
Report By: Kiran Prakash Singh
बारिश का कहर: कई राज्यों में तबाही, PM मोदी करेंगे नुकसान का जायजा, राहत पैकेज की उम्मीद
नई दिल्ली (Digitallivenews)।
देश के उत्तर भारत में लगातार हो रही मूसलधार बारिश ने प्राकृतिक आपदा का रूप ले लिया है। पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और हरियाणा जैसे राज्यों में भारी बारिश, भूस्खलन और बाढ़ ने जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। अब तक 500 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, सैकड़ों घायल हैं और हजारों लोग अपने घरों से बेघर हो गए हैं। इन हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इन राज्यों के नुकसान का जायजा लेने की तैयारी में हैं। उनके दौरे के बाद बड़ी राहत घोषणाओं की उम्मीद की जा रही है।
हिमाचल में सबसे ज्यादा तबाही
हिमाचल प्रदेश इस तबाही से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। मंडी, कांगड़ा, शिमला और कुल्लू जिलों में कई मकान ढह गए हैं, सड़कें बह गई हैं और पुल टूट चुके हैं। भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ ने कई गांवों को पूरी तरह अलग-थलग कर दिया है। हजारों लोग राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इसे दशकों की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदा बताया है और केंद्र सरकार से विशेष राहत पैकेज की मांग की है। उन्होंने कहा:
“राज्य का इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह चरमरा गया है। हमें केंद्र से तात्कालिक और दीर्घकालिक मदद की ज़रूरत है।”
जम्मू-कश्मीर में फट पड़ी नदियां
जम्मू क्षेत्र में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। भूस्खलन और बाढ़ ने कई गांवों को चपेट में ले लिया है। सड़कों के अवरुद्ध होने के चलते कई क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाना मुश्किल हो गया है। सेना और NDRF की टीमें मोर्चे पर डटी हुई हैं। पुंछ, रामबन और उधमपुर में दर्जनों मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं। कई लोग अब भी मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है।
पंजाब-हरियाणा में फसलें तबाह, किसानों को बड़ा झटका
पंजाब के रोपड़, होशियारपुर और फिरोजपुर जैसे जिलों में नदियों का पानी रिहायशी इलाकों में घुस गया है। सैकड़ों गांव जलमग्न हो चुके हैं, और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। वहीं, हरियाणा के यमुनानगर, करनाल और पानीपत जिलों में खेत पानी में डूब गए हैं, जिससे खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं। किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
खाली हुए होटल, टूरिज्म सेक्टर को तगड़ा झटका
शिमला, मनाली, धर्मशाला जैसे लोकप्रिय हिल स्टेशन अब पर्यटकों से खाली हो गए हैं। हजारों पर्यटक समय से पहले लौट चुके हैं, जिससे होटल और टूरिज्म व्यवसाय को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ा है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यह सीजन हमेशा उनके लिए मुनाफे का होता है, लेकिन इस बार प्राकृतिक आपदा ने पूरी कमाई छीन ली।
पीएम मोदी की नजर हालात पर, हो सकती है बड़ी घोषणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही मन की बात कार्यक्रम में चिंता जताते हुए बाढ़ और आपदा में मारे गए लोगों के प्रति शोक और संवेदना व्यक्त कर चुके हैं। उन्होंने कहा:
“राहत कार्यों में जुटी टीमें पूरी ताकत से काम कर रही हैं। केंद्र हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है।”
अब माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी खुद ग्राउंड पर जाकर हालात का जायजा लेंगे, जिसके बाद केंद्र सरकार की ओर से विशेष राहत पैकेज की घोषणा की जा सकती है।
राहत-बचाव कार्य जारी
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय एजेंसियां युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्यों में लगी हुई हैं। अब तक हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। कई इलाकों में अस्थायी पुल और राहत कैंप बनाए गए हैं। इसके बावजूद, टूटे संपर्क साधन और मौसम की मार राहत कार्यों को चुनौतीपूर्ण बना रही है।
निष्कर्ष
देश इस समय एक बड़े प्राकृतिक संकट से जूझ रहा है। जिन इलाकों में लोग कभी सुकून के लिए जाते थे, आज वहां तबाही का मंजर है। हालात के सुधरने के लिए जहां मौसम के अनुकूल होने की प्रार्थना की जा रही है, वहीं केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर राहत देने की दिशा में प्रयासरत हैं। आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री के दौरे और केंद्र की मदद से पीड़ितों को राहत मिलने की उम्मीद की जा रही है।