
Report By: Kiran Prakash Singh
लद्दाख हिंसा की पहली बरसी पर सोनम वांगचुक ने न्यायिक जांच रिपोर्ट, मुआवजे और मीडिया कवरेज को लेकर सवाल उठाए और सरकार से जवाब मांगा।
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लद्दाख हिंसा की पहली बरसी पर सोनम वांगचुक के सवाल, जांच रिपोर्ट से मुआवजे तक उठाई आवाज
Digital Live News | 27 सितंबर 2026 | digitallivenews.com
लद्दाख में पिछले साल हुई हिंसा की पहली बरसी के मौके पर पर्यावरण कार्यकर्ता और लेह एपेक्स बॉडी से जुड़े सोनम वांगचुक ने कई मुद्दों को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने, हिंसा में प्रभावित लोगों के मुआवजे और घटना की मीडिया कवरेज को लेकर सरकार से जवाब मांगा।
24 सितंबर 2025 को लेह में राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा जैसी मांगों को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई थी। पुलिस फायरिंग में चार लोगों की मौत हुई थी। एक साल बाद 24 सितंबर 2026 को लद्दाख के कई हिस्सों में बंद और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए।
1. न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
वांगचुक ने हिंसा की न्यायिक जांच के निष्कर्षों को सार्वजनिक किए जाने की मांग दोहराई। उनका कहना है कि घटना को एक साल बीतने के बावजूद लोगों को अभी तक जांच के निष्कर्षों की जानकारी नहीं मिली है।
उन्होंने सवाल उठाया कि 24 सितंबर 2025 को आखिर क्या हुआ था, हिंसा किन परिस्थितियों में हुई और पुलिस कार्रवाई की परिस्थितियां क्या थीं। रिपोर्टों के अनुसार, प्रशासन ने घटना की परिस्थितियों की जांच के लिए न्यायिक जांच का आदेश दिया था।
2. पीड़ितों के मुआवजे का मुद्दा
वांगचुक ने हिंसा में मारे गए और घायल हुए लोगों के परिवारों के लिए उचित मुआवजे की मांग भी उठाई। उनके अनुसार, पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए केवल आर्थिक सहायता पर्याप्त नहीं है, बल्कि घटना की पूरी परिस्थितियों को सामने लाना भी जरूरी है।
इस बीच, लद्दाख प्रशासन ने हिंसा से जुड़े मामलों में 20 लोगों के खिलाफ दर्ज केस वापस लेने की घोषणा की है। अधिकारियों के अनुसार यह फैसला शांति और सामाजिक सद्भाव को ध्यान में रखते हुए लिया गया।
3. मीडिया कवरेज को लेकर वांगचुक के सवाल
वांगचुक ने पहली बरसी पर लद्दाख में हुए कार्यक्रमों की मीडिया कवरेज को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि शहीद दिवस के कार्यक्रमों और स्थानीय घटनाक्रम को पर्याप्त मीडिया कवरेज नहीं मिली।
उन्होंने मीडिया संस्थानों से सवाल किया कि लद्दाख से जुड़ी ऐसी महत्वपूर्ण घटनाओं की रिपोर्टिंग में कमी क्यों दिखाई देती है। यह उनका सार्वजनिक रूप से उठाया गया सवाल है और मीडिया कवरेज को लेकर उनके दावे पर अलग-अलग संस्थानों की ओर से व्यापक जवाब सामने नहीं आया है।
4. NSA कार्रवाई का भी उठाया मुद्दा
पिछले साल की हिंसा के बाद सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। गृह मंत्रालय ने मार्च 2026 में उनकी हिरासत तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी थी। मंत्रालय ने कहा था कि यह फैसला शांति, स्थिरता और सभी पक्षों के साथ सार्थक बातचीत के लिए अनुकूल माहौल बनाने के उद्देश्य से लिया गया।
वांगचुक ने अपनी हिरासत और उसके बाद की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि लद्दाख से जुड़े राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दों पर बातचीत के जरिए समाधान तलाशना जरूरी है।
5. छठी अनुसूची और लद्दाख की मांग
लद्दाख में लंबे समय से राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा की मांग उठती रही है। छठी अनुसूची के तहत संरक्षण, स्थानीय लोगों की राजनीतिक भागीदारी और जमीन-संस्कृति से जुड़े अधिकार आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे हैं।
पहली बरसी के मौके पर वांगचुक ने इन मांगों को फिर सामने रखा। उन्होंने कहा कि पिछले साल की हिंसा के कारणों और जिम्मेदारी को लेकर स्पष्टता जरूरी है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार का कहना है कि वह लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाए रखने तथा हितधारकों के साथ बातचीत के लिए प्रतिबद्ध है।
24 सितंबर को लद्दाख में शहीद दिवस के रूप में कार्यक्रम आयोजित किए गए और लेह समेत कई इलाकों में बंद भी देखा गया। वांगचुक ने हिंसा की जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक करने की मांग दोहराई, जबकि प्रशासन की ओर से 20 मामलों को वापस लेने का फैसला भी सामने आया है। ऐसे में लद्दाख से जुड़े न्याय, संवैधानिक सुरक्षा और राजनीतिक संवाद के मुद्दे एक बार फिर चर्चा में हैं।
दिनांक: 27 सितंबर 2026
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