक भी पहुंचाने का प्रयास कर रही है ताकि देश के ग्रामीण और छोटे कस्बों में भी लोग स्वदेशी ऐप का लाभ उठा सकें।

यह कदम डिजिटल इंडिया मिशन और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में स्वदेशी आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा।


केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का संदेश

केंद्रीय रेल और संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मेप्लस ऐप की जमकर तारीफ की और कहा:

“मेप्लस में कई बेहतरीन फीचर्स हैं। इसे जरूर ट्राई करें। यह स्वदेशी ऐप है, जो भारत को डिजिटल आत्मनिर्भरता की ओर आगे ले जाएगा।”


निष्कर्ष: मेप्लस भारत का नया डिजिटल ब्रांड बनने को तैयार

मेपमाइइंडिया का सपना है कि वह मेप्लस को भारत का डिजिटल ब्रांड बनाए जो न केवल देश में बल्कि विश्व स्तर पर पहचाना जाए।

राकेश वर्मा कहते हैं, “अब हमें सिर्फ बराबरी का मौका चाहिए। अगर सरकार, उद्योग और उपयोगकर्ता हमें चुनें तो मेप्लस न केवल गूगल मैप्स को टक्कर दे सकता है बल्कि दुनिया में भारत की डिजिटल ताकत का नया प्रतीक बन सकता है।”

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