अमेरिकी विज्ञापन में ‘मिस्टर सिंह’ पर बवाल, भारतीयों पर आरोप

Report By: Kiran Prakash Singh

अमेरिकी DHS के इमिग्रेशन विज्ञापन में ‘मिस्टर सिंह’ के इस्तेमाल पर विवाद छिड़ गया है। हिंदू और सिख संगठनों ने इसे भारतीयों की प्रोफाइलिंग बताया

Digital Live News | 10 सितंबर 2026 | digitallivenews.com

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अमेरिकी विज्ञापन में ‘मिस्टर सिंह’ पर बवाल, भारतीयों को निशाना बनाने का आरोप

DHS के विज्ञापन से शुरू हुआ विवाद

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन नीति को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग यानी DHS के एक आव्रजन प्रवर्तन विज्ञापन में ‘मिस्टर सिंह’ शब्द के इस्तेमाल पर हिंदू और सिख संगठनों ने सवाल उठाए हैं।

विज्ञापन को फिल्म ‘ट्रांसफॉर्मर्स’ की थीम पर तैयार किया गया है। इसमें ऑप्टिमस प्राइम को DHS के पैच के साथ दिखाया गया है। वह एक भूरे रंग के दाढ़ी वाले व्यक्ति को ‘मिस्टर सिंह’ कहकर संबोधित करता है और उसे अमेरिका की सड़कों से हटने तथा ड्राइविंग नहीं आने की बात कहता है।

इस विज्ञापन के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसकी भाषा और प्रस्तुति को लेकर बहस शुरू हो गई है।

‘सिंह’ नाम के इस्तेमाल पर उठे सवाल

विवाद की मुख्य वजह विज्ञापन में ‘सिंह’ उपनाम का इस्तेमाल बताया जा रहा है। सिंह नाम सिख समुदाय में व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है और कई अन्य भारतीय समुदायों में भी यह उपनाम पाया जाता है।

आलोचकों का कहना है कि अगर विज्ञापन का उद्देश्य केवल अवैध प्रवासियों को संदेश देना था, तो उसमें किसी ऐसे उपनाम का इस्तेमाल क्यों किया गया जो अमेरिका में रहने वाले बड़ी संख्या में भारतीय और सिख लोगों की पहचान से जुड़ा है।

इसी आधार पर कुछ संगठनों ने विज्ञापन पर नस्लीय प्रोफाइलिंग और भारतीय मूल के लोगों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। हालांकि DHS के विज्ञापन का घोषित उद्देश्य दस्तावेजविहीन प्रवासियों को लेकर प्रशासन की इमिग्रेशन नीति को बढ़ावा देना है।

AI वीडियो में ट्रक ड्राइवरों का भी जिक्र

DHS की ओर से एक छोटा AI-जनरेटेड वीडियो भी पोस्ट किया गया। इसमें ‘ट्रांसफॉर्मर्स’ के किरदार मेगाट्रॉन को कुछ विदेशी नागरिकों की रिहाई की मांग करते हुए दिखाया गया है।

वीडियो में जिन लोगों के नाम बताए गए हैं, उनमें हरजिंदर सिंह, राजिंदर कुमार, बेकजान बेशेकीव, अखरोर बोज़ोरोव और जसवीर सिंह शामिल हैं। पोस्ट में इन लोगों को सड़क हादसों और अन्य अपराधों से जोड़कर पेश किया गया।

DHS ने अपने संदेश में कहा कि जो लोग अमेरिका के प्रति शत्रुतापूर्ण इरादे से आते हैं, उनके खिलाफ देश अपनी रक्षा करेगा। विभाग ने इसे अमेरिकनिज्म और देश की सुरक्षा से जोड़कर पेश किया है।

हिंदू और सिख संगठनों ने जताई नाराजगी

विज्ञापन को लेकर हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन और सिख कोएलिशन समेत कई संगठनों ने सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई है।

हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने कहा कि सिंह नाम रखने वाले लोग हिंदू, सिख और अमेरिकी नागरिक भी हैं और उनका वाहन चलाना किसी विशेष समुदाय से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। संगठन ने विज्ञापन को लेकर नस्लीय और भारत विरोधी प्रोफाइलिंग के आरोप लगाए।

वहीं सिख कोएलिशन ने कहा कि 9/11 की घटना के 25 साल बाद भी सिख समुदाय को उनके हुलिए और पहचान के आधार पर निशाना बनाए जाने की चिंता बनी हुई है। संगठन ने कहा कि अमेरिका में बड़ी संख्या में सिखों का उपनाम सिंह है और यह उनकी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

‘Self-Deport’ अभियान के बीच बढ़ा विवाद

यह पूरा विवाद DHS के Self-Deport अभियान के बीच सामने आया है। अमेरिकी प्रशासन दस्तावेजविहीन और पात्र प्रवासियों को स्वेच्छा से अमेरिका छोड़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

इसके लिए CBP Home कार्यक्रम का भी प्रचार किया जा रहा है। विभाग के मुताबिक पात्र लोग अमेरिका छोड़ने की अपनी इच्छा दर्ज करा सकते हैं और उन्हें यात्रा में सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है। साथ ही कार्यक्रम के तहत 2,600 अमेरिकी डॉलर तक के एग्जिट बोनस का प्रावधान बताए जाने की बात सामने आई है।

इमिग्रेशन नीति को लेकर ट्रंप प्रशासन पहले भी सख्त रुख अपनाता रहा है। लेकिन इस बार विवाद का केंद्र नीति से ज्यादा विज्ञापन की भाषा और ‘मिस्टर सिंह’ जैसे संबोधन को बनाया गया है।

अब देखना होगा कि DHS इस विज्ञापन को लेकर उठे सवालों पर कोई सफाई देता है या नहीं। फिलहाल हिंदू और सिख संगठनों की आपत्ति के बाद यह मामला अमेरिका में भारतीय और सिख समुदाय की पहचान, इमिग्रेशन नीति और सरकारी प्रचार के तरीके को लेकर नई बहस का विषय बन गया है।

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