
Report By: Kiran Prakash Singh
CJP के अभिजीत दीपके की चुनाव बहिष्कार की अपील पर TMC नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने जवाब दिया। उन्होंने चुनाव लड़ने और निष्पक्ष चुनाव की मांग जारी रखने की बात कही।
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चुनाव बहिष्कार की अपील पर TMC का जवाब, डेरेक ओ’ब्रायन ने रखी बात
Digital Live News | 26 सितंबर 2026 | digitallivenews.com
चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके की चुनाव बहिष्कार की अपील पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है। TMC के संयुक्त सचिव और राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि विपक्षी दलों को चुनावों में हिस्सा लेते रहना चाहिए और साथ ही स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव की मांग को लेकर अपनी लड़ाई जारी रखनी चाहिए।
अभिजीत दीपके ने क्यों की चुनाव बहिष्कार की अपील?
अभिजीत दीपके ने हालिया चुनावी विवादों के बीच विपक्षी दलों से चुनावों के बहिष्कार पर विचार करने की अपील की। उनका तर्क है कि यदि विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हैं और फिर उसी व्यवस्था में लगातार चुनाव लड़ते हैं, तो इससे उस प्रक्रिया को वैधता मिलने का संदेश जा सकता है।
दीपके ने सवाल उठाया कि यदि राजनीतिक दलों को चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है तो वे चुनाव में हिस्सा क्यों लेते हैं। उन्होंने वोटों की कथित हेराफेरी, राजनीतिक दलों में टूट और निर्वाचित प्रतिनिधियों के पाला बदलने जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया।
CJP की ओर से इससे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की गई थी। संगठन ने 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए मांग पूरी नहीं होने पर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की बात कही थी।
डेरेक ओ’ब्रायन ने चुनाव में बने रहने की बात कही
अभिजीत दीपके की अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए डेरेक ओ’ब्रायन ने चुनाव बहिष्कार के बजाय चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों को चुनाव लड़ते रहना चाहिए, साथ ही स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मांग को लेकर संघर्ष भी जारी रखना चाहिए।
ओ’ब्रायन ने सोशल मीडिया पर यह तर्क दिया कि यदि विपक्षी दल चुनाव से बाहर हो जाते हैं तो इसका राजनीतिक लाभ बीजेपी को मिल सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ऐसी स्थिति में बीजेपी सभी सीटें जीत सकती है और उसके बाद संविधान में बदलाव कर सकती है। यह डेरेक ओ’ब्रायन का राजनीतिक दावा है, न कि स्थापित तथ्य।
ओ’ब्रायन ने कार्यकर्ताओं का भी किया जिक्र
TMC नेता ने चुनाव बहिष्कार के संभावित प्रभाव को केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं बताया। उन्होंने उन पार्टी कार्यकर्ताओं का भी जिक्र किया जो चुनाव के दौरान बूथ और जमीनी स्तर पर काम करते हैं।
उनके मुताबिक, चुनाव से दूर रहने का असर राजनीतिक संगठनों की गतिविधियों और कार्यकर्ताओं की भूमिका पर भी पड़ सकता है। इसलिए उनका रुख है कि राजनीतिक दलों को चुनावी मैदान में मौजूद रहकर अपने मुद्दे उठाने चाहिए।
इस तरह दीपके और ओ’ब्रायन की ओर से सामने आए तर्कों में चुनाव में भागीदारी बनाम बहिष्कार का अंतर साफ दिखाई देता है।
चुनाव आयोग को लेकर पहले से जारी है विवाद
यह बयान ऐसे समय आया है जब चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR यानी Special Intensive Revision को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा है। CJP ने भी इसी व्यापक विवाद के बीच CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और इस्तीफे की मांग की है।
इसी मुद्दे पर विपक्षी दलों के कई नेता चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची से जुड़े मामलों पर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि अलग-अलग राय और चर्चा संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं तथा फैसले आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं।
डेरेक ओ’ब्रायन खुद भी इससे पहले CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग से जुड़े राजनीतिक अभियान पर टिप्पणी कर चुके हैं। 23 सितंबर की रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने राज्यसभा में CEC के खिलाफ लंबित प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की मांग की थी।
बहिष्कार बनाम चुनाव लड़ने की बहस
मौजूदा विवाद में दो अलग-अलग राजनीतिक रास्ते सामने आ रहे हैं। अभिजीत दीपके का कहना है कि जिन चुनावों की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनका बहिष्कार एक राजनीतिक संदेश हो सकता है। वहीं डेरेक ओ’ब्रायन का कहना है कि विपक्ष को चुनाव में हिस्सा लेते हुए ही स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मांग करनी चाहिए।
इस बहस का एक व्यापक पहलू मतदाताओं की भूमिका से भी जुड़ा है। चुनावी प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की भागीदारी, मतदाता सूची की शुद्धता और चुनाव आयोग की संस्थागत भूमिका लोकतांत्रिक प्रक्रिया के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
फिलहाल CJP की ओर से चुनाव बहिष्कार की अपील और TMC की ओर से इसके जवाब ने चुनावी भागीदारी और चुनाव सुधार को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग और SIR से जुड़े विवाद पर राजनीतिक दलों के अगले कदम इस बहस की दिशा तय करेंगे।
दिनांक: 26 सितंबर 2026
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