दिल्ली कोर्ट ने केजरीवाल और 22 आरोपियों को बरी, CBI के “साउथ ग्रुप” लेबल पर जताई आपत्ति

Report By: Kiran Prakash Singh

दिल्ली कोर्ट ने केजरीवाल और 22 आरोपियों को आबकारी नीति मामले में बरी किया; CBI के “साउथ ग्रुप” लेबल पर अदालत ने गंभीर आपत्ति जताई।

दिल्ली कोर्ट ने केजरीवाल और 22 अन्य आरोपियों को बरी किया, CBI के “साउथ ग्रुप” लेबल पर जताई आपत्ति

दिल्ली (digitallivenews) :-  की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को आम आदमी पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal और 22 अन्य आरोपियों को आबकारी नीति मामले में बरी कर दिया। अदालत ने खासकर CBI की “साउथ ग्रुप” जैसी लेबलिंग को कानूनी आधारहीन और अनुचित करार दिया।

न्यायालय ने कहा: “कानूनी आधार नहीं, केवल क्षेत्रीय पहचान पर निशाना”

विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने कहा कि CBI द्वारा दक्षिण भारतीय कारोबारियों को इस लेबल से संबोधित करना मनमाना और संवैधानिक दृष्टि से गलत है। न्यायालय ने नोट किया कि यदि यही चार्जशीट चेन्नई की अदालत में होती, तो इसे “आपत्तिजनक” माना जाता।

कोर्ट ने यह भी बताया कि अन्य आरोपियों के लिए किसी क्षेत्रीय लेबल का इस्तेमाल नहीं किया गया, जिससे यह स्पष्ट पूर्वाग्रह साबित होता है। न्यायालय ने जोर दिया कि अपराध का परीक्षण हमेशा साक्ष्य आधारित होना चाहिए, न कि किसी की क्षेत्रीय या जातीय पहचान पर।

US केस का हवाला: पहचान-आधारित लेबलिंग गलत

अदालत ने अमेरिकी मामले United States v. Cabrera (2000) का उदाहरण दिया, जिसमें “डोमिनिकन ड्रग डीलर्स” जैसी लेबलिंग के कारण दोषसिद्धि रद्द कर दी गई थी। कोर्ट ने कहा:

“क्रिमिनल ट्रायल इस बात पर आधारित होना चाहिए कि आरोपी ने क्या किया, न कि वह कौन है।”

कौन था “साउथ ग्रुप”?

CBI और ED ने “साउथ ग्रुप” शब्द उन शराब कारोबारियों के लिए इस्तेमाल किया, जिन्हें कथित तौर पर दिल्ली की 2021-22 आबकारी नीति में अनुकूलता देने के लिए रिश्वत दी गई थी। आरोप था कि पैसे हवाला और शेल कंपनियों के माध्यम से गोवा चुनाव अभियान में गए।

K Kavitha भी बरी, कहा राजनीतिक बदला

इस मामले में एक प्रमुख नाम K Kavitha का था। उन्हें मार्च 2024 में ED ने गिरफ्तार किया था और कई महीनों तक हिरासत में रखा गया। शुक्रवार को अदालत ने उन्हें भी बरी कर दिया।

कविता ने इसे राजनीतिक बदले की कोशिश बताया और पूछा,

“मेरे बच्चों और परिवार के साथ खोए समय का हिसाब कौन देगा?”

उनके वकील ने कहा कि मुख्य अपराध खत्म होने के बाद मनी लॉन्ड्रिंग केस पर भी असर पड़ेगा।

कोर्ट ने कहा: साक्ष्य न होने पर केस टिक नहीं सकता

अदालत ने कहा कि चार्जशीट में कोई ठोस साक्ष्य नहीं थे और कई कानूनी खामियां थीं। उन्होंने चेताया कि “अपरोक्ष गवाहों” की गवाही का उपयोग अन्य आरोपियों को फंसाने के लिए करना संवैधानिक रूप से गलत है।

अगला कदम: CBI हाईकोर्ट में चुनौती दे सकती है

CBI ने राउज़ एवेन्यू कोर्ट के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देने का निर्णय लिया है। इस मामले ने न केवल कानूनी प्रक्रिया, बल्कि राजनीतिक और संवैधानिक संदेश भी दिया कि कानून के सामने सभी बराबर हैं और जांच एजेंसियों को निष्पक्ष होना चाहिए।

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