SC-ST एक्ट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी, कार्रवाई रद्द

Report By: Kiran Prakahs Singh

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल SC/ST समुदाय से होने के आधार पर एक्ट लागू नहीं होता। जाति के कारण जानबूझकर अपमान या उत्पीड़न साबित होना जरूरी है।

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SC-ST एक्ट को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट से जुड़े एक मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि केवल किसी व्यक्ति के अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य होने से एक्ट की धाराएं अपने आप लागू नहीं हो जातीं। कोर्ट के अनुसार, कानून के तहत अपराध के लिए यह सामने आना जरूरी है कि आरोपी ने पीड़ित को उसकी जाति के कारण जानबूझकर अपमानित या प्रताड़ित किया।

मामला गाजियाबाद में जमीन के लेनदेन से जुड़ा बताया गया है। आरोपी राजू कुरैशी उर्फ उमरदराज के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट की धाराओं में कार्रवाई चल रही थी। आरोपी की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इस कार्रवाई को चुनौती दी गई थी।

केवल जाति के आधार पर नहीं लगेगा एक्ट

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड और आरोपों का परीक्षण किया। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति की जाति अपने आप में एससी/एसटी एक्ट के तहत अपराध स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

अपराध के लिए यह भी दिखना चाहिए कि आरोपी की ओर से जाति के आधार पर अपमान या उत्पीड़न का जानबूझकर किया गया कृत्य हुआ है। कोर्ट की इस टिप्पणी को एससी/एसटी एक्ट के प्रावधानों के इस्तेमाल को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आरोपी के खिलाफ कार्रवाई हुई निरस्त

मामले में न्यायमूर्ति संतोष राय की एकलपीठ ने आरोपों और उपलब्ध रिकॉर्ड को देखने के बाद आरोपी के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत चल रही कार्यवाही को निरस्त कर दिया।

कोर्ट के मुताबिक, केवल पीड़ित के अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से संबंधित होने के आधार पर किसी मामले में एक्ट की धाराएं नहीं लगाई जा सकतीं। कानून में निर्धारित आवश्यक तत्वों का मौजूद होना जरूरी है।

पुलिस हिरासत में मारपीट पर हाईकोर्ट सख्त

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले में पुलिस हिरासत में आरोपी के साथ मारपीट को लेकर भी सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि किसी आरोपी को हिरासत में पीटना पुलिस की ड्यूटी का हिस्सा नहीं हो सकता।

कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर हिरासत में आरोपी के साथ मारपीट को उचित नहीं ठहराया जा सकता। पुलिस को कानून के दायरे में रहकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होता है।

ड्यूटी के दौरान ऐसा कृत्य स्वीकार्य नहीं

दूसरे मामले में कोर्ट ने हिरासत में आरोपी के साथ कथित मारपीट को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने कहा कि ड्यूटी के दौरान किया गया ऐसा कृत्य किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता।

इसी मामले में न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की एकलपीठ ने बांदा में तैनात रही शिवानी जोशी समेत तीन पुलिसकर्मियों की ओर से दाखिल डिस्चार्ज एप्लीकेशन पर सुनवाई की। अदालत की टिप्पणी पुलिस हिरासत में आरोपियों के साथ व्यवहार को लेकर सख्त न्यायिक रुख को दर्शाती है।

दो मामलों में कोर्ट का स्पष्ट संदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट की इन दोनों मामलों में की गई टिप्पणियों में कानून के पालन पर जोर दिया गया है। एक मामले में कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट के प्रावधानों को लागू करने के लिए जातिगत अपमान या उत्पीड़न के आवश्यक तत्व मौजूद होने की बात कही।

वहीं दूसरे मामले में पुलिस हिरासत के दौरान आरोपी के साथ मारपीट को लेकर अदालत ने सख्त रुख अपनाया। कोर्ट की टिप्पणियां इस बात पर जोर देती हैं कि कानूनी कार्रवाई निर्धारित प्रावधानों और प्रक्रिया के अनुसार ही होनी चाहिए।

इन फैसलों से जुड़े मामलों में हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड और आरोपों के आधार पर अपना रुख स्पष्ट किया है। ऐसे में दोनों टिप्पणियां संबंधित कानूनी प्रावधानों और पुलिस कार्रवाई के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

आज की तारीख: 12 सितंबर 2026
digitallivenews.com

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