
Report By: Kiran Prakash Singh
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद आंदोलन तेज हो गया। अभिजीत दीपके ने भूख हड़ताल संभाली, जबकि 20 जुलाई के संसद मार्च की तैयारियां जारी हैं।
digitallivenews.com | 19 जुलाई 2026
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद आंदोलन तेज, अभिजीत दीपके ने संभाली भूख हड़ताल की कमान
अस्पताल ले जाने के बाद बढ़ा विवाद
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं और न्यायालय से जुड़े निर्देशों का हवाला देते हुए जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले गई। इसके बाद पूरे दिन आंदोलन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने मेडिकल रिपोर्ट और इलाज की प्रक्रिया पर सवाल उठाए तथा निजी अस्पताल में स्थानांतरण की मांग भी की।
डॉक्टरों ने जताई स्वास्थ्य को लेकर चिंता
सफदरजंग अस्पताल की ओर से जारी मेडिकल जानकारी के अनुसार, लंबे समय से जारी भूख हड़ताल के कारण वांगचुक में निर्जलीकरण और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का खतरा बना हुआ है। अस्पताल का कहना है कि डॉक्टर लगातार इलाज की सलाह दे रहे हैं और उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है। वहीं वांगचुक की टीम का कहना है कि वे अपनी इच्छा से आंदोलन स्थल पर लौटना चाहते हैं।
अभिजीत दीपके ने संभाली अनशन की जिम्मेदारी
वांगचुक के अस्पताल पहुंचने के बाद CJP (Cockroach Janta Party) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भूख हड़ताल जारी रखने का ऐलान किया। जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के दौरान उन पर स्याही फेंके जाने की घटना भी सामने आई, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया। आंदोलनकारी लगातार प्रदर्शन जारी रखने और अपनी मांगों पर सरकार से जवाब की मांग कर रहे हैं।
20 जुलाई के ‘चलो संसद’ मार्च की तैयारी
आंदोलन से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं ने 20 जुलाई को प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च को सफल बनाने की अपील की है। वांगचुक ने अस्पताल से जारी संदेश में इस मार्च को “भारत का दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन” बताते हुए लोगों से बड़ी संख्या में शामिल होने का आग्रह किया। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित मार्च को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और आगे की राह
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने की कार्रवाई पर कई विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए हैं और सरकार से संवाद की मांग की है। वहीं प्रशासन का कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को देखते हुए आवश्यक कदम उठाए गए। इस बीच मामला अदालत में भी विचाराधीन है और वांगचुक को निजी अस्पताल ले जाने संबंधी याचिका पर आगे की सुनवाई होनी है। फिलहाल सभी की नजर अदालत के अगले आदेश और 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च पर टिकी हुई है।