
Report By: Kiran Prakash Singh
दिल्ली जल बोर्ड STP मामले में पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को राउज एवेन्यू कोर्ट ने 2 लाख रुपये के मुचलके पर जमानत दी। ACB ने जमानत का विरोध किया था।
नई दिल्ली, 20 अगस्त 2026 | digitallivenews.com
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सत्येंद्र जैन को दिल्ली जल बोर्ड STP मामले में बड़ी राहत, कोर्ट से मिली जमानत
दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री और आम आदमी पार्टी नेता सत्येंद्र जैन को दिल्ली जल बोर्ड से जुड़े कथित STP घोटाले के मामले में बड़ी राहत मिली है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें 2 लाख रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी है। जैन को दिल्ली जल बोर्ड की सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट परियोजनाओं की टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा यानी ACB ने गिरफ्तार किया था।
जमानत पर सुनवाई के दौरान सत्येंद्र जैन की ओर से उनके वकील ने गिरफ्तारी के समय और जांच की प्रक्रिया को लेकर कई दलीलें अदालत के सामने रखीं। वहीं ACB ने जमानत का विरोध करते हुए जैन के खिलाफ गंभीर आरोपों का हवाला दिया।
27 महीने बाद हुई गिरफ्तारी पर उठाए सवाल
सत्येंद्र जैन के वकील एन. हरिहरन ने अदालत में दलील दी कि मामले के दर्ज होने के करीब 27 महीने बाद जैन की गिरफ्तारी की गई। बचाव पक्ष के अनुसार इस दौरान जांच एजेंसी ने उन्हें केवल एक बार पूछताछ के लिए बुलाया था।
वकील ने कहा कि जब उन्हें दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया गया, तब उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी की आवश्यकता और जांच के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।
उनकी ओर से यह भी कहा गया कि मामले से संबंधित अधिकांश सामग्री दस्तावेजी प्रकृति की है और जांच एजेंसियां पहले ही जरूरी दस्तावेज अपने कब्जे में ले चुकी हैं।
बचाव पक्ष ने कहा- दस्तावेज पहले ही जांच एजेंसी के पास
जमानत की मांग करते हुए सत्येंद्र जैन के वकील ने कहा कि मामले से संबंधित प्रासंगिक दस्तावेज जांच एजेंसियों के कब्जे में हैं। ऐसे में आरोपी को हिरासत में रखने की आवश्यकता पर बचाव पक्ष ने सवाल उठाया।
वकील की दलील थी कि जब जांच से संबंधित महत्वपूर्ण सामग्री पहले ही एजेंसी के पास मौजूद है, तो जमानत देने से जांच प्रभावित होने की आशंका नहीं होनी चाहिए।
अदालत के सामने बचाव पक्ष ने जैन की गिरफ्तारी के समय और मामले की जांच की प्रगति को भी अपनी दलीलों का हिस्सा बनाया।
ACB ने जमानत का किया विरोध
दूसरी ओर भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने सत्येंद्र जैन की जमानत याचिका का विरोध किया। जांच एजेंसी ने अदालत के समक्ष जैन को आदतन अपराधी बताते हुए कहा कि जमानत पर फैसला करते समय इस पहलू को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
ACB का कहना था कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को जमानत देने से पहले जांच से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार किया जाना जरूरी है।
इस मामले में जांच एजेंसी ने कथित टेंडर अनियमितताओं और अन्य आरोपों को लेकर अपनी आपत्तियां अदालत के सामने रखीं।
टेंडर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी का मामला
यह मामला दिल्ली जल बोर्ड की सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट परियोजनाओं से जुड़ा है। मामला मई 2024 में दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था।
आरोपों के अनुसार STP परियोजनाओं के उन्नयन से जुड़े ठेकों में कथित तौर पर टेंडर की शर्तों में हेरफेर, आपराधिक साजिश और संदिग्ध रिश्वत भुगतान जैसी अनियमितताओं की जांच की जा रही है।
जांच एजेंसी ने मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की है।
गिरफ्तारी के बाद अब जमानत से मिली राहत
सत्येंद्र जैन को इस मामले में 18 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी को लेकर अदालत में कानूनी प्रक्रिया चली। इससे पहले 19 अगस्त को अदालत ने उनकी गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने से इनकार कर दिया था।
अब गुरुवार को राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें 2 लाख रुपये के मुचलके पर जमानत देने का आदेश दिया है। अदालत के इस फैसले से जैन को तत्काल राहत मिली है।
हालांकि जमानत मिलने का अर्थ मामले में आरोपों से बरी होना नहीं है। मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। अब जांच एजेंसी द्वारा जुटाए गए दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
सत्येंद्र जैन की जमानत के बाद दिल्ली की राजनीति में भी इस मामले को लेकर बयानबाजी तेज होने की संभावना है। दिल्ली जल बोर्ड की STP परियोजनाओं से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और टेंडर प्रक्रिया पर आने वाले दिनों में जांच की दिशा महत्वपूर्ण रहेगी।
20 अगस्त 2026 | digitallivenews.com