
Report By: Kiran Prakash Singh
वंदे मातरम के दो अंतरे गाने के कांग्रेस के फैसले पर सियासी घमासान जारी है। गुरदीप सप्पल ने कहा, पार्टी गांधी-नेहरू और बोस के फैसले पर चलेगी।
आज की तारीख: 20 अगस्त 2026
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वंदे मातरम पर सियासी संग्राम, कांग्रेस ने अपने फैसले का किया बचाव
वंदे मातरम को लेकर देश की राजनीति में जारी बहस के बीच कांग्रेस नेताओं ने अपने फैसले का बचाव किया है। कांग्रेस ने अपने कार्यक्रमों में वंदे मातरम के दो अंतरे गाने का फैसला किया है। इस फैसले पर बीजेपी की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लिए गए ऐतिहासिक फैसले के अनुरूप आगे बढ़ रही है।
कांग्रेस नेता गुरदीप सिंह सप्पल ने कहा कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने किसी पुराने फैसले को महज स्वीकार नहीं किया, बल्कि उसी ऐतिहासिक निर्णय के आधार पर आगे बढ़ने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और मौलाना अबुल कलाम आजाद जैसे नेताओं ने वंदे मातरम को लेकर जो निर्णय लिया था, कांग्रेस उसी रास्ते पर चलेगी।
गुरदीप सप्पल ने बीजेपी पर साधा निशाना
गुरदीप सिंह सप्पल ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि आजादी के दौर में जिन नेताओं ने देश के स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका निभाई, उनके फैसलों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय कांग्रेस के नेता स्वतंत्रता आंदोलन और ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे।
सप्पल ने यह भी दावा किया कि उस दौर में हिंदू महासभा और मुस्लिम लीग के बीच राजनीतिक सहयोग रहा था। उन्होंने इसी संदर्भ में बीजेपी पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब कांग्रेस को देशभक्ति का पाठ पढ़ाया जा रहा है, जबकि कांग्रेस का दावा है कि उसने स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
‘वंदे मातरम कांग्रेस का गीत 1896 से है’
कांग्रेस नेता ने कहा कि वंदे मातरम का कांग्रेस से संबंध नया नहीं है। उनके मुताबिक, कांग्रेस ने 1896 में वंदे मातरम को अपनाया था और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत राष्ट्रीय चेतना का हिस्सा रहा।
सप्पल ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कांग्रेस के कार्यकर्ता जेल गए और आंदोलन में हिस्सा लिया। उनके मुताबिक, उस दौर में वंदे मातरम का नारा भी लगाया जाता था। उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह इस ऐतिहासिक नारे का इस्तेमाल देश को बांटने के लिए करना चाहती है।
हालांकि कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी वंदे मातरम को देश को जोड़ने वाला नारा मानती है और इसके ऐतिहासिक महत्व को बनाए रखने के पक्ष में है।
शकील अहमद खान ने भी फैसले का समर्थन किया
कांग्रेस नेता शकील अहमद खान ने भी पार्टी के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस वर्किंग कमेटी पार्टी की सर्वोच्च और सम्मानित संस्थाओं में से एक है और इसके फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि रविंद्रनाथ टैगोर, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस और राजेंद्र प्रसाद जैसे नेताओं के विचारों और निर्णयों को ध्यान में रखना जरूरी है। उनके मुताबिक, इन नेताओं ने जिस व्यवस्था को स्वीकार किया था, कांग्रेस उसी का पालन करेगी।
बीजेपी-कांग्रेस के बीच बढ़ी राजनीतिक बहस
वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस के फैसले के बाद बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने हैं। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस का फैसला राष्ट्रगीत के सम्मान से जुड़ी भावनाओं को ठेस पहुंचाता है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि पार्टी ऐतिहासिक नेताओं के निर्णय और स्वतंत्रता आंदोलन की परंपरा का पालन कर रही है।
इस विवाद ने राष्ट्रगीत, इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। दोनों दल अपने-अपने तर्कों के जरिए जनता के सामने अपना पक्ष रख रहे हैं।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वंदे मातरम का इस्तेमाल राजनीतिक विवाद के बजाय राष्ट्रीय एकता और सद्भावना के संदर्भ में होना चाहिए। वहीं बीजेपी की ओर से कांग्रेस के फैसले को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।
फिलहाल वंदे मातरम को लेकर शुरू हुआ यह विवाद केवल गीत के अंतरों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसके साथ इतिहास, राष्ट्रवाद और राजनीतिक विरासत जैसे मुद्दे भी जुड़ गए हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
डिजिटल लाइव न्यूज | 20 अगस्त 2026
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