
Report By: Kiran Prakash Singh
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होगा। BJP के सत्ता में आने के बाद ये दोनों सीटें सरकार और विपक्ष के लिए अहम परीक्षा हैं।
———————————————————————————————————————————————————————————-
नंदीग्राम और रेजीनगर में कल उपचुनाव, साख की लड़ाई
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर मंगलवार, 6 अक्टूबर को उपचुनाव के लिए मतदान होगा। दोनों सीटों पर चुनाव प्रचार रविवार शाम समाप्त हो गया। वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को होगी। चुनाव आयोग ने दोनों सीटों के लिए 6 अक्टूबर को मतदान और 9 अक्टूबर को मतगणना की तारीख तय की है।
ये उपचुनाव इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में BJP पहली बार सत्ता में आई है। ऐसे में नंदीग्राम और रेजीनगर के नतीजे सरकार के शुरुआती कार्यकाल को लेकर मतदाताओं के रुझान का संकेत दे सकते हैं। हालांकि, उपचुनाव के नतीजों को सरकार के कामकाज पर अंतिम जनादेश मानना उचित नहीं होगा।
1. नंदीग्राम में BJP के सामने चुनौती
नंदीग्राम का मुकाबला राजनीतिक और प्रतीकात्मक दोनों लिहाज से अहम माना जा रहा है। यह वही क्षेत्र है जहां भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने 2011 में TMC के उभार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 2021 में शुभेंदु अधिकारी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को नंदीग्राम से हराया था।
2026 के विधानसभा चुनाव में भी अधिकारी ने नंदीग्राम सीट जीती थी, लेकिन उन्होंने भवानीपुर सीट अपने पास रखने का फैसला किया। इसी वजह से नंदीग्राम सीट खाली हुई और उपचुनाव की जरूरत पड़ी।
BJP ने यहां हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। वह शुभेंदु अधिकारी के दिवंगत सहयोगी चंद्रनाथ रथ की मां हैं। मई में चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद हसीरानी रथ की उम्मीदवारी ने मुकाबले में भावनात्मक पहलू भी जोड़ दिया है।
2. ममता बनर्जी का कांग्रेस को समर्थन
नंदीग्राम में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट ने पहले संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया था। बाद में उनके नाम वापस लेने के बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन दिया। इस घटनाक्रम ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।
मिलन प्रधान को पुराने मामलों में गिरफ्तार किए जाने के बाद चुनाव प्रचार में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। हालांकि, कलकत्ता हाई कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद वह दोबारा प्रचार में सक्रिय हुए।
इस तरह नंदीग्राम में मुकाबला केवल BJP और कांग्रेस के बीच सीधा चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि विपक्षी रणनीति और TMC-कांग्रेस तालमेल की भी परीक्षा बन गया है।
3. रेजीनगर में कई दल आमने-सामने
रेजीनगर का चुनावी समीकरण नंदीग्राम से अलग है। 2026 के विधानसभा चुनाव में हुमायूं कबीर ने रेजीनगर और नौदा दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी। बाद में उन्होंने नौदा सीट अपने पास रखी, जिसके कारण रेजीनगर सीट खाली हुई और यहां उपचुनाव कराया जा रहा है।
BJP ने रेजीनगर से सखराव सरकार को उम्मीदवार बनाया है, जबकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट ने रबीउल आलम चौधरी को मैदान में उतारा है। इसके अलावा मुकाबले में कांग्रेस, वाम दल और अन्य क्षेत्रीय ताकतों के उम्मीदवार भी हैं। BJP ने सखराव सरकार को पहले मुर्शिदाबाद जिले की पार्टी इकाई का नेतृत्व करने का अनुभव रहा है।
रेजीनगर में अल्पसंख्यक मतदाता चुनावी समीकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यही वजह है कि यहां BJP समेत सभी प्रमुख दलों ने अलग-अलग सामाजिक और विकास संबंधी मुद्दों पर मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिश की है।
4. चुनाव चिह्न और उम्मीदवारों को लेकर विवाद
दोनों उपचुनावों के दौरान उम्मीदवारों और चुनाव चिह्नों को लेकर भी विवाद सामने आए। कुछ क्षेत्रीय दलों ने चुनाव चिह्न आवंटन को लेकर चुनाव आयोग के फैसलों पर आपत्ति जताई।
नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी और बाद में जमानत का मुद्दा भी चुनावी बहस का हिस्सा बना। कांग्रेस ने उनकी गिरफ्तारी को लेकर सवाल उठाए, जबकि कानूनी प्रक्रिया अदालतों के सामने चली। हाई कोर्ट से अंतरिम जमानत मिलने के बाद प्रधान ने चुनाव प्रचार फिर शुरू किया।
रेजीनगर में भी उम्मीदवारों और संगठनों के बीच चुनावी पहचान तथा संगठनात्मक मजबूती को लेकर चुनौतियां सामने आईं। ऐसे में दोनों सीटों पर केवल बड़े दलों की लोकप्रियता ही नहीं, बल्कि स्थानीय संगठन और वोट ट्रांसफर भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
5. 6 अक्टूबर को वोटिंग, 9 अक्टूबर को नतीजे
अब दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होगा और 9 अक्टूबर को मतगणना के बाद नतीजे सामने आएंगे। नंदीग्राम में BJP अपनी विधानसभा चुनाव वाली स्थिति को बनाए रखने की कोशिश करेगी, जबकि कांग्रेस को TMC के समर्थन का लाभ मिलने की उम्मीद होगी। रेजीनगर में BJP के सामने बहुकोणीय मुकाबले में अपनी पकड़ मजबूत करने की चुनौती है।
इन उपचुनावों के नतीजे पश्चिम बंगाल की राजनीति में विपक्ष की आगे की रणनीति पर भी असर डाल सकते हैं। खासकर नंदीग्राम में TMC-कांग्रेस तालमेल और रेजीनगर में अलग-अलग दलों के बीच मुकाबला राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा।
हालांकि, अभी यह कहना संभव नहीं है कि किस उम्मीदवार की जीत होगी। अंतिम तस्वीर 6 अक्टूबर के मतदान और 9 अक्टूबर की मतगणना के बाद ही साफ होगी।
दिनांक: 5 अक्टूबर 2026
डिजिटल लाइव न्यूज | digitallivenews.com