
Report By: Kiran Prakash Singh
दिल्ली हाईकोर्ट में CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने प्रदर्शन के उद्देश्य और शांति व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। दोनों को याचिका वापस लेने की अनुमति मिली।
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‘आप Gen Z नहीं हैं’, सौरव दास और आशुतोष रांका पर हाईकोर्ट की टिप्पणी
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दिल्ली हाईकोर्ट में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रदर्शन के उद्देश्य और शांति व्यवस्था को लेकर अहम टिप्पणियां की गईं। अदालत ने दोनों की उम्र पूछी और मिलेनियल्स तथा Gen Z के बीच अंतर को लेकर सवाल किया। इसके बाद अदालत ने टिप्पणी की कि दोनों Gen Z नहीं हैं।
दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की ओर से उनकी हिरासत की अवधि बढ़ाने के आदेश को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रदर्शन के बदलते उद्देश्य और उसमें शामिल संगठनों की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
1. कोर्ट ने मिलेनियल्स की उम्र को लेकर पूछा सवाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पूछा कि मिलेनियल्स किस उम्र के लोगों को कहा जाता है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं की उम्र पूछने के बाद कहा कि वे Gen Z नहीं हैं।
अदालत की टिप्पणी प्रदर्शन में शामिल लोगों की उम्र और आंदोलन की पृष्ठभूमि से जुड़े सवालों के बीच आई। सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि शुरुआत में प्रदर्शन में छात्र और बच्चे शामिल थे, लेकिन अब आंदोलन का उद्देश्य बदल गया है।
2. ‘लोग वही, लेकिन प्रदर्शन का मकसद बदल गया’
हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि प्रदर्शन में शामिल लोग और संगठन वही हैं, लेकिन अब आंदोलन का कारण बदल गया है। अदालत ने सवाल किया कि याचिकाकर्ता कौन हैं, उनका संगठन किस विचारधारा का प्रतिनिधित्व करता है और उसका उद्देश्य क्या है।
अदालत के मुताबिक, जब शांति और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो, तब इन पहलुओं पर विचार करना महत्वपूर्ण हो जाता है। खासकर तब, जब कोई संगठन अलग-अलग मुद्दों पर लोगों को एकजुट करता हो।
3. शांति व्यवस्था को लेकर अदालत ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पूछा कि जिन समूहों के मुद्दे और उद्देश्य समय के साथ बदलते रहते हैं, क्या मजिस्ट्रेट को शांति भंग होने की आशंका पर विचार करते समय इन पहलुओं को ध्यान में रखना चाहिए।
यह टिप्पणी प्रदर्शनकारियों की पहचान, संगठन की भूमिका और आंदोलन के उद्देश्य से जुड़े कानूनी सवालों के संदर्भ में की गई। अदालत के सामने मामला हिरासत की अवधि बढ़ाने के आदेश को चुनौती देने से संबंधित था।
4. सौरव दास और आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने सौरव दास और आशुतोष रांका को अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। अदालत ने साथ ही स्पष्ट किया कि याचिका वापस लेने के दौरान उसने मामले के गुण-दोष यानी मेरिट्स पर कोई राय नहीं दी है।
इसका अर्थ है कि अदालत की टिप्पणियों को मामले के अंतिम कानूनी निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। याचिका वापस लेने की अनुमति और मामले के गुण-दोष पर फैसला दो अलग-अलग बातें हैं।
5. अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर
CJP नेताओं की याचिका हिरासत की अवधि बढ़ाने के आदेश से जुड़ी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रदर्शन के उद्देश्य, संगठन की भूमिका और शांति व्यवस्था से संबंधित सवाल उठाए।
फिलहाल हाईकोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई राय दिए बिना याचिका वापस लेने की अनुमति दी है। आगे की कानूनी स्थिति संबंधित अधिकारियों और अदालतों की कार्यवाही पर निर्भर करेगी।
दिनांक: 21 अक्टूबर 2026
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