मंडियों में आलू के दामों में तेज गिरावट

Report By: Kiran Prakash Singh

मंडी में आलू के भाव में भारी गिरावट: किसानों की मुश्किलें बढ़ीं, खुदरा बाजार में भी सस्ती बिक्री

देशभर की मंडियों में आलू के थोक और खुदरा भाव में भारी गिरावट से किसान परेशान हैं। पुराना स्टॉक और बंपर पैदावार कीमतों पर दबाव बना रहे हैं।

नई दिल्ली (Digitallivenews)। देशभर की मंडियों में आलू के दाम इस सीजन की शुरुआत होते ही तेजी से गिरने लगे हैं। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि कई किसानों को अपनी लागत भी नहीं मिल पा रही है। कीमतों में भारी गिरावट से परेशान किसान मजबूरी में अपनी उपज सड़कों पर फेंकने को विवश हो रहे हैं।

मंडियों में थोक भाव में गिरावट

विशेषज्ञों के अनुसार आलू के दाम गिरने का मुख्य कारण पिछले साल का भारी स्टॉक है, जो अब भी कोल्ड स्टोरेज में पड़ा हुआ है। इसके अलावा अनुकूल मौसम के चलते इस साल भी आलू की बंपर पैदावार की संभावना जताई जा रही है। पुराना आलू खराब होने के डर से बाजार में उतारा जा रहा है, वहीं नए आलू की आवक लगातार बढ़ रही है। इससे मंडियों में सप्लाई, मांग से कहीं अधिक हो गई है।

उत्तर प्रदेश की प्रमुख मंडी आगरा में आलू के थोक भाव इस महीने में 900-1,250 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर 500-650 रुपये प्रति क्विंटल रह गए हैं। पश्चिम बंगाल की कोलकाता मंडी में भाव 1,500-1,550 रुपये से गिरकर 1,100-1,200 रुपये प्रति क्विंटल हो गए हैं। इसी तरह मध्य प्रदेश की इंदौर मंडी और दिल्ली की मंडियों में भी थोक भाव 300–900 रुपये प्रति क्विंटल तक लुढ़क गए हैं।

खुदरा बाजार में भी महसूस हुई गिरावट

मंडी में कीमतों में गिरावट का असर खुदरा बाजार पर भी पड़ा है। जहां पिछले महीने आलू 20-25 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, अब इसकी कीमत घटकर 13-20 रुपये प्रति किलो रह गई है। साधारण आलू अब 5-6 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। यह स्थिति उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर हो सकती है, लेकिन किसानों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है।

किसानों की मुश्किलें और आशा

किसानों का कहना है कि लगातार गिरती कीमतों ने उनकी आमदनी पर बड़ा असर डाला है। कई किसानों को मजबूरी में उपज बेकार न होने देने के लिए सड़कों पर फेंकनी पड़ रही है। वहीं कारोबारियों का मानना है कि इस महीने आलू के दाम दबाव में रह सकते हैं, लेकिन जैसे-जैसे आवक घटेगी, अगले महीने से कीमतों में सुधार की संभावना है।

क्या है समाधान?

विशेषज्ञों का सुझाव है कि कोल्ड स्टोरेज में पड़े पुराने आलू का धीरे-धीरे रिलीज करना और नई पैदावार को नियंत्रित तरीके से बाजार में उतारना ही कीमतों को संतुलित रख सकता है। इसके अलावा किसानों को सरकारी मंडियों और आउटलेट्स के माध्यम से बेहतर मूल्य प्राप्त करने के विकल्प अपनाने चाहिए।

इस समय की स्थिति दर्शाती है कि आलू के उत्पादन और बाजार प्रबंधन में संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है। बंपर पैदावार के बावजूद अगर मार्केटिंग और सप्लाई पर नियंत्रण नहीं होगा, तो किसानों की मुश्किलें बढ़ती रहेंगी। इसलिए आवश्यक है कि राज्य और केंद्र सरकार मिलकर किसानों को उचित मूल्य दिलाने और मार्केट स्थिर रखने के उपाय करें।

यह कहानी न सिर्फ किसानों की वर्तमान चुनौतियों को दिखाती है, बल्कि यह भी बताती है कि बाजार की आपूर्ति और मांग के संतुलन को बनाए रखना किस हद तक जरूरी है। 🥔📉

Also Read

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में एक बार फिर से वक्फ कानून के खिलाफ हिंसा भड़क उठी

फर्र्हाना भट्ट बोलीं—खामेनेई दिलों में जिंदा रहेंगे

KBC में अमिताभ बच्चन हुए भावुक, धर्मेंद्र को याद कर छलके आंसू

पुणे में ड्रेनेज टैंक बना मौत का जाल, 3 मजदूरों की दर्दनाक मौत

हैदराबाद में Kingfisher बियर में मछली मिलने से हड़कंप

You Might Also Like

दृश्यम 3 का हिंदी वर्जन होगा मलयालम फिल्म से अलग

IPL 2026: KKR-RCB महामुकाबले में किसका पलड़ा भारी?

IPL 2026 में सबसे ज्यादा चौके लगाने वाले टॉप बल्लेबाज

तमिलनाडु में TVK को समर्थन, दिनाकरण की बढ़ी मुश्किल

चंद्रनाथ रथ हत्याकांड की जांच अब CBI के हवाले

गुरुग्राम दुष्कर्म केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश

कांग्रेस से BJP तक, जानिए हिमंत सरमा का पूरा सफर

NEET UG 2026 रद्द, पेपर लीक पर सियासत हुई तेज

Select Your City