
Report By: Kiran Prakash Singh
NCP (SP) नेता जितेंद्र आव्हाड ने CEC ज्ञानेश कुमार और Form 6 को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने युवाओं के मतदाता पंजीकरण और चुनावी प्रक्रिया पर चिंता जताई।
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CEC विवाद के बीच जितेंद्र आव्हाड ने उठाए चुनावी प्रक्रिया पर सवाल
चुनाव आयोग और SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता जितेंद्र आव्हाड ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। आव्हाड ने दावा किया कि मौजूदा प्रक्रिया से देश के युवाओं के लिए मतदाता बनना मुश्किल हो सकता है।
उन्होंने विशेष रूप से Form 6 का जिक्र करते हुए कहा कि नए मतदाताओं से मांगी जा रही जानकारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आव्हाड ने कहा कि वह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की अपील करने की बात कह रहे हैं। उनके बयान राजनीतिक आरोप और मांग के रूप में हैं, जिन्हें अदालत या किसी स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
सरकार और Gen Z को लेकर आव्हाड का दावा
NCP (SP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता जितेंद्र आव्हाड ने आरोप लगाया कि सरकार Gen Z और Gen Alpha को लेकर चिंतित है और इसी वजह से चुनावी प्रक्रिया को जटिल बनाया जा रहा है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए दावा किया कि उनका इस्तेमाल युवाओं को मतदाता बनने से रोकने के लिए किया जा रहा है।
आव्हाड ने सवाल उठाया कि अगर देश की नई पीढ़ी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शामिल होना चाहती है तो उसे मतदाता बनने के लिए आसान व्यवस्था क्यों नहीं मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि Form 6 में परिवार से जुड़ी कई जानकारियां पूछे जाने को लेकर भी सवाल हैं। हालांकि, Form 6 से संबंधित वास्तविक आवश्यकताओं और नियमों की व्याख्या चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रक्रिया के अनुसार की जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की अपील
जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि वह इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की अपील करने जा रहे हैं। उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मतदाता अधिकारों को लेकर अपनी चिंता जाहिर की।
आव्हाड ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े तंत्र पर भी सवाल उठाए। उन्होंने नियुक्ति समिति में प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था में बहुमत के आधार पर फैसला होने की स्थिति में निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ सकते हैं।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि नियुक्ति प्रक्रिया और उससे जुड़े कानूनी प्रावधानों की संवैधानिक वैधता तथा व्याख्या का अंतिम निर्धारण न्यायपालिका और संबंधित कानूनों के आधार पर होता है।
वोटर लिस्ट के सर्वर को लेकर भी आरोप
आव्हाड ने महाराष्ट्र की मतदाता सूची को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कुछ स्थानों पर वोटर लिस्ट का सर्वर किसी अन्य व्यवस्था के जरिए मैनेज किए जाने की शिकायत पहले भी उठाई गई थी।
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के साथ शिवसेना और कांग्रेस ने भी पहले मतदाता सूची के डिजिटल प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए थे। आव्हाड ने चुनाव आयोग की डिजिटल प्रणाली और ऐप से जुड़े संभावित बदलावों पर भी चिंता जताई।
हालांकि, इन आरोपों के संबंध में किसी स्वतंत्र जांच या न्यायिक निष्कर्ष का उल्लेख उनके बयान में नहीं किया गया है। इसलिए इन्हें राजनीतिक दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
Form 6 को लेकर क्या है आव्हाड की आपत्ति?
आव्हाड ने कहा कि नए मतदाताओं के लिए Form 6 की प्रक्रिया को आसान होना चाहिए। उनका तर्क है कि यदि पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं से बहुत अधिक जानकारी मांगी जाएगी तो प्रक्रिया उनके लिए कठिन हो सकती है।
उन्होंने संविधान में दिए गए मतदान के अधिकार का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों के लिए मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया सरल होनी चाहिए।
Form 6 नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाला आवेदन फॉर्म है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया में चुनाव आयोग की ओर से निर्धारित दस्तावेज और जानकारी मांगी जाती है। SIR के दौरान मतदाता सूची की जांच और सत्यापन से जुड़े अतिरिक्त प्रावधानों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस चल रही है।
चुनाव आयोग विवाद पर आगे क्या?
CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों की ओर से लगातार बयान सामने आ रहे हैं। SIR, मतदाता सूची, Form 6 और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली इस राजनीतिक विवाद के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।
जितेंद्र आव्हाड ने इन मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की बात कही है। अब आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यदि इस मामले में कोई याचिका दाखिल होती है तो अदालत उसका किस तरह संज्ञान लेती है और संबंधित पक्षों की दलीलों पर क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है।
फिलहाल आव्हाड के आरोपों और मांगों के साथ चुनाव आयोग का पक्ष भी इस पूरे विवाद को समझने के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
दिनांक: 25 सितंबर 2026
digitallivenews.com