
Report By: Kiran Prakash Singh
तमिलनाडु विधानसभा में MISA और सरकरिया आयोग के जिक्र पर DMK विधायकों ने हंगामा किया। स्पीकर के आदेश पर मार्शलों ने विधायकों को सदन से बाहर किया।
Digital Live News | 8 सितंबर 2026 | digitallivenews.com
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तमिलनाडु विधानसभा में MISA और भ्रष्टाचार के आरोपों पर घमासान
तमिलनाडु विधानसभा में मंगलवार को MISA, सरकरिया आयोग और पूर्व DMK सरकार से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर टकराव हुआ। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के सोमवार के भाषण में किए गए कुछ संदर्भों पर मुख्य विपक्षी दल DMK ने कड़ी आपत्ति जताई। पार्टी ने मुख्यमंत्री के बयान के संबंधित हिस्सों को विधानसभा रिकॉर्ड से हटाने की मांग की।
मामला बढ़ने पर DMK विधायकों ने सदन के भीतर नारेबाजी शुरू कर दी और स्पीकर के पोडियम के सामने पहुंच गए। लगातार विरोध के बाद विधानसभा अध्यक्ष JCD प्रभाकर ने मार्शलों और वॉच एंड वार्ड स्टाफ को कार्रवाई का निर्देश दिया। इसके बाद विरोध कर रहे DMK विधायकों को सदन से बाहर निकाल दिया गया।
MISA और सरकरिया आयोग के जिक्र पर DMK नाराज
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही DMK के सचेतक ईवी वेलु ने मुख्यमंत्री विजय के पिछले दिन के भाषण में MISA और सरकरिया आयोग के संदर्भों पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के भाषण के संबंधित हिस्सों को विधानसभा के रिकॉर्ड से हटाया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री विजय ने पूर्व DMK सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए ED के दस्तावेज का हवाला दिया था। उनके मुताबिक ठेकेदारों से कथित तौर पर ठेकों की रकम का एक हिस्सा पार्टी फंड के रूप में देने के लिए कहा जाता था। उन्होंने नगर प्रशासन एवं जल आपूर्ति विभाग से जुड़े ठेकों और वीरानम जल योजना का भी जिक्र किया था।
DMK ने रिकॉर्ड से बयान हटाने की मांग की
ईवी वेलु ने मुख्यमंत्री के बयानों को विधानसभा के नियमों के खिलाफ बताते हुए उन्हें रिकॉर्ड से हटाने की मांग की। DMK विधायकों ने उनके साथ खड़े होते हुए सदन में विरोध और नारेबाजी शुरू कर दी।
वहीं, कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार ने मुख्यमंत्री के बयान का बचाव किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने जिन बातों का उल्लेख किया, वे सरकरिया आयोग की रिपोर्ट और आधिकारिक ED दस्तावेजों में उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं। सत्तापक्ष ने पूर्व DMK सरकार से जुड़े आरोपों को भी दोहराया।
स्पीकर ने बयान हटाने से किया इनकार
DMK की मांग पर विधानसभा अध्यक्ष JCD प्रभाकर ने मुख्यमंत्री के बयान को रिकॉर्ड से हटाने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने ऐसी जानकारियों का उल्लेख किया है, जो पहले से सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं।
स्पीकर ने MISA के तहत पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की गिरफ्तारी और विधानसभा में पहले हुई सरकरिया आयोग से संबंधित चर्चाओं का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि मुख्यमंत्री के भाषण में ऐसा कुछ नहीं था, जिसे विधानसभा रिकॉर्ड से हटाने की जरूरत पड़े।
नारेबाजी के बाद मार्शलों ने संभाला मोर्चा
स्पीकर के फैसले के बावजूद DMK विधायकों का विरोध जारी रहा। विधायक नारे लगाते हुए स्पीकर के पोडियम के सामने पहुंच गए। इस दौरान सदन में काफी हंगामा हुआ।
स्पीकर ने प्रदर्शन कर रहे विधायकों को अपनी सीटों पर लौटने के लिए एक मिनट का समय दिया। उन्होंने कहा कि यदि विधायक वापस अपनी सीटों पर लौटते हैं तो KN नेहरू या ईवी वेलु को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा। हालांकि, DMK विधायक पीछे नहीं हटे।
विरोध के दौरान पोस्टर लाने को लेकर भी स्पीकर ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उनकी अनुमति के बिना सदन में पोस्टर लाए गए और उनके निर्देशों का पालन नहीं किया गया।
DMK विधायकों को सदन से बाहर निकाला गया
लगातार नारेबाजी और विरोध के बाद सदन के नेता केए सेंगोट्टैयन ने नियमों के तहत कार्रवाई की मांग की। इसके बाद स्पीकर ने विधानसभा मार्शलों और वॉच एंड वार्ड स्टाफ को विरोध कर रहे DMK विधायकों को सदन से बाहर निकालने का निर्देश दिया।
मार्शलों ने प्रदर्शनकारी विधायकों को विधानसभा हॉल से बाहर कर दिया। बाहर ले जाए जाते समय भी DMK विधायकों की नारेबाजी जारी रही। बाद में DMK नेताओं और विधायकों ने स्पीकर के चैंबर के बाहर धरना भी दिया।
पूरे घटनाक्रम ने तमिलनाडु की राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव को सामने ला दिया। एक तरफ DMK ने मुख्यमंत्री के बयानों को रिकॉर्ड से हटाने की मांग की, वहीं सत्तापक्ष ने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने केवल आधिकारिक दस्तावेजों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी का उल्लेख किया है।
Digital Live News | 8 सितंबर 2026 | digitallivenews.com